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आपका बीमा दावा क्यों हो जाता है खारिज?

संजय कुमार सिंह /  January 20, 2019

अगर आपने स्वास्थ्य या वाहन बीमा खरीदा है तो आपको क्रमश: थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर्स (टीपीए) और सर्वेयर जैसे बिचौलियों से जूझना पड़ा होगा। बीमाकर्ताओं की कार्यकारी परिषद (ईसीओआई) ने हाल में प्रकाशित अपनी सालाना रिपोर्ट में इन बिचौलियों के बारे में कुछ अहम बातें कही हैं। रिपोर्ट में टीपीए के लिए कहा गया है कि दावों के निपटान में उनके फैसले अंतिम नहीं होने चाहिए और न्यायोचित फैसले पर पहुंचने के लिए मामले की समीक्षा बीमा कंपनी द्वारा की जानी चाहिए। सर्वेयरों के लिए रिपोर्ट में कहा गया है कि वाहन दावों में नुकसान का सर्वेयरों का आकलन वाहन की मरम्मत के लिए जरूरी खर्च से मेल नहीं खाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टीपीए और सर्वेयर ग्राहकों की मुसीबतें और बढ़ा देते हैं। 

 
टीपीए की सिफारिश, बीमा कंपनी का फैसला 
 
टीपीए वह संस्थान है, जो आपके दावे पर काम करता है। वह ऐसा बीमा कंपनी के दावे निपटाने के दिशानिर्देशों के आधार पर करता है और बीमा कंपनी को सिफारिश करता है। पैरामाउंट हेल्थ सर्विसेज ऐंड इंश्योरेंस टीपीए के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक नारायण शाह ने कहा, 'बीमा करार बीमा कंपनी और ग्राहक के बीच होता है, इसलिए दावे को स्वीकार करने या खारिज करने का अंतिम फैसला बीमा कंपनी लेती है।' हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में बीमा कंपनियां टीपीए के सुझाव को ही मानती हैं। जेएलटी इंडिपेंडेंट इंश्योरेंस ब्रोकर्स के उप मुख्य कार्याधिकारी अरविंद लड्ढा ने कहा, 'आम तौर पर बीमा कंपनियां केवल उन्हीं मामलों की समीक्षा करती हैं, जिनमें बीमित व्यक्ति टीपीए के फैसले से सहमत नहीं होते हैं।'ईसीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ बीमा कंपनियां तो अपने ग्राहकों को दावा खारिज होने का पत्र तक नहीं भेजती हैं। पॉलिसीधारक को केवल टीपीए से पत्र मिलता है। शाह ने कहा, 'अगर कोई टीपीए दावा करने वाले व्यक्ति को यह सूचना भेजता है कि उसका दावा खारिज हो गया है तो यह कानून के हिसाब से ठीक नहीं है क्योंकि करार बीमा कंपनी और ग्राहक के बीच होता है।'
 
शारीरिक समस्याएं, जो नहीं शामिल 
 
टीपीए के मुताबिक दावे इसलिए खारिज हो जाते हैं क्योंकि वे बीमा कंपनी की तरफ से ग्राहक को मुहैया कराए गए दावा निपटान दिशानिर्देशों के दायरे में नहीं आते हैं। उदाहरण के लिए हर्निया और मोतियाबिंद जैसी स्वास्थ्य समस्याएं पॉलिसी के पहले और दूसरे वर्ष में शामिल नहीं होती हैं क्योंकि इनके तत्काल इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है। अगर कोई व्यक्ति इस अवधि के दौरान ऑपरेशन करा लेता है और फिर दावा करता है तो उसे भुगतान नहीं किया जाएगा। इसी तरह ज्यादातर पॉलिसी में शुरुआती 2-4 वर्षों के दौरान पहले से मौजूद बीमारियां शामिल नहीं होती हैं। दावे खारिज होने का एक अन्य कारण उचित दस्तावेज मुहैया नहीं कराना है। उदाहरण के लिए माना कि किसी ग्राहक ने रसीद जमा करा दी, लेकिन उसने एमआरआई रिपोर्ट नहीं भेजी। लड्ढा ने कहा, 'अगर टीपीए को यह लगता है कि दावे के निपटान के लिए एमआरआई रिपोर्ट जरूरी है तो दावे को रद्द किया जा सकता है।'
 
अपनी पॉलिसी के बारे में ठीक से जानें
 
ग्राहक अपने स्तर पर कुछ ऐसे कदम उठा सकते हैं, जिनसे उनके दावे के खारिज होने के आसार कम हो जाएंगे। शाह के मुताबिक उन्हें यह ठीक से पता होना चाहिए कि उनकी पॉलिसी में क्या शामिल है और क्या नहीं। उदाहरण के लिए ग्राहक यह शिकायत करते हैं कि उनके बिल का पूरा भुगतान नहीं किया गया। लेकिन अमूमन उन्हें इस बारे में पता नहीं होता है कि उनकी पॉलिसी में कमरे के किराये, इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) आदि की अधिकतम  सीमाएं हैं। उन्हें इस सीमा से अधिक आने वाली लागत का भुगतान अपनी जेब से करना होगा। दूसरा बीमित व्यक्ति को दावा करते समय दस्तावेज मुहैया कराने में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। 
 
