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कमजोर मांग से ट्रक भाड़े में गिरावट

शैली सेठ मोहिले / मुंबई January 17, 2019

हाल में डीजल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद ट्रांसपोर्टर इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाल पाए। इसके अलावा कारखानों से होने वाली माल ढुलाई में गिरावट और ट्रकों की अधिक आपूर्ति के कारण प्रमुख मार्गों पर ट्रक भाड़े में 1.5 से 2 प्रतिशत तक की कमी आई है। इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) के वरिष्ठ फेलो एसपी सिंह के अनुसार नवंबर, दिसंबर और जनवरी के 15 दिनों में संयुक्त रूप से भाड़े में 25 से 30 फीसदी तक की गिरावट आई है। सिंह को लगता है कि चालू तिमाही के दौरान कारोबार नकारात्मक रहेगा और यह रुख सितंबर 2019 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि ट्रक भाड़े में आई गिरावट नवंबर-दिसंबर 2018 के दौरान डीजल के दामों की गई कटौती से 10-12 प्रतिशत (प्रत्येक महीने में 5-6 प्रतिशत) ज्यादा हो गई है जिससे गाडिय़ों के इस्तेमाल में काफी कमी आई है।
 
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के अनुसार एक साल पहले की इसी अवधि के मुकाबले मझोले और भारी वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 21 प्रतिशत घटकर 31,299 इकाई रह गई। सिंह ने कहा कि सितंबर तक इस रुख में परिवर्तन होता नहीं दिखता। हर हफ्ते हालात बिगड़ रहे हैं। लोग अपना खर्चा निकालने में भी असमर्थ हैं।  अन्य लोग भी इस बात से सहमत हैं। 300 ट्रकों का बेड़ा रखने वाले कारवां रोडवेज के निदेशक संजीव गुप्ता ने कहा कि छह महीने पहले तक हमारे ट्रकों को वापसी में माल लदाई के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता था लेकिन अब हालात बदल गए हैं। उनके ट्रकों द्वारा किया जाने वाला औसत कारोबार 15 फीसदी कम हो गया है। इससे उनका सारा मुनाफा खत्म हो गया है।
 
कारखानों के उत्पादन में कमी के अलावा गुप्ता एक्सेल भार संबंधी नियमों में परिवर्तन की वजह से माल ढुलाई की पेशकश में कमी को भी जिम्मेदार ठहराते हैं। 16 जुलाई को सरकार ने ट्रकों समेत अन्य भारी वाहनों की आधिकारिक अधिकतम भार वहन क्षमता में 20-25 प्रतिशत तक का इजाफा किया था। गुप्ता ने कहा कि इससे इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों की संख्या में इसी अनुपात में कमी आई है। इस परिवर्तन ने बाजार में एक अलग क्षमता निर्मित कर दी है। इस अतिरिक्ता क्षमता को खपाने में कम से कम एक साल लगेगा। लेकिन ट्रक विनिर्माताओं का रुख सकारात्मक है। वोल्वो आयशर कमर्शियल व्हीकल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनोद अग्रवाल ने कहा, 'हमें अब भी उम्मीद है कि यह तिमाही अच्छी रहेगी। हालांकि पिछले साल की मार्च तिमाही जितनी मजबूत नहीं होगी।' उन्होंने कहा कि कंपनी अपनी विस्तार योजनाओं के साथ आगे बढ़ेगी।
 
खास तौर पर पूंजीगत और उपभोक्ता वस्तुओं के विनिर्माण उत्पादन में गिरावट ने नवंबर में औद्योगिक वृद्धि को 17 महीने के निचले स्तर 0.5 प्रतिशत पर ला दिया। इससे ठीक एक महीने पहले अक्टूबर में वृद्धि दर 11 महीने के उच्च स्तर 8.4 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। अर्थशास्त्रियों ने त्योहारी सीजन के बाद की सुस्त गतिविधियों और हाई बेस प्रभाव को इसका जिम्मेदार माना है। नवंबर 2017 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 8.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। क्रिसिल की निदेशक हेतल गांधी ट्रकों की बिक्री की सुस्त रफ्तार का जिम्मेदार विभिन्न कारणों को ठहराते है। उन्होंने कहा कि किसी मझोले वाणिज्यिक वाहन (9 टन भार वहन क्षमता वाले ट्रक) का संचालन करने वाले ट्रांसपोर्टर के लिए परिचालन लागत में डीजल का हिस्सा 50-55 प्रतिशत रहता है। सितंबर-दिसंबर 2018 के बीच डीजल की कीमतों में 12 प्रतिशत की गिरावट आई है। माल भाड़े की दरों में 6.5 प्रतिशत की गिरावट हो जानी चाहिए थी लेकिन यह 80 से 100 आधार अंक अधिक रही हैं। इसकी वजह है एक्सेल संबंधी नियम जिनके तहत कोई ट्रक ज्यादा भार वहन कर सकता है। नतीजतन संचालकों का क्षमता उपयोग कम हो गया है।
Keyword: truck, fare hike, crop,,
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