बिजनेस स्टैंडर्ड - राष्ट्रपति का अभिभाषण अंतरिम बजट की ही तरह होगा अहम
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, July 20, 2019 08:50 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

राष्ट्रपति का अभिभाषण अंतरिम बजट की ही तरह होगा अहम

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  January 21, 2019

संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त होने के महज तीन सप्प्ताह बाद नया सत्र 31 जनवरी को प्रारंभ होगा। शीतकालीन संसदीय सत्र 11 दिसंबर, 2018 को शुरू हुआ था। करीब एक महीने के शीतकालीन सत्र में 17 दिन सदन की कार्यवाही चली। आठ जनवरी को लोक सभा और नौ जनवरी को राज्य सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। राष्ट्रपति ने 10 जनवरी को दोनों सदनों का सत्रावसान कर दिया और इस तरह संसद के शीतकालीन सत्र का समापन हो गया। सरकार के लिए यह एक राजनीतिक जरूरत थी। मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2018 यानी तीन तलाक विधेयक को अभी राज्य सभा से हरी झंडी नहीं मिली है। इस विधेयक के प्रावधानों को लागू करने के लिए लाए गए अध्यादेश की समयसीमा 21 जनवरी को खत्म हो रही है। अगर संसद के शीतकालीन सत्र का सत्रावसान नहीं किया गया होता तो सरकार अध्यादेश को दोबारा जारी नहीं कर सकती थी। 

 
यह भी एक कारण है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने वर्ष 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा समान परिस्थिति में अपनाया गया रास्ता नहीं चुना। वह भी चुनावी वर्ष था। तब संसद का शीतकालीन सत्र 2 दिसंबर, 2003 को शुरू हुआ था। कुछ दिन तक सदन चलने के बाद 23 दिसंबर को लोक सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। उसी दिन राज्य सभा की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। लेकिन दोनों सदनों के शीतकालीन सत्र का सत्रावसान नहीं किया गया। दूसरे शब्दों में कहें तो सत्र यथावत रहा। नियमों में मौजूद इस प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए लोक सभा के महासचिव ने 20 जनवरी, 2004 को एक नोटिस जारी किया और 29 जनवरी से निचले सदन के सत्र को बहाल कर दिया। इसी तरह राज्य सभा का सत्र 30 जनवरी से बहाल कर दिया गया। 
 
इससे बड़ा विवाद पैदा हुआ। संसद में इस बात पर जमकर बहस हुई कि क्या राष्ट्रपति को नए साल के पहले सत्र की शुरुआत में अभिभाषण का मौका न देकर नियमों का उल्लंघन किया गया। सरकार की दलील थी कि 29 और 30 जनवरी, 2004 से शुरू हुआ सत्र नया सत्र नहीं था बल्कि यह शीतकालीन सत्र का ही दूसरा चरण था जिसे 23 दिसंबर, 2003 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। इसे अदालत में भी चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि 29 जनवरी को शुरू हुए संसद के सत्र में राष्ट्रपति को अभिभाषण का मौका नहीं दिया जाना संविधान का उल्लंघन है। लेकिन याचिका को खारिज कर दिया गया। 
 
आखिर वाजपेयी सरकार को जनवरी 2004 के सत्र को पहले सत्र का विस्तारित सत्र बनाकर क्या हासिल हुआ? इससे राष्ट्रपति के अभिभाषण की जरूरत खत्म हो गई। वर्ना उन्हें अपने अभिभाषण के जरिये संसद के दोनों सत्रों को सरकार की योजना की जानकारी देनी पड़ती। इसके बजाय वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने 3 फरवरी, 2004 को अंतरिम बजट पेश किया और इसके कुछ दिन बाद 6 फरवरी, 2004 को लोकसभा भंग कर दी गई जिससे मई 2004 में आम चुनावों का रास्ता साफ हुआ। राष्ट्रपति ने उस साल आम चुनावों के उपरांत नई सरकार के बनने के बाद 7 जून को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया।
 
संभव है कि संसद के दोनों सदनों का सत्रावसान करने के फैसले के लिए मोदी सरकार की कुछ और सोच रही होगी। 31 जनवरी, 2019 को शुरू हो रहे संसद के सत्र को नए साल में पहला सत्र माना जाएगा। इससे राष्ट्रपति को संसद के दोनों सदनों को संबोधित करना पड़ेगा। इससे सरकार को राष्ट्रपति के अभिभाषण के जरिये आने वाले साल के लिए अपना एजेंडा देश के सामने रखने का मौका मिल जाएगा। आने वाले महीनों में  आम चुनावों को देखते हुए सरकार इस मौके को गंवाना नहीं चाहती है।
 
संसद के आने वाले सत्र पर पूरे देश की नजर रहेगी क्योंकि इस दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेंगे। जेटली ने हालिया बयान में कहा था कि वह मौजूदा आर्थिक वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए बजट पेश करेंगे। इससे इन अटकलों को बल मिला है कि वह नई नीतियों और करदाताओं के लिए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा कर सकते हैं। अंतरिम बजट से पहले आर्थिक समीक्षा पेश नहीं की जाएगी। इस तरह 2018-19 के दौरान अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में आधिकारिक आकलन के लिए पूर्ण बजट तक इंतजार करना होगा जो आम चुनावों के बाद बनने वाली नई सरकार पेश करेगी। 2014 की तरह आर्थिक समीक्षा आम चुनावों में बाद संसद में पेश की जाएगी जिससे 2018-19 में अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर सामने आएगी। तब तक सभी संबंधित आंकड़े भी उपलब्ध हो जाएंगे। इसलिए 31 जनवरी को संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण ज्यादा अहम हो गया है क्योंकि इसमें अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में सरकार का रिपोर्ट कार्ड होगा। यह अंतरिम बजट की घोषणाओं से कम अहम नहीं होगा जो जेटली एक दिन बाद पेश करेंगे।
Keyword: parliament, narendra modi, BJP, session, budget, president, arun jaitley,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई के संकेत के बाद कर्ज सस्ता करेंगे बैंक?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.