बिजनेस स्टैंडर्ड - नकदी में होना है भुगतान तो इन बातों का रखें पूरा ध्यान
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नकदी में होना है भुगतान तो इन बातों का रखें पूरा ध्यान

तिनेश भसीन /  January 20, 2019

हाल में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अपनी वेबसाइट पर चेतावनी जारी की थी, जिसमें लोगों को एक निश्चित सीमा से अधिक नकदी नहीं लेने की हिदायत दी थी। मौजूदा सरकार काले धन पर लगाम कसने और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए नकद लेनदेन की सीमा समय-समय पर कम करती रही है। मगर जानकारी के अभाव में अब भी कई लोग नकद में ही लेनदेन कर रहे हैं।  दीपक साहनी भी कुछ ऐसा ही करने वाले थे। साहनी जब अपनी जमीन बेचने जा रहे थे तो उसकी कीमत 22 लाख रुपये लगाई गई। लेकिन जो खरीदने आया था, उसने पेशगी के तौर पर 6 लाख रुपये नकद देने की बात कही। साहनी इसके लिए मान भी गए, लेकिन उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी सीए ने उन्हें रोक दिया।  उसने बताया कि आयकर कानून के तहत नकद लेनदेन की जो अधिकतम सीमा तय की गई है, 6 लाख रुपये उस सीमा से अधिक हैं। सीए ने साहनी से कहा कि उन्हें पूरी रकम बैंक के जरिये ही लेनी चाहिए।

 
पूरी पाबंदी
 
नकद में 2 लाख रुपये से अधिक रकम के लेनदेन पर पूर्ण पाबंदी है। कोई व्यक्ति अपने निकट संबंधियों जैसे माता-पिता या जीवनसाथी से भी एक दिन में 2 लाख रुपये से अधिक नकदी नहीं ले सकता। दैनिक सीमा के अलावा कोई भी व्यक्ति एक ही लेनदेन में निर्धारित सीमा से अधिक नकदी न तो किसी को दे सकता है और न ही उससे ले सकता है। मिसाल के तौर पर कोई व्यक्ति अगर 3 लाख रुपये की घड़ी खरीद रहा है तो उसे बैंक के जरिये ही भुगतान करना पड़ेगा। अगर वह 3 लाख रुपये टुकड़ों में 2-3 दिन के भीतर देना चाहता है तो उसकी साफ मनाही होगी।  हां, अगर परिवार में विवाह है और अलग-अलग दुकानों से जेवरात खरीदे जा रहे हैं तो इस सीमा में ढील दी जा सकती है। अगर हरेक दुकानदार में 2 लाख रुपये से कम के जेवर खरीदे गए हैं तो उनका भुगतान नकद में किया जा सकता है। अगर भुगतान लेने वाला यानी दुकानदार इस सीमा का उल्लंघन करता है तो आय कर अधिकारी लेनदेन की रकम के बराबर जुर्माना ठोक देगा।
 
ऋण एवं भुगतान
 
आयकर नियमों में कहा गया है कि कर्ज के मामले में 20,000 रुपये तक का नकद लेनदेन किया जा सकता है। यह पाबंदी कर्ज लेने पर भी लगाई गई है और देने पर भी। मान लीजिए कि किसी व्यक्ति को अपने दोस्त से तुरंत उधार लेना पड़ जाता है तो वह 20,000 रुपये से अधिक की नकदी उधार नहीं ले सकता। उधार बैंकों के जरिये ही देना पड़ेगा। कर्ज वापस करने के मामले में भी यही नियम लागू होते हैं। कर्ज लेने वाला 20,000 रुपये से अधिक की उधारी को नकदी में वापस नहीं कर सकता।
 
जायदाद के सौदे
 
अचल संपत्ति के मामले में कर कानूनों के तहत 20,000 रुपये से अधिक नकद लेनदेन की अनुमति नहीं है। अगर उसके लिए पेशगी ली जा रही है तो भी नकदी वाली पाबंदी बरकरार रहेगी। दूसरे प्रकार के लेनदेन के लिए नकदी सीमा 2 लाख रुपये है, लेकिन अचल संपत्ति के मामले में सीमा काफी कम है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि जायदाद काले धन का सबसे बड़ा स्रोत है और इस पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने नकद लेनदेन की सीमा कम रखी है।
 
