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रुख नरम कर सकता है रिजर्व बैंक

अनूप रॉय / मुंबई January 20, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास की वृद्धि को लेकर जताई गई चिंता का पूरा असर फरवरी के नीतिगत फैसले में दरों में भारी कटौती के रूप में पडऩे की संभावना नहीं है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इसके बजाय दरों में बदलाव को लेकर रिजर्व बैंक का रुख 'बढ़ी हुई सख्ती' से 'उदार' हो सकता है।  रिजर्व बैंक के गवर्नर ने शुक्रवार को एक बार फिर दोहराया कि महंगाई दर से लड़ाई के बीच वृद्धि को ध्यान में रखे जाने की जरूरत है। रिजर्व बैंक के विधायी बहुमत के मुताबिक केंद्रीय बैंक को 'वृद्धि के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए' कीमतों में स्थिरता बनाए रखने की जरूरत है। रिजर्व बैंक वृद्धि से पूरी तरह बंधा हुआ नहीं है, बल्कि इसे ध्यान में रखा जाता है। 
 
वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन के दौरान अपने भाषण में उन्होंने अपने अक्टूबर के ट्वीट का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है, 'मौजूदा मोड़ पर विभिन्न देशों में केंद्रीय बैंक की अहम भूमिका है। स्थिति को समझने की कोशिश करने और उसके मुताबिक विभिन्न दायित्वों को देखते हुए निर्णयात्मक फैसले करने की चुनौती है।' शुक्रवार के भाषण में गवर्नर के रूप में दास ने कहा कि वह 'इन सिद्धांतों के मुताबिक काम करने का प्रयास करेंगे'।  अर्थशास्त्री इसका बहुत ज्यादा मतलब नहीं निकाल रहे हैं। इसी भाषण में दास ने यह भी कहा था कि रिजर्व बैंक के सामने 3 प्रमुख नीतिगत चुनौतियों में 'महंगाई दर', 'वित्तीय क्षेत्र' और 'बाहरी क्षेत्र' शामिल हैं। दास ने अपने भाषण में कहा था, 'कीमतों में स्थिरता बरकरार रखना केंद्रीय बैंक का मुख्य काम है। महंगाई दर कम स्तर पर रखने से घरेलू और विदेशी निवेशकों में आत्मविश्वास आता है।'
 
दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 2.2 प्रतिशत थी। इससे तमाम विश्लेषक सकारात्क रूप से आश्चर्यचकित हुए थे, लेकिन कहा था कि दबाव बना हुआ है।  भारतीय स्टेट बैंक के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष ने कहा कि हकीकत यह है कि शहरी महंगाई दर घटी है, जिसकी वजह से कुल महंगाई दर में कमी आई है, लेकिन अगस्त से दिसंबर के बीच ग्रामीण महंगाई दर दरअसल बढ़ी है।   घोष ने कहा, 'शहरी और ग्रामीण महंगाई दर में सकारात्मक सह संबंध होता है। ये एक दिशा में चलती हैं। लेकिन पिछले दो-तीन महीनों में यह स्थिति बदली है। यह आंकड़ों में बदलाव की वजह से हो सकता है क्योंकि डेटा संग्रह का तरीका बदला है। या यह संकेत हो सकता है कि ग्रामीण मांग ध्वस्त हो गई है। ऐसे में दरों में कटौती की  संभावना नहीं है।' 
 
ऐक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि दरों में कटौती के बजाय रिजर्व बैंक नकदी डालकर संभवत: पहले नियत आय पत्रों पर दरें कम करना चाहेगा। भट्टाचार्य ने कहा कि दरों में कटौती करने के पहले केंद्रीय बैंक अप्रैल तक नकदी डालने के पररिणाम का इंतजार कर सकता है। कोटक महिंद्रा बैैंक में मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा कि वृद्धि दरअसल घटी है। ऐसे में नीतिगत रुख थोड़ा सुस्त हो सकता है और इसमेंं बदलाव के बजाय निकट भविष्य में दरों में कटौती के संकेत दिए जा सकते हैं। लेकिन फरवरी में दरों में कटौती की संभावना कम है।
 
भारद्वाज ने कहा, 'दरों में कटौती निश्चित रूप से होनी है, लेकिन इसका वक्त बताना कठिन है।' उन्होंने केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के चालू वित्त वर्ष के 7.2 प्रतिशत के वृद्धि अनुमान और रिजर्व बैंक के 7.4 प्रतिशत वृद्धि के अनुमान का उल्लेख किया। उन्होंंने कहा, 'रिजर्व बैंक को यह संज्ञान में लेना चाहिए कि वृद्धि सुस्त हो रही है और उसके अनुमान बदल रहे हैं। नीतिगत फेरबदल मामूली हो सकती है, लेकिन ठीक इसी समय तेल की कीमतें बढ़ रही हैं इसे देखते हुए रिजर्व बैंक को महंगाई पर नजर रखनी है। ऐसे में उसे सभी विकल्पों पर सावधानी से विचार करना होगा।' 
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