ऐड-ऑन के जरिये बढ़ाएं अपना कवर 
 
सर्वेयर वे लोग होते हैं, जो आपके वाहन का निरीक्षण करते हैं, नुकसान का आकलन करते हैं और बीमा कंपनी को अनुमानित खर्च का आंकड़ा देते हैं। वाहन बीमा ग्राहक का दावा कई वजहों से खारिज होने या आंशिक भुगतान मिलने के आसार होते हैं। भारती ऐक्सा जनरल इंश्योरेंस के उपाध्यक्ष और प्रमुख (दावे) राहुल शर्मा ने कहा, 'ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि नुकसान उस वजह से हुआ, जिसके लिए बीमित व्यक्ति के पास कवर नहीं था। ग्राहक द्वारा उपलब्ध बहुत से ऐड-ऑन के जरिये अधिकतम कवर नहीं लेने के आसार होते हैं।' ऐसा तब भी हो सकता है, जब अंडरराइटिंग के समय आवश्यक ब्योरों का खुलासा न किया जाए या दावे के समय तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक कम आकलन का जोखिम कैशलेस दावों में कम और रीइंबर्समेंट दावों में अधिक होता है। पॉलिसीएक्स डॉट कॉम के मुख्य कार्याधिकारी नवल गोयल ने कहा, 'आम तौर पर कैशलेस दावे में कम आकलन कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि आप अपना वाहन उस गैराज में भेजते हैं, जिसका पहले से ही बीमा कंपनी के साथ करार है। ग्राहकों के सामने यह समस्या रीइंबर्समेंट मामलों में ज्यादा आने के आसार होते हैं।' गोयल के मुताबिक गलती दोनों पक्षों की होती है। कुछ ग्राहक बहुत अधिक दावा करते हैं। कई बार सर्वेयर लागत को कम करने की कोशिश करते हैं। गोयल ने कहा, 'बीमा कंपनी की लागत घटाने के लिए सर्वेयर का दावे की राशि को कम करने की कोशिश करना आम है।' वह कहते हैं कि कई बार सर्वेयर ग्राहक से रिश्वत भी लेने की कोशिश करते हैं। 
 
कैशलेस का विकल्प चुनें 
 
पॉलिसी खरीदते समय आपको पता होना चाहिए कि आपकी जरूरतें क्या हैं और इसी के मुताबिक उपयुक्त ऐड-ऑन कवर खरीदें। अगर कोई दावा करने की जरूरत पड़ती है तो बिना किसी देरी के क्लेम फॉर्म में अपने नुकसान का सही ब्योरा मुहैया कराएं। शर्मा ने कहा, 'ऐसे समय पर किसी अनधिकृत सलाहकार या बिचौलिये की बातों में न आएं, जो आपको अपना गलत दावे या इसे बढ़ाने के लिए उकसाने की कोशिश कर सकते हैं।' ग्राहकों को कैशलेस गैराज इस्तेमाल करने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। अगर रीइंबर्समेंट दावे में सर्वेयर कहता है कि लागत आपके अनुमान से कम है तो उसे यह लिखित में देने को कहें। गोयल ने कहा, 'अगर आपके दावे की राशि सही है तो इससे आपको लोकपाल के सामने अपने पक्ष सही साबित करने में मदद मिलेगी।' इसके बजाय सर्वेयर से एक ऐसा गैराज बताने को कहें, जहां मरम्मत का काम कम लागत पर हो सकता है। अगर मसले का समाधान नहीं होता है तो बीमा कंपनी को दूसरा सर्वेयर भेजने को कहें। इस सब उपायों और सतर्कताओं के बावजूद अगर आपको लगता है कि टीपीए और सर्वेयर ने आपके साथ पक्षपात किया है तो बीमा कंपनी के शिकायत प्रकोष्ठ में शिकायत करें। आप अपनी शिकायत लोकपाल कार्यालय और उपभोक्ता अदालत जैसे मंचों पर भी लेकर जा सकते हैं। 
 
बीमा कंपनी नहीं दे राहत तो लोकपाल से करें संपर्क 
 
आपके शहर के लोकपाल कार्यालय का पता आपके पॉलिसी दस्तावेज में उपलब्ध है। यह ईसीओआई की वेबसाइट (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट ईसीओआई डॉट सीओ डॉट इन) पर भी  है। लोकपाल सभी बीमा ग्राहकों के लिए बिना किसी लागत का मंच है। यहां कोई फीस नहीं लगती है और न ही आपको किसी वकील की जरूरत होगी। दोनों पक्षों से दस्तावेज प्राप्त करने के बाद लोकपाल दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाता है और फिर फैसला करता है। लोकपाल खारिज दावे को वापस दिला सकता है। लेकिन यह उपभोक्ता अदालत की तरह बीमा कंपनी पर जुर्माना नहीं लगा सकता।
Keyword: insurance, travel, tourism, health,,
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