बिजनेस स्टैंडर्ड - चीन की सुस्ती का नहीं होगा असर
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चीन की सुस्ती का नहीं होगा असर

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 01 22, 2019

अमेरिकी व्यापार युद्ध से चीन में गिरावट

अमेरिका के साथ कारोबारी जंग और अर्थव्यवस्था में ढांचागत बदलाव चीन में विनिर्माण गतिविधियों में गिरावट की मुख्य वजह
चीन भारत के खनन उत्पादों पर निर्भर, भारत से इसके निर्यात में 4.3 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद
चीन को होता है सबसे ज्यादा ऑर्गेनिक केमिकल निर्यात

बिजनेस स्टैंडर्ड चीन की सुस्ती का नहीं होगा असरचीन में औद्योगिक मांग में मौजूदा गिरावट के बावजूद भारत का चीन को निर्यात 2019 में स्थिर रहने की संभावना है। निर्यातकों का कहना है कि चीन में विनिर्माण गतिविधियों में हाल की गिरावट की मुख्य वजह अर्थव्यवस्था में ढांचागत बदलाव और अमेरिका के साथ चल रहे कारोबारी जंग है, जो भारत के लिए लाभदायक बना रहेगा।  भारत के निर्यात के चौथे बड़े बाजार का हाल के दिनों में निर्यात घटने के साथ अर्थव्यवस्था सुस्त हुई है और उपभोक्ताओं की मांग कमजोर पड़ी है। सरकार और परिवारों की खपत 2018 में चीन के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि का 76 प्रतिशत रहा है, जो एक साल पहले की तुलना में 18.6 प्रतिशत ज्यादा है। कम खुदरा बिक्री और विनिर्माण गतिविधियों में 19 महीनों में पहली गिरावट की वजह से आर्थिक वृद्धि घटकर 6.6 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो चीन की पिछले 28 साल की सबसे सुस्त वृद्धि दर है। 

सत्तासीन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना इस समय वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए आपातकालीन कदमोंं पर विचार कर रही है। भारत के निर्यातकों का कहना है कि सिर्फ देश के सबसे बड़े कारोबारी साझेदार के साथ ही कारोबार बढ़ सकता है। उनका तर्क है कि ऑर्गेनिक केमिकल्स, लौह अयस्क और कपास जैसे कच्चे माल की बड़ी मात्रा के बगैर काम नहींं कर सकता, जिसकी हिस्सेदारी भारत के चीन को होने वाले 13.33 अरब डॉलर निर्यात बास्केट में  70 प्रतिशत से ज्यादा है।  इसमें बढ़ोतरी की संभावना है क्योंकि बीजिंग मेंं आर्थिक गतिविधियां श्रम आधारित खनन और सस्ते विनिर्माण से हटकर मूल्यवर्धन और टेक इनएबल्ड उत्पाद की ओर जा रही हैं। देश में औसत वेतन और आबादी की उम्र बढ़ी है और यह बदलाव 5 साल में पूरा होगा। 

फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि चीन भारत के खनन उत्पादों पर निर्भर है और भारत से इसके निर्यात में 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है। उन्होंने कहा, 'मौजूदा कारोबारी जंग का दबाव दक्षिण पूर्वी देशों जैसे वियतनाम पर पड़ा है जो चीन को कंपोनेंट और टेक उत्पाद का निर्यात करते हैं। इससे भारत का निर्यात प्रभावित नहीं हुआ है, और यह जुलाई-नवंबर के दौरान 32 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है।'  भारत से सबसे ज्यादा ऑर्गेनिक केमिकल्स का निर्यात चीन को होता है। 2017-18 में इसका निर्यात 2.1 अरब डॉलर का था, जो इस वित्त वर्ष के पहले 8 महीने में ही इससे जयादा हो चुका है। प्रसंस्कृत कच्चे तेल के मामले में भी यही स्थिति है। 2.3 अरब डॉलर का तेल भेजा जा चुका है, जो 2017-18 में 1.4 अरब डॉलर था। 

कॉटन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के कार्यकारी निदेशक ने कहा, 'कारोबारी जंग से अमेरिका से आने वाला माल कम हुआ है और भारत से कच्चे माल और धागे का निर्यात चीन के बाजार में बढ़ा है। ट्रंप प्रशासन की अचानक प्रतिक्रिया को लेकर अमेरिका की फर्में चीन के साथ सौदे करने में डर रही हैं।' पिछले वित्त वर्ष में कपास के 7 सौदों में से एक सौदा चीन को गया। चीन को भारत से कपास का निर्यात 1 अरब डॉलर का रहा है, जो स्थिर बना है।  विनिर्मित उत्पादों के विनिर्माता भी आशावान हैं। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन रवि सहगल ने कहा, 'चीन इस समय श्रम आधारित उत्पादों के विनिर्माण से बाहर हो रहा है। मूल्यवर्धन और प्रदूषण घटाने पर उसका ध्यान केंद्रित होने की वजह से देश भर में इकाइयां बंद हो रही हैं। ऐसे में हमारे निर्यातक फोर्जिंग व कॉस्टिंग उत्पादों के बड़े सौदे कर रहे हैं।' 

वाणिज्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, 'भारत के निर्यात वृद्धि की राह में एक मात्र बाधा यह है कि नीतियों में बदलाव कर चीन ने ऐसे आयात को घटा दिया है, जिनका वह निर्यात करता है। यह उसके घरेलू अनुषंगीकरण पर ध्यान केंद्रित करने के साथ डिजाइन में बदलाव का परिणाम है।'  वहींं इस समय चीन से आयात भी बढ़ रहा है। आयात में जहां स्थिरता और मामूली वृद्धि बनी हुई है, भारत ने 2017-18 में 25 प्रतिशत ज्यादा चाइनिज सामान मंगाए हैं। चीन के साथ भारत का कारोबारी घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले 8 महीने में बढ़कर 141 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है, जिसमें रुपये की गिरावट की भी भूमिका है। 
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