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'ट्रंक रोड' ने बदली थी सड़कों की सूरत

विवेक देवरॉय /  January 16, 2019

ट्रंक रोड क्या है और जीटी रोड एवं बीटी रोड के ट्रंक रोड होने के बारे में फैसला किसने किया? ट्रंक रोड की अवधारणा की पड़ताल कर रहे हैं विवेक देवरॉय

 
ग्रांड ट्रंक रोड महज ट्रंक रोड (राजमार्ग) नहीं है। प्रतिष्ठित संस्था भारतीय सांख्यिकीय संस्थान (आईएसआई) से परिचित शख्स बैरकपुर ट्रंक रोड (बीटी रोड) को भी जरूर जानता होगा। पश्चिम बंगाल के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों को तो बीटी रोड के बारे में आईएसआई से इतर भी पता होगा। बीटी रोड बैरकपुर को श्यामबाजार से जोड़ती है। जूट मिलों, झुग्गी बस्तियों और श्रमिक आंदोलनों पर लिखे समरेश बसु के लघु-उपन्यासों के जरिये बीटी रोड बांग्ला साहित्य में भी काफी मशहूर है। बीटी रोड को ज्यादातर पैदल चलने लायक सड़क के तौर पर ही जाना जाता रहा है। सड़कों के पदानुक्रम में यह सड़क उतनी अहम नहीं है कि उसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया जाए लेकिन यह राज्य राजमार्ग जरूर है। वैसे साफ-साफ कहें तो यह राज्य राजमार्ग का हिस्सा भर है। पश्चिम बंगाल का राज्य राजमार्ग 1 बनगांव से कुल्पी तक 151 किलोमीटर लंबा है और बीटी रोड इसी का बैरकपुर से कोलकाता तक का 18 किलोमीटर लंबा हिस्सा भर है। मुझे एक जगह यह जिक्र मिला कि बीटी रोड भारत में गिट्टी से बनी सबसे पुरानी सड़कों में से एक है। मुझे लगता है कि इस बारे में अधिक सजगता दिखानी चाहिए। बैरकुपर कैंट की स्थापना वर्ष 1765 में हुई थी। एक तरह से कोलकाता 1772 में ब्रिटिश इंडिया की राजधानी बन गया था। कोलकाता और बैरकपुर के बीच आवागमन बढऩे से एक अच्छी सड़क बनाना जरूरी हो गया था और 1775 में उसका निर्माण पूरा हो गया। हालांकि उस समय इसका निर्माण संभवत: गिट्टी से ही हुआ था और उसे डामर की सड़क में तब्दील करने का काम 19वीं सदी में ही हुआ होगा।
 
सवाल है कि 'ट्रंक रोड' क्या है और जीटी रोड और बीटी रोड के ट्रंक रोड होने के बारे में फैसला कौन करता है? बंगाल प्रेसिडेंसी प्रशासन की वर्ष 1860-61 की वार्षिक रिपोर्ट में सड़कों से संबंधित एक बयान और एक मानचित्र दिया हुआ है। इससे पता चलता है कि 'बंगाल में 11 इम्पीरियल ट्रंक रोड या तो मौजूद हैं या निर्माणाधीन हैं। इनकी कुल लंबाई 1,994 मील है।' इम्पीरियल ट्रंक रोड में शामिल सड़कें इस प्रकार थीं: ग्रांड ट्रंक रोड (कलकत्ता से कर्मनाशा नदी), मद्रास ट्रंक रोड (कलकत्ता से मद्रास फ्रंटियर के छतरपुर तक), दार्जिलिंग ट्रंक रोड (ईस्ट इंडियन रेलवे के पीरप्वाइंटी स्टेशन से दार्जिलिंग), बरहामपुर ट्रंक रोड (कलकत्ता से बरहामपुर), तिरहुत ट्रंक रोड (मुंगेर से बेलसरा), चटगांव ट्रंक रोड (दाउदकैंडी से चटगांव), असम ट्रंक रोड (राजमहल से डिब्रूगढ़), मुटला ट्रंक रोड (कलकत्ता से मुटला पोर्ट), डायमंड हार्बर रोड (कलकत्ता से डायमंड हार्बर), भागलपुर-सूरी रोड (अहमदपुर स्टेशन से भागलपुर) और नलहाटी रोड (नलहाटी रोड से जियागंज)। इनमें से सबसे बड़ी सड़क असम ट्रंक रोड थी और फिर ग्रांड ट्रक रोड और मद्रास ट्रंक रोड का नंबर आता था। इससे साफ है कि ट्रंक रोड महत्त्वपूर्ण सड़क हुआ करती थी। लेकिन इन सड़कों को किसने 'इम्पीरियल ट्रंक रोड' घोषित किया और इसके लिए कौन सा पैमाना आधार बनाया गया था? 
 
