बिजनेस स्टैंडर्ड - सेबी से केंद्र को मिलेगा धन!
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सेबी से केंद्र को मिलेगा धन!

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली 01 23, 2019

आएगा नया कानून

बिजनेस स्टैंडर्ड सेबी से केंद्र को मिलेगा धन!केंद्र सरकार ने एक नया कानून लाने का फैसला किया है, जिसके तहत नियामकों व अन्य स्वायत्त निकायों को अतिरिक्त नकदी खजाने में स्थानांतरित करनी होगी। इस मामले से जुड़े दो सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी है। नए दिशानिर्देश एक महीने में आ सकते हैं।  सरकार के इस कदम के बाद भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और दर्जनों अन्य नियामकों जैसे भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) और पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) को अपनी भंडारित राशि का अहम हिस्सा भारत की संचित निधि में जमा करना होगा। 

केंद्र सरकार इन संसाधनों पर नजर लगाए हुए है, जिससे वह राजकोषीय घाटा कम कर सके। बहरहाल विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से नियामकीय निकायों की स्वतंत्रता प्रभावित होगी।  उपरोक्त उल्लिखित एक सूत्र ने कहा, 'हमने सेबी से कहा है कि वह आंतरिक परिचालन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी व्यय का ब्योरा उपलब्ध कराए। इसकी शेष राशि सार्वजनिक खाते में जाएगी और सरकार उस राशि का आवंटन जरूरत के मुताबिक कर सकेगी।' उनके मुताबिक परिचालन से जुड़े पहलुओं और अतिरिक्त फंड संबंधी मसलों पर अंतिम आम राय के लिए और विचार विमर्श की जरूरत है। 

स्वायत्त निकायों में सबसे ज्यादा अतिरिक्त भंडार सेबी के पास है और दूसरे स्थान पर आईआरडीएआई है। इसलिए सरकार योजना बना रही है कि पहले वह सेबी अधिनियम में संशोधन करे और उसके बाद शासी निकायों के अन्य अधिनियमों में बदलाव करे। सूत्रों ने कहा कि सेबी के बोर्ड की 9 फरवरी को होने वाली बैठक में इस मसले पर वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा हो सकती है, जिससे आगे के बारे में फैसला किया जा सके

सेबी के हाल के सालाना वित्तीय ब्योरे के मुताबिक उसके पास मार्च 2017 तक 3,170 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भंडार है। बहरहाल इसमें आईडीबीआई बैंक की बिल्डिंग की खरीद को शामिल नहीं किया गया है, जिसे नियामक ने करीब 1,000 करोड़ रुपये में खरीदा है। सेबी को इस सिलसिले में भेजे गए ई मेल का कोई उत्तर नहीं मिला। सेबी व अन्य से अतिरिक्त पूंजी भंडार की केंद्र की मांग लंबे समय से लंबित है। इसे तब और बल मिला जब सीएजी ने 2017 की अपनी रिपोर्ट में केंद्र से ऐसा करने को कहा। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक कुल 14 नियामक और स्वायत्तशासी निकाय हैं, जिनके पास मार्च 2017 तक 6,064 करोड़ रुपये नकदी थी।  इन निकायों द्वारा लिए जाने शुल्क, सरकार से मिले अनुदान न खर्च होने, या बजट सरप्लस के अलावा अन्य संसाधनों से यह राशि जमा होती है, जिसका समय के साथ समायोजन किया जाता है। इससे स्वायत्त संगठनों को वित्तीय लचीलापन मिलता है।

इस राशि का इस्तेमाल क्षमता विस्तार, बुनियादी ढांचा विकास और संगठन के विस्तार में किया जाता है।  सूत्र ने कहा, 'इसके पहले सेबी सहित नियामकीय निकाय अपने अतिरिक्त राजस्व में सरकार को हिस्सा देने को लेकर सुस्त रहे हैं। ऐसे हस्तांतरण के लिए कानूनी प्रावधान साफ नहीं है, ऐसे में सरकार का अनुरोध सलाहों में खत्म हो गया। हाल में नियामकों के साथ गहन चर्चा के बाद, जिसमें मंत्रालय व अन्य पक्ष शामिल थे, यह मामला सुलझने को है।'
Keyword: IRDAI, sebi, pension, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
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