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पीएसयू पर लगाएं दांव, पर सतर्कता जरूरी

राम प्रसाद साहू /  January 20, 2019

बीएसई पीएसयू सूचकांक ने 2018 में प्रमुख सूचकांकों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया और इसमें निफ्टी तथा सेंसेक्स में आई 3 और 6 फीसदी की तेजी की तुलना में 21 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दरअसल, पिछले 10 वर्षों में यह सूचकांक प्रमुख सूचकांकों को सिर्फ तीन बार मात देने में कामयाब रहा। पिछली बार इस सेक्टर ने वर्ष 2016 में प्रमुख सूचकांकों को पीछे छोड़ा था और इसे तेल पीएसयू, खास बैंकों और विद्युत क्षेत्र की कंपनियों से मदद मिली। तब से इस सेक्टर में टहराव बना हुआ है और यह समान स्तरों पर उपलब्ध है। पीएसयू सूचकांक में कमजोरी की वजह सरकारी नीतियों में अस्थिरता रही है। जहां इनमें से कई व्यवसायों में अच्छी संभावनाएं हैं, वहीं अनिश्चित सरकारी नीतियों से निवेशक धारणा प्रभावित हुई है।

 
सीएलएसए के विश्लेषकों ने बढ़ते राजकोषीय घाटे जैसे कई कारणों को रेटिंग में कमी के लिए जिम्मेदार माना है। एक बड़ा बदलाव तेल विपणन कंपनियां हैं जिन्हें सब्सिडी बोझ साझा करने को कहा गया। यही वजह है कि संस्थागत निवेशक सामान्य तौर पर इन शेयरों से दूर रहे हैं। एक घरेलू फंड प्रबंधक का कहना है, 'दीर्घावधि संस्थागत कंपनियों को लेकर आशंका बनी हुई है क्योंकि वे अक्सर बड़ा हिस्सा खरीदती हैं। जब सरकार नीति को लेकर अनिश्चित रवैया अपनाती है और शेयर में भारी गिरावट आती है तो ये संस्थागत निवेशक समस्या में फंस जाते हैं क्योंकि वे रातोंरात अपनी पोजीशन से बाहर नहीं निकल सकते। वे ऐसी स्थिति से परहेज करना पसंद करेंगे।'
 
हालांकि इससे निवेशकों के लिए अवसर खुलते हैं क्योंकि पूरे पीएसयू में कीमतें काफी नीचे आई हैं और मूल्यांकन वर्ष के निचले स्तर पर है। रेनेसा इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक पंकज मुरारका का मानना है कि पीएसयू शेयरों में अच्छी  वैल्यू है। सीएलएसए के विश्लेषकों का मानना है कि भारत ऐसा एकमात्र उभरता बाजार है जो अपने ऐतिहासिक औसत से ऊपर कारोबार कर रहा है, लेकिन  उसके सरकार के स्वामित्व वाले उद्यम 8.8 गुना के पीई अनुपात पर सर्वाधिक निचले स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।
 
निवेशकों द्वारा पीएसयू को पसंद करन की अन्य वजह यह है कि इनमें प्रतिफल आकर्षक है। ऐक्सिस कैपिटल के विश्लेषकों का मानना है कि सरकार द्वारा नकदी संपन्न पीएसयू को अधिक लाभांश की दिशा में बढ़ावा देने या आरक्षित नकदी के इस्तेमाल की मदद से शेयर पुनर्खरीद को प्रोत्साहित करने की मजबूत संभावना है जिससे कि बजट घाटे को पूरा करने में मदद मिले।एनएचपीसी, ऑयल इङ्क्षडया, बीएचईएल, नालको, कोचीन शिपयार्ड और ओएनजीसी  पुनर्खरीद की घोषणा पहले ही कर चुकी हैं जबकि कोल इंडिया और राइट्स ने अंतरिम लाभांश की घोषणा की है।
 
कोल इंडिया और एनएमडीसी के मामले में वित्त वर्ष 2018 में लाभांश 4-8 प्रतिशत रहा। जहां ब्रोकरेज तेल पीएसयू पर कम मूल्यांकन की वजह से उत्साहित हैं, वहीं ओएनजीसी को वित्त वर्ष 2020 के आय अनुमान के चार गुना के मूल्यांकन को देखते हुए पसंदीदा दांव माना जा रहा है। मजबूत लाभांश प्रतिफल, वित्त वर्ष 2020 के आय अनुमान का 9 गुना आकर्षक मूल्यांकन और सुधरते परिदृश्य/मुनाफा वृद्घि कोल इंडिया और एनटीपीसी के लिए सकारात्मक हैं। वित्तीय मोर्चे पर, फंसे कर्ज और परिसंपत्ति गुणवत्ता में अब धीरे धीरे सुधार आ रहा है। पूंजी निवेश, अनुकूल बॉन्ड बाजार हालात और ऋण वृद्घि की उम्मीद सरकारी बैंकों के लिए शुभ संकेत हैं। ब्रोकरों का मानना है कि एसबीआई जैसे बड़े पीएसबी वृद्घि के अवसरों को हासिल करने की दिशा में अच्छी स्थिति में हैं और वे उस कमजोर चक्र से दूर बने हुए हैं जो पिछले तीन वर्षों से बैंकों को प्रभावित कर रहा है।
 
हालांकि विश्लेषकों का सुझाव है कि निवेशकों को पीएसयू क्षेत्र में उन पिटे हुए शेयरों पर ध्यान देना चाहिए जिनका उनके संबद्घ क्षेत्र में दबदबा रहा हो, आय वृद्घि मजबूत हो और प्रतिफल अनुपात अच्छा हो। विश्लेषक सतर्कता बरतने और चयन पर जोर देने की सलाह दे रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इन शेयरों में गिरावट आने का जोखिम हमेशा से रहा है। मुरारका का कहना है कि पिछले दशक का रिकॉर्ड भी ज्यादा अच्छा नहीं है और निवेशकों को सतर्कता बरतनी चाहिए। 
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