बिजनेस स्टैंडर्ड - आठ महीने के निचले स्तर पर कपास
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आठ महीने के निचले स्तर पर कपास

सुशील मिश्र / मुंबई January 14, 2019

निर्यात मांग कमजोर होने की बढ़ती आशंका के चलते कपास की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। कपास के दाम गिरकर आठ महीने के निम्नतम स्तर पर पहुंच गए हैं। वैश्विक बाजार में दाम कम होने और निर्यात मांग कमजोर रहने के साथ पर्याप्त स्टॉक होने से कपास के भाव में अभी और गिरावट होने की आशंका जताई जा रही है।  कमजोर रुपये के बावजूद कपास का फायदा निर्यातकों को नहीं मिल रहा है। निर्यात मांग कमजोर होने के कारण घरेलू बाजार में कपास के दामों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। शंकर-6 कपास के दाम गिरकर 12,035 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। चालू महीने में कपास की कीमतों में 1.6 फीसदी की गिरावट हो चुकी है जबकि पिछले एक महीने में कपास के दाम 4.3 फीसदी लुढ़क चुके हैं। तीन महीने में 8 फीसदी और 6 महीने में कपास के भाव में 9.3 फीसदी गिरावट आई है। हालांकि सालाना आधार पर कीमतें 5.3 फीसदी अधिक हैं।  
 
कपास की कीमतों में गिरावट की प्रमुख वजह निर्यात मांग कमजोर होना माना जा रहा है। महीने की शुरुआत में भारतीय कपास संघ के अनुमान लगाया था कि जनवरी महीने में करीब 8 लाख गांठ का निर्यात होगा जबकि इसके पहले दो महीनों में (नवंबर-दिसंबर) 10 लाख गांठ का निर्यात हुआ है। कपास निर्यातकों का कहना है निर्यात के नए अनुबंध नहीं होने की वजह से इस साल निर्यात का जो अनुमान लगाया गया था उसका पूरा होना मुश्किल है। वैश्विक बाजार में भी दाम निचले स्तर पर चल रहे हैं। ऐसे में भारतीय कपास निर्यातकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सीएआई के मुताबिक चालू कपास वर्ष में निर्यात 53 लाख गांठ रहने की उम्मीद है जबकि पिछले साल 65 लाख गांठ का निर्यात हुआ था। हालांकि इस साल कपास का उत्पादन भी पिछले साल की अपेक्षा कम रहने वाला है। इसलिए कपास की कीमतों में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं होगा।
 
वायदा और हाजिर बाजार में कपास की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव पर जिंस मामलों के जानकार रवि मित्तल कहते हैं कि कमजोर रुपये का भी फायदा नहीं मिल रहा है। कमजोर रुपये के बावजूद कपास निर्यात में दिक्कतें आ रही हैं जिसका असर कपास की कीमतों में गिरावट के तौर पर दिखाई पड़ रहा है। मित्तल कहते हैं कि अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध की वजह से सीजन की शुरुआत काफी मजबूती के साथ हुई थी लेकिन यह मजबूती लंबे समय तक नहीं टिकी, जिससे कीमतें लगातार गि रही है। डॉलर की कीमतें गिरकर करीब 71 रुपये पहुंच गई है। चालू महीने में रुपया करीब 1.5 फीसदी कमजोर हुआ है। हालांकि रुपये में गिरावट का फायदा कपास को नहीं मिल सका है। दो महीने पहले माना जा रहा था कि व्यापार युद्ध का सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिलेगा। भारत से निर्यात बढ़ेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बाजार में अनिश्चितता की वजह से कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 
 
कपास और लूम कारोबारी विनोद गुप्ता कहते हैं कि कपास की कुल मांग और कुल आपूर्ति के सरकारी आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो इस साल उत्पादन कम पडऩे वाला है, लेकिन पिछला स्टॉक होने के वजह से कपास की कमी नहीं है। वैश्विक माहौल और बाजार भी कीमतें बढऩे की तरफ संकेत नहीं दे रहे हैं। ऐसे में कीमतों में स्थिरता आनी चाहिए। कपास के दाम में स्थिरता आती है तो इसका फायदा लूम और कपड़ा कारोबार को मिलेगा। कीमतों में अस्थिरता के कारण बाजार अनिश्चितता के भंवर में फंसा हुआ है जिसका सबसे ज्यादा खमियाजा कम पूंजी वाले कारोबारी उठाते हैं। 
Keyword: cotton, maharashtra, gujrat, export,,
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