इस परिभाषा की तलाश के दौरान मैंने 1778 में प्रकाशित जेम्स रेनेल की किताब 'लेट मेजर ऑफ इंजीनियर्स ऐंड सर्वेयर जनरल टु द ऑनरेबल ईस्ट इंडिया कंपनी' पढ़ी। इस किताब में रेनेल ने बंगाल और बिहार में मौजूद तमाम सड़कों का विस्तृत ब्योरा दिया है। हालांकि इस किताब में न तो ट्रंक रोड को परिभाषित किया गया है और न ही उसमें बीटी रोड का जिक्र है। फिर मैंने जॉन सीली की 1825 में प्रकाशित किताब 'द रोड बुक ऑफ इंडिया' पढ़ी जो बंगाल, मद्रास और बॉम्बे प्रेसिडेंसी के यात्रा विवरण को प्रस्तुत करती है। इस किताब में मार्गों का अद्भुत विवरण दिया हुआ है। मसलन, बंगाल प्रेसिडेंसी के लिए पहला मार्ग कलकत्ता से सेंट पीटर्सबर्ग तक जाता था। यह मार्ग बैरकपुर से होकर गुजरता था। कलकत्ता से जाने वाले कई दूसरे मार्ग भी बैरकपुर से गुजरते थे।
 
कलकत्ता से बैरकपुर के बीच की दूरी 14 मील और 4 फर्लांग (200 मीटर) बताई गई है। मौजूदा बीटी रोड की तुलना में यह दूरी थोड़ी अधिक है। लेकिन यह कलकत्ता की परिभाषा या सड़क के लेआउट में हुए बदलाव पर भी निर्भर कर सकता है। बहरहाल 1825 तक बीटी रोड वजूद में थी लेकिन एक ट्रंक रोड की परिभाषा नहीं दिखती है। शायद ट्रंक रोड घोषित करने की कोई सटीक परिभाषा मौजूद ही नहीं थी। वर्ष 1936 में यूनाइटेड किंगडम ने ट्रंक रोड्स ऐक्ट पारित किया था। इस कानून में ऐसी सड़कों की सूची दी गई है जिन्हें ट्रंक रोड घोषित किया गया था। इसका मतलब है कि सड़कें इस सूची में शामिल होने की वजह से ट्रंक रोड बन गई थीं। हालांकि किसी पेड़ का मुख्य तना उसकी जड़ों से समरूपता रखता है लेकिन यह अभिव्यक्ति विशुद्ध रूप से ब्रिटिश है। यह शब्द पुराने उपनिवेशों में ब्रिटेन की पुरानी विरासत को दर्शाता है। ब्रिटेन में भी ट्रंक रोड शब्द का इस्तेमाल काफी हद तक परंपरा बन चुका है। वहां पर केंद्रीय सरकार या कार्यकारी एजेंसियों के नियंत्रण वाली किसी भी सड़क को अब ट्रंक रोड के तौर पर वर्गीकृत कर देते हैं। यह भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों को ट्रंक रोड घोषित करने जैसा ही है। हालांकि ऐसा होने पर बीटी रोड का ट्रंक रोड का दर्जा छिन जाएगा।
 
कभी-कभी हमें अहसास ही नहीं होता है कि दुनिया भर में हर जगह सड़कों की हालत कितनी सुधर गई है? जेन ऑस्टिन की मशहूर कृति 'सेंस ऐंड सेंसिबिलिटी' में मैरियन डैशवुड नाम का किरदार कहता है, 'अगर मैंने केवल मौसम और सड़कों की बात की होती और दस मिनट में केवल एक बार ही बोला होता तो इस कलंक से बचा जा सकता था।' मौसम की बात तो समझी जा सकती है लेकिन उसने सड़कों का जिक्र भला क्यों किया? इसकी वजह यह है कि जेन ऑस्टिन के समय सड़कों की हालत बहुत ही खराब थी और हर कोई उनके बारे में बातें करता था। इसी तरह 'प्राइड ऐंड प्रीज्यूडिस' में भी डार्सी और इलिजाबेथ के बीच ऐसा ही एक संवाद है। हंसफर्ड और मेरिटॉन के बीच की दूरी को लेकर यह वार्तालाप है। 'क्या तुम इसे कम दूरी कहते हो? यह दूरी करीब 50 मील है।' इस पर दूसरा किरदार कहता है, 'अच्छी सड़क से 50 मील जाना भला क्या दूर है? आधे दिन से थोड़ा ही अधिक वक्त लगेगा। मुझे तो यह दूरी कम ही लगती है।' 
 
ऑस्टिन की एक और कृति 'मैन्सफील्ड पार्क' में भी मिसेज नॉरिस कहती हैं, 'हमारे कोचवान को सॉथर्टन तक जाने वाली सड़कें अधिक पसंद नहीं हैं। वह हमेशा यह शिकायत करता है कि संकरे रास्तों के कारण उसके तांगे में खरोंच लग जाती है।' आखिर जेन ऑस्टिन की दुनिया ट्रंक रोड के पहले की थी।
 
(लेखक प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन हैं। लेख में उनके निजी विचार हैं)
Keyword: road, transport, NHAI, trunck road,,
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