कारोबारी व्यय
 
कारोबार पर होने वाले व्यय के लिए प्रत्येक दिन और प्रत्येक लेन-देन के लिए 10,000 रुपये की नकद सीमा रखी गई है। अगर कोई कारोबारी निर्धारित सीमा से अधिक रकम नकद देता है तो वह आयकर रिटर्न दाखिल करते समय इसे व्यय के रूप में दिखा कर करों में छूट का दावा नहीं कर सकता है। क्लियरटैक्स डॉट कॉम में चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रीति खुराना कहती हैं, 'नकद में व्यय दिखाकर कई कारोबार मालिक कर छूट का दावा कर रहे थे। सरकार इस पर पाबंदी लगाना चाहती थी, इसलिए नकदी सीमा कम कर दी।'  हालांकि इस कानून से जुड़े कुछ अपवाद भी हैं। अगर भुगतान ले रहे व्यक्ति के पास बैंक खाता नहीं है तो यह नियम लागू नहीं होता है। मगर उस सूरत में कारोबार करने वाले व्यक्ति को साबित करना होगा कि भुगतान लेने वाले का किसी बैंक में खाता नहीं है। 
 
टैक्समैन डॉट कॉम में चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन वाधवा बताते हैं, 'हाल में ही आईटी ट्रिब्यूनल में एक मामला आया था, जिसमें ठेकेदार ने निर्धारित समय में भुगतान के लिए नकदी का सहारा लिया था। चेक के जरिये निर्धारित समय में उसके  लिए भुगतान करना मुमकिन नहीं था। ट्रिब्यूनल ने ठेकेदार को कर छूट का लाभ लेने की अनुमति दे दी।' इसी तरह अगर कोई कारोबार करने वाला व्यक्ति संपत्ति खरीदते समय नकद में 10,000 रुपये से अधिक भुगतान करता है तो वह मूल्यह्रास का दावा नहीं कर सकता।
 
कर बचत योजनाएं
 
अगर आपको आयकर में बचत का फायदा लेना है तो स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम भूलकर भी नकद न भरें। आयकर अधिनियम के मुताबिक अगर बीमा का प्रीमियम नकद में चुकाया जाता है तो धारा 80 डी के तहत कर छूट का लाभ नहीं मिल सकता। इसलिए प्रीमियम बैंक के जरिये ही किया जाना चाहिए।
 
पाने वाले की जिम्मेदारी
 
ज्यादातर मामलों में भुगतान पाने वाले की ही जिम्मेदारी होती है कि वह नकद में भुगतान नहीं ले। अगर नकदी के मामले में किसी तरह का जुर्माना लगता है तो उसे भरने की जिम्मेदारी नकद पाने वाले व्यक्ति की ही होगी। कर विशेषज्ञों का कहना है कि नकद रकम नहीं लेने की जिम्मेदारी प्राप्तकर्ता की है क्योंकि नकद में भुगतान करने वाला व्यक्ति ऐसे किसी लेनदेन की बात स्वीकार करने से मुकर सकता है।  यही वजह थी कि साहनी को उनके सीए ने नकदी लेने से रोक दिया। इस पर उन्होंने पूछा कि नकदी लेकर बैंक में जमा कर दी जाए तब तो कोई उल्लंघन नहीं होगा। इस बारे में अरविंद राव ऐंड एसोसिएट्स के संस्थापक अरविंद राव का कहना है, 'इससे नियमों का उल्लंघन होगा। निर्धारित सीमा से अधिक नकदी लेने पर नियमों का उल्लंघन हो जाता है। बाद में बैंक में जमा करने पर भी बात नहीं बनती।' 
 
जिन मामलों में कर अधिकारी यह साबित कर देते हैं कि अमुक व्यक्ति ने नकद में भुगतान किया है, उनमें भुगतानकर्ता को कर नोटिस भी भेजा जा सकता है। ज्यादातर जायदाद सौदों में खरीदार और बिकवाल समझौते में भुगतान की गई राशि को बतौर पेशगी दिखाया जाता है। ऐसे मामलों में आयकर विभाग खरीदार को नोटिस भेजकर नकदी का स्रोत बताने के लिए कह सकता है। वाधवा कहते हैं, 'नकदी का स्रोत नहीं बताया गया तो कर अधिकारी उस व्यक्ति के खिलाफ जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।'
Keyword: income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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