बिजनेस स्टैंडर्ड - परिसमापन में जाएगी फाल्कन टायर्स!
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परिसमापन में जाएगी फाल्कन टायर्स!

अभिषेक रक्षित / कोलकाता 01 22, 2019

अनुमानित परिसमान मूल्य करीब 797 करोड़ रुपये

बोलीदाताओं को आकर्षित करने में विफल रहने से परिसमापन में जा सकती है फाल्कन टायर्स
कंपनी एनसीएलटी के बेंगलूरु पीठ में ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है

बिजनेस स्टैंडर्ड परिसमापन में जाएगी फाल्कन टायर्स!रुइया समूह के पूर्व स्वामित्व वाली कंपनी फाल्कन टायर अपनी दबावग्रस्त परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए बोलीदाताओं को आकर्षित करने में विफलता कि बाद परिसमापन में जा सकती है। कंपनी फिलहाल नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के बेंगलूरु पीठ में ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है। परिसमापन के मामले में लेनदारों को कम से कम 52 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ सकता है। कंपनी के लिए अनुमानित परिसमान मूल्य करीब 797 करोड़ रुपये है जबकि उसने 1,531 करोड़ रुपये के मूल्य का दावा किया है।

सूत्रों ने कहा कि कंपनी का परिसंपत्ति मूल्य 105 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हो सकता क्योंकि संयंत्र और मशीनरी के अवमूल्यन के कारण उत्पादन अस्थिर हो चुका है। हालांकि मैसूर में उसके 18 एकड़ के भूखंड को जमानत के तौर पर रखा गया है जिसकी कीमत करीब 693 करोड़ रुपये है। कंपनी के लेनदारों की समिति के एक सदस्य ने कहा, 'हमें जो रास्ता दिख रहा है उसमें अब केवल परिसमापन ही एकमात्र विकल्प बचा है क्योंकि फाल्कन टायर्स के अधिग्रहण में एक भी कंपनी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है।'

सूत्रों का कहना है कि कुल मिलाकर कंपनी 'जटिल वित्तीय अनियमितता' दिखती है जो उसके अधिग्रहण में निवेशकों की दिलचस्पी न होने का एक प्रमुख कारण हो सकता है। अगस्त 2018 में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मनाली प्रॉपर्टीज ऐंड फाइनैंस और उसके निदेशक पर 8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। सेबी के आदेश के अनुसार, अप्रैल 2012 में जांच अवधि के दौरान सौमित्र घोष उसके निदेशक थे। एक लेनदार ने कहा कि यह जुर्माना इसलिए लगाया गया था क्योंकि घोष और मनाली प्रॉपर्टीज ने फाल्कन टायर्स और डनलप इंडिया के शेयर अधिग्रहण संबंधी मांगी गई जानकारी नहीं दी थी।

हालांकि विभिन्न उल्लंघनों के कारण सेबी द्वारा फाल्कन टायर्स पर लगाए गए जुर्माने की कुल रकम बढ़कर 1.13 करोड़ रुपये हो चुकी है। प्रमुख लेनदार एडेलवाइस ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी  ने ब्याज के साथ 1,253.36 करोड़ रुपये का दावा किया है। जबकि एसबीआई ग्लोबल फैक्टर्स ने 97.27 करोड़ रुपये, पंजाब नैशनल बैंक ने 68.85 करोड़ रुपये, भारतीय स्टेट बैंक ने 59.41 करोड़ रुपये और चार अन्य लेनदारों ने बकाये का दावा किया है। इसके अलावा सेबी, श्रमिकों और व्यक्तिगत लेनदार सहित परिचालन एवं अन्य लेनदारों ने कुल मिलाकर 536 करोड़ रुपये से अधिक का दावा किया है।

यह पूछे जाने पर कि सरकार निवेशक तलाशने में कंपनी की मदद करने की कोशिश कर रही है और इससे लेनदारों को कोई आपत्ति तो नहीं, प्रमुख लेनदार ने कहा, 'हमारे पास समय है और हमने एक बार सभी प्रमुख टायर विनिर्माताओं से अपील की है कि वे एक समाधन योजना के साथ आगे आएं लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। मैं समझता हूं कि सभी हितधारकों के लिए अच्छा यही रहेगा कि कंपनी को परिसमापन में डाला जाए।' पहले दौर के तहत समाधान योजना जमा कराने की अवधि 17 अगस्त 2018 को खुली थी जिसे 3 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया। दूसरे चरण के तहत आवेदन मंगाया गया था जिसे जमा कराने की अंतिम तिथि 28 दिसंबर थी लेकिन अब तक एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ।

हालांकि एनसीएलटी को इस मामले में अपना आदेश सुनाना अभी बाकी है लेकिन श्रमिकों ने कंपनी के पुनरुद्धार के लिए पहले ही राज्य सरकार से संपर्क किया है। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने एक बैठक भी बुलाई है ताकि कंपनी को परिसमापन से बचाया जा सके क्योंकि इससे लोगों की नौकरियां सुरक्षित रहेंगी। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने एक कार्यक्रम में सार्वजनिक तौर पर जेके टायर से इस कंपनी का अधिग्रहण करने की अपील की। सूत्रों ने कहा कि जेके टायर को राज्य सरकार से आधिकारिक तौर पर इस बाबत कोई पत्र नहीं मिला है और फिलहाल यह भी पता नहीं है कि कंपनी के अधिकारी बैठक में भाग लेंगे या नहीं।
Keyword: ruiya, tyre, NCLT,,
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