बिजनेस स्टैंडर्ड - 2018 की सुस्ती के बाद, धातु क्षेत्र में सुधार के आसार नहीं
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2018 की सुस्ती के बाद, धातु क्षेत्र में सुधार के आसार नहीं

उज्ज्वल जौहरी /  January 20, 2019

कई धातु एवं खनन शेयरों ने वर्ष 2018 में अपने बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट दर्ज की और इनका प्रतिनिधि सूचकांक बीएसई मेटल अपने पिछले स्तरों से लगभग 20 प्रतिशत तक नीचे आ गया। वैश्विक व्यापार अनिश्चितता, सेक्टर में उतार-चढ़ाव और बेस मेटल कीमतों में गिरावट से धारणा प्रभावित हुई। इसलिए खासकर ऊर्जा क्षेत्र में कच्चे माल की कीमतों में वृद्घि हुई। चीन से कमजोर मांग की आशंका से अक्टूबर-दिसंबर तिमाही (तीसरी तिमाही) में कीमतों में कमी को बढ़ावा मिला। इसका कई कंपनियों के मुनाफे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कीमतें गिरने से आय वृद्घि की रफ्तार कमजोर होने से यह आश्चर्यजनक नहीं है कि हिंडाल्को, वेदांत, टाटा स्टील, जिंदल स्टील ऐंड पावर (जेएसपीएल) में 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। सिर्फ जेएसडब्ल्यू स्टील का शेयर ही इस गिरावट से अलग बने रहने में कामयाब रहा और उसने बढ़त के साथ वर्ष की समाप्ति की।

 
विश्लेषकों का मानना है कि दबाव चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में भी बना रहेगा। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज का कहना है कि घरेलू इस्पात उत्पाद कीमतों में 2018-19 की तीसरी तिमाही में गिरावट का रुझान देखा गया। चौथी तिमाही में हालात और बदतर हो जाएंगे।  इस्पात कंपनियों के लिए एकमात्र राहत मजबूत घरेलू मांग वृद्घि से मिली। पिछले साल अक्टूबर और नवंबर में घरेलू मांग 10 प्रतिशत की दर से बढ़ी। बिक्री भी वित्त वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही में तिमाही आधार पर 5 प्रतिशत और सालाना आधार पर 4 प्रतिशत तक बढ़ी।
 
विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि इस्पात निर्यात काफी हद तक प्रभावित हुआ है और अक्टूबर तथा नवंबर में यह सालाना आधार पर घटकर आधा रह गया। इसी तरह, जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी कंपनियों द्वारा पूर्व में निर्यात से हासिल किया गया मुनाफा वित्त वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही में नहीं देखा जा सकता है।  कोटक सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने अनुमान जताया है कि इस्पात कीमतों में नरमी और कच्चे माल की लागत बढऩे की वजह से तिमाही आधार पर इस्पात कंपनियों के लिए परिचालन लाभ 11-28 प्रतिशत घटेगा। टाटा स्टील की आय भी यूरोप में कम बिक्री की वजह से प्रभावित होगी। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी के संयंत्र बंद रहने और परिचालन संबंधी समस्याओं की वजह से यूरोप में बिक्री में कमी आई है।
 
बेस मेटल कंपनियों के लिए, मुख्य चिंता एल्युमीनियम कीमतों को लेकर बनी हुई है जिनके बढऩे से हिंडाल्को और वेदांत पर दबाव पड़ सकता है, हालांकि इन दोनों कंपनियों को बिक्री बढऩे से लाभ होगा। लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर प्रति टन एल्युमीनियम कीमत अक्टूबर के शुरू में 2,250 डॉलर के आसपास थी। लेकिन अब यह गिरकर 1800 डॉलर पर रह गई है। दिसंबर तिमाही में हिंडाल्को पर सीमित प्रभाव बना रह सकता है। यह एक समेकित कंपनी है। वेदांत को भी बढ़ती जस्ता बिक्री से फायदा होने का अनुमान है। हालांकि कमजोर मूल्य निर्धारण परिदृश्य को देखते हुए अल्पावधि के लिए चिंता बरकरार है। 
 
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि एल्युमीनियम कंपनियों के लिए मार्जिन उस स्तर पर पहुंच गया है जो पिछले एक दशक में दर्ज नहीं किया गया। विश्लेषकों को वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही में हालात और बदतर होने की आशंका है। विश्लेषकों का कहना है कि जहां वेदांत एल्युमीनियम व्यवसाय में भरपाई के स्तर के नजदीक (एबिटा तिमाही और सालाना आधार पर 80-90 प्रतिशत घटा है) पहुंच गई है, लेकिन मौजूदा एलएमई कीमतों से वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही में एल्युमीनियम मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। जहां हिंडाल्को की शेयर कीमत पिछले एक साल में लगभग 22 प्रतिशत तक गिरी है, वहीं वेदांत के शेयर में 41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
 
कुल मिलाकर, कीमतों में गिरावट, मांग से जुड़ी चिंताओं और व्यापार संबंधित विवादों आदि की वजह से अल्पावधि में धातु कंपनियों का परिदृश्य सतर्क बने रहने की आशंका है।  वृहद परिदृश्य से जुड़ी अनिश्चितताओं को देखते हुए विश्लेषक कम पूंजी और परिचालन लागत वाली सक्षम कंपनियों को पसंद कर रहे हैं।  हिंडाल्को और जेएसडब्ल्यू स्टील मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के पसंदीदा शेयर हैं जबकि एडलवाइस रिसर्च के लिए टाटा स्टील और हिंडाल्को पसंदीदा बने हुए हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज भी हिंडाल्को को पसंद कर रही है और वह वेदांत तथा नालको के परिदृश्य को लेकर भी सकारात्मक है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज जेएसपीएल को भी पसंद कर रही है जिसे विद्युत क्षेत्र में क्षमता विस्तार और सुधार का लाभ मिलेगा। 
Keyword: BSE, metal, JSPL,,
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