बिजनेस स्टैंडर्ड - बिल्डरों के पास अनबिके मकानों का अंबार
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बिल्डरों के पास अनबिके मकानों का अंबार

कृष्ण कांत / मुंबई 01 14, 2019

रियल एस्‍टेट

बिजनेस स्टैंडर्ड बिल्डरों के पास अनबिके मकानों का अंबारनए मकानों के बिकने की रफ्तार कम होने के बावजूद देश के शीर्ष बिल्डर और रियल एस्टेट डेवलपर लगातार अपनी इन्वेंट्री बढ़ा रहे हैं। सितंबर 2018 में खत्म तिमाही के अंत में देश की 27 सूचीबद्ध रियल्टी कंपनियों के पास 1.13 लाख करोड़ रुपये के अनबिके फ्लैट थे जो पिछले साल मार्च के अंत की तुलना में 21 फीसदी अधिक है। तब इन कंपनियों के पास 93,358 करोड़ रुपये के अनबिके फ्लैट थे। कंपनियों के आंकड़ों के मुताबिक यह इन्वेंट्री वित्त वर्ष 2019 की पहली छमाही में उद्योग की शुद्ध सालाना बिक्री के 32 महीने के बराबर थी। मार्च 2018 के अंत में यह 25.2 महीनों के बराबर थी जबकि मार्च 2016 के अंत में यह 22.7 महीनों के बराबर थी।

करीब एक दशक में यह उद्योग के लिए अनबिकी इन्वेंट्री का सबसे उच्च स्तर है। उदाहरण के लिए नमूना कंपनियों के पास मार्च 2014 के अंत में 90,000 करोड़ रुपये की अनबिकी इन्वेंट्री थी जो वित्त वर्ष 2014 में कंपनी की 23 महीने की बिक्री के बराबर थी। विश्लेषकों का कहना है कि राजस्व और अनबिके मकानों के बीच बढ़ती खाई से उद्योग में नकदी का संकट खड़ा हो गया है। लायसंस फोरास के प्रबंध निदेशक पंकज कपूर ने कहा, 'हरेक अनबिके मकान या संपत्ति से डेवलपर को राजस्व का नुकसान होता है और उन्हें इसके खर्च के भुगतान के लिए वैकल्पिक स्रोत खोजना पड़ता है।'

हाल के वर्षों में गैर बैंकिंग वित्त कंपनियां (एनबीएफसी) रियल्टी उद्योग के लिए वित्त का अहम स्रोत थीं लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) के डिफॉल्ट के बाद यह करीब-करीब खत्म हो चुका है। रियल्टी रिसर्च फर्म प्रॉपइक्विटी के मुख्य कार्याधिकारी समीर जसूजा कहते हैं, 'एनबीएफसी में नकदी संकट ने बिल्डरों के लिए अनबिकी इन्वेंट्री रखना मुश्किल बना दिया है। इसके कारण कुछ बिल्डरों ने ऋणदाताओं को ब्याज भुगतान में डिफॉल्ट किया है।' पिछले तीन साल में उद्योग की शुद्ध बिक्री 3.2 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से घटी है जबकि अनबिकी इन्वेंट्री 8.2 फीसदी की सालाना दर से बढ़ी है। 

हमारे विश्लेषण में शामिल नमूना कंपनियों की वित्त वर्ष 2019 की पहली छमाही में संयुक्त शुद्ध बिक्री 42,598 करोड़ रुपये रही जो वित्त वर्ष 2016 के दौरान करीब 47,000 करोड़ रुपये थी। सितंबर 2018 के अंत में डीएलएफ के पास सबसे अधिक 23,815 करोड़ रुपये की इन्वेंट्री थी जो करीब 39 महीनों की बिक्री के बराबर थी। इसके बाद एचडीआईएल (14,560 करोड़ रुपये), प्रेस्टीज एस्टेट (12,795 करोड़ रुपये), इंडियाबुल्स रियल एस्टेट  (10,470 करोड़ रुपये) और ओमैक्स (8,048 करोड़ रुपये) के पास सबसे अधिक अनबिकी इन्वेंट्री थी। यह विश्लेषण 27 रियल एस्टेट डेवलपर कंपनियों के वित्तीय लेखाजोखा पर आधारित है जो बीएसई 500 या बीएसई मिडकैप या बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स का हिस्सा हैं। इनमें डीएलएफ, गोदरेज प्रॉपर्टीज, प्रेस्टीज एस्टेट, ओबेरॉय रियल्टी, एचडीआईएल, इंडियाबुल्स रियल एस्टेट, शोभा, ओमेक्स, कोल्टे पाटिल डेवलपर्स और पूर्वांकरा आदि शामिल हैं। 
Keyword: real estate, property, GST, RERA,,
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