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लिबर्टी के खिलाफ होगी कार्रवाई

आशिष आर्यन / नई दिल्ली January 22, 2019

नैशनल कंपनी लॉ अपीली ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) मंगलवार को लिबर्टी हाउस ग्रुप जैसी कंपनियों के खिलाफ काफी सख्त नजर आया, जिसने कॉरपोरेट दिवालिया समाधान के तहत कर्ज से लदी फर्म के लिए कामयाब बोली लगाई, लेकिन बाद में कुछ कारणों का हवाला देते हुए इससे बाहर निकल गई। न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की अगुआई वाले पीठ ने कहा, हम फैसला लेंगे कि ऐसी कंपनियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होनी चाहिए। एनसीएलएटी ने ये बातें एमटेक ऑटो की सहायक एआरजीएल की दिवालिया समाधान प्रक्रिया से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान ये बातें कही। लिबर्टी हाउस एआरजीएल की सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर उभरी थी, जिसके बाद कंपनी के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी कंपनी से मांगी थी। लिबर्टी हाउस ने हालांकि कहा कि दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही एमटेक समूह की तीन कंपनियों के लिए बोली लगाना उसके लिए किफायती व व्यावहारिक होगा और तभी वह समाधान प्रक्रिया को आगे बढ़ा पाएगी। अपनी याचिका में लिबर्टी हाउस ने कहा है, हमें उन कंपनियों के लिए बोली लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि ये एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। कंपनी ने एनसीएलएटी से अनुरोध किया कि सभी समाधान प्रक्रिया एनसीएलटी के एक पीठ को हस्तांतरित किया जाए।
 
पीठ ने हालांकि लिबर्टी हाउस के दोनों अनुरोध को ठुकरा दिया और कहा कि कंपनियों की समाधान प्रक्रिया शर्त के साथ नहीं होनी चाहिए। एनसीएलएटी ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख 5 फरवरी को इस संबंध में आदेश पारित करेगा, जहां कंपनियों ने कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया में गंभीरता से विचार कर बोली नहीं लगाई और इसे पूरा करने में नाकाम रही। 7 जनवरी की पिछली सुनवाई में एनसीएलएटी ने लिबर्टी हाउस से पूछा था कि क्या वह एआरजीएल के लिए जमा कराई गई समाधान योजना पर आगे बढऩा चाहती है। तब कंपनी ने कहा था कि लेनदारों की समिति और अन्य लेनदारों एक या अन्य वजहों से परेशानी में नहीं पडऩा चाहिए।
 
एआरजीएल को पिछले साल मार्च में एनसीएलटी भेजा गया था जब कंपनी ने स्टेट बैंक ऑफ मैसूर व स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद के 360 करोड़ रुपे के कर्ज भुगतान में चूक की थी। एआरजीएल एमटेक ऑटो की सहायक है, जिसे कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया के लिए भेजा गया है। समूह की मुख्य कंपनी एमटेक ऑटो को भी पिछले साल जुलाई में एनसीएलटी में घसीटा गया जब कंपनी ने 12,300 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान में चूक की। 42 अरब रुपये की बोली के साथ लिबर्टी हाउस को इस कंपनी के लिए भी कायमाब समाधान आवेदक घोषित किया गया था। योजना की शर्तों के मुताबिक, संजीव गुप्ता की अगुआई वाली लिबर्टी हाउस को 33.10 अरब रुपये अग्रिम चुकाना था और 22 नवंबर तक 3.5 अरब रुपये की पूंजी लगानी थी, जो योजना की मंजूरी के 90 दिन के भीतर होता। हालांकि बार-बार अनुरोध किए जाने के बाद भी कंपनी ने कुछ नहीं चुकाया, जिसके बाद सीओसी ने एनसीएलटी चंडीगढ़ का दरवाजा खटखटाया और कंपनी के खिलाफ आईबीसी की धारा 74 के इस्तेमाल की मांग की। सीओसी ने लिबर्टी हाउस को किसी बी कंपनी के लिए बोली लगाने से रोकने की भी मांग की।
Keyword: liberty house, NCLT, defaulter,,
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