बिजनेस स्टैंडर्ड - निवेश में दिख रही है तेजी, राज्य ज्यादा सक्रिय
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निवेश में दिख रही है तेजी, राज्य ज्यादा सक्रिय

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 01 14, 2019

जीडीपी में हिस्सेदारी 29.5 % बढ़ने की संभावना
बिजनेस स्टैंडर्ड निवेश में दिख रही है तेजी, राज्य ज्यादा सक्रियअर्थव्यवस्था में निवेश बहाल होता नजर आ रहा है। 2018-19 में सकल स्थायी पूंजी निर्माण 12.2 प्रतिशत बढ़ने का आधिकारिक अनुमान है। यह मोदी सरकार के कार्यकाल की सबसे तेज बढ़ोतरी होगी। साथ ही सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसकी हिस्सेदारी 2018-19 में 29.5 प्रतिशत बढऩे की संभावना है, जो इस सरकार के कार्यकाल की दूसरी सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। बहरहाल गहराई से किए गए विश्लेषणों से पता चलता है कि यह निवेश निजी क्षेत्र द्वारा संचालित नहीं है, बल्कि सरकार संचालित है। खासकर राज्यों ने ज्यादा निवेश किया है। 

केयर रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि निजी क्षेत्र का निवेश नहीं बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अगर वे उल्लेखनीय निवेश करते तो उनके धन के स्रोत का कुछ संकेत मिलता।  उदाहरण के लिए अप्रैल-नवंबर 2018-19 के दौरान कॉर्पोरेट बॉन्डों का प्राइवेट प्लेसमेंट बहुत कम दिखा और धन जुटाने की दूसरी सबसे कम राशि आई। इस अवधि के दौरान 2.9 लाख करोड़ रुपये के 1,486 ऐसे पत्र जारी किए गए। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की ओर से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2014-15 की इस अवधि के दौरान इससे कम राशि 2.2 लाख करोड़ रुपये जुटाई गई थी, जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने कार्यभार संभाला था। 

एक और आंकड़े से भी यही कहानी उभरकर आती है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक उद्योगों को बैंकों से मिलने वाला कर्ज 30 मार्च 2018 की तुलना में 23 नवंबर 2018 में 0.3 प्रतिशत बढ़ा है। बढ़ोतरी की यह दर भी ज्यादा है, क्योंकि 2017 की समान अवधि की तुलना में कर्ज 2.8 प्रतिशत कम हुआ है। बहरहाल आंकड़ों के मुताबिक सेवा में कुछ बढ़ोतरी नजर आ रही है क्योंकि बैंक कर्ज 9.9 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि इसी अवधि के दौरान पिछले साल 2.3 प्रतिशत गिरा था। बहरहाल इस क्षेत्र में ज्यादातर वृद्धि ट्रेड और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की ओर से आ रही है। सबनवीस ने कहा कि खुदरा क्षेत्र में पूंजीगत व्यय बहुत ज्यादा नहीं है, एनबीएफसी ने संभवत: दीर्घकालीन परियोजनाओं में निवेश नहीं किया होगा। 

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने कहा कि निजी क्षेत्र से ऑटो, अक्षय ऊर्जा आदि में निवेश बढऩे के कुछ संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह निवेश मुख्य रूप से राज्य सरकारों की ओर से आ रहे हैं।  दरअसल सालाना आधार पर नवंबर महीने में केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले 8 महीने में वृद्धि 4 प्रतिशत पर स्थिर रही।  इस समय केंद्र सरकार की तुलना में सभी राज्यों का पूंजीगत व्यय करीब दोगुना हो गया है। सरकार ने बजट में कुल पूंजीगत खर्च 2018-19 में 8.75 लाख करोड़ रुपये रखा है, जबकि राज्यों का कुल खर्च इसका दो तिहाई ही है। 

भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्यकांति घोष ने कहा कि केंद्र का पूंजीगत व्यय कम रहा, लेकिन राजमार्ग, सड़कों और रेलवे में प्रमुख रूप से निवेश हुआ है। इसके अलावा आवास, खासकर सस्ते आवास के क्षेत्र में निवेश बढ़ा है।  इंडिया रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने भी कहा कि निजी क्षेत्र से निवेश के भी संकेत मिल रहे हैं। बहरहाल उन्होंने कहा कि निवेश मुख्य रूप से राज्य सरकारों की ओर से संचालित है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से निवेश ठहर गया है, लेकिन सड़क, आवास और अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्रोंं में निवेश हो रहा है। 

वित्त वर्ष 19 में 5,759 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण नवंबर तक हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 4,942 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ था। भारतमाला परियोजना के तहत अक्टूबर 2018 के अंत तक 6,407 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाएं आवंटित की गई हैं।  दिल्ली के आसपास दो पेरिफेरल एक्सप्रेसवे बन चुकी हैं। इसमें 135 किलोमीटर की पूर्वी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (ईपीई) और 135 किलोमीटर की पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (डब्ल्यूपीई) शामिल हैं जो एनएच-1 और एनएच-2 को दिल्ली के पश्चिमी और पूर्वी हिस्से से जोड़ती हैं। इनका उद्घाटन क्रमश: मई 2018 और नवंबर 2018 में हुआ है। 

नाइट फ्रैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2018 में 95 सस्ती आवासीय परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। साथ ही हरियाणा मेंं दीन दयाल जन आवास योजना शुरू की गई है, जिसका मकसद अवैध कॉलोनियों को वैध कॉलोनियों में बदलना है। इसके साथ ही सरकार मकान के खरीदारों को सरकार सब्सिडी की पेशकश कर रही है, जिससे रियल एस्टेट बाजार में अनुकूल माहौल बनाया जा सके।  एनॉरॉक के आंकड़ों के मुताबिक सस्ती आवासीय परियोजनाओं में वित्त वर्ष 18 की दूसरी तिमाही मेंं प्रमख 7 शहरों मेंं 22,120 मकानों की पेशकश की गई है। इस तिमाही में सस्ते आवास की पेशकश कुल आपूर्ति की 46 प्रतिशत रही। अगर इन आंकड़ों को और सूक्ष्य करें तो करीब 6,530 मकानों के दाम 20 लाख रुपये से कम रहे, जबकि शेष के दाम 20 लाख से 40 रुपये के बीच रहे हैं। (साथ में करण चौधरी और मेघा मनचंदा)
Keyword: GDP, fiscal deficit, dollar, bond, राजकोषीय घाटा जीडीपी,
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