बिजनेस स्टैंडर्ड - इस साल बाजार में ज्यादा ही उतार-चढ़ाव रहेगा
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, January 18, 2019 03:16 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

इस साल बाजार में ज्यादा ही उतार-चढ़ाव रहेगा

ऐश्ली कुटिन्हो /  January 13, 2019

इस वर्ष बाजारों को न केवल फेडरल रिजर्व के कदम बल्कि अमेरिका-चीन के बीच व्यापार वार्ता भी प्रभावित करेगी। रिलांयस म्युचुअल फंड में इक्विटी निवेश के मुख्य निवेश अधिकारी मनीष गुनवानी ने ऐश्ली कुटिन्हो के साथ बातचीत में कहा कि भौतिक परिसंपत्तियों से वित्तीय संपत्तियों की ओर जाने का सिलसिला संरचनात्मक है और इससे म्युचुअल फंडों में ज्यादा निवेश आना चाहिए। पेश हैं उनसे हुर्ई बातचीत के अंश:

 
भारतीय शेयर बाजारों के लिए पिछला साल तो उतार-चढ़ाव वाला था। इस साल के बारे में आपका क्या अनुमान है?
 
हमारा मानना है कि पिछले साल मिड-कैप में जो गिरावट आई और उथल-पुथल हुई, उसके तार कुछ हद तक वर्ष 2016 और 2017 के रुझानों से जुड़े हैं। उस समय न केवल भारतीय बल्कि वैश्विक बाजारों में भी बेहद स्थिरता का दौर था। वह एक असामान्य दौर था जिसमें भारतीय बाजार में 5 फीसदी की छोटी सी गिरावट भी नहीं आई। इस स्थिरता के कारण कुछ ज्यादा ही तेजी आई, खासतौर पर समूचे बाजार में। इसलिए पिछले साल का उतार-चढ़ाव कुछ मायनों में उसी का नतीजा था। बाजार में तेजी-मंदी का यह सिलसिला इस साल आम चुनाव तक बना रह सकता है। चीन की वृद्धि और अमेरिका-चीन के बीच व्यापार संवाद भी बाजार पर असर डाल सकते हैं। सबसे अहम बात यह कि अमेरिका में लगातार तेजी का दौर चला है। अब उसकी यह तेजी चरम पर पहुंच गई है या इसमें और गति आएगी, इस संकेत का सभी बड़े बाजारों पर असर पड़ेगा।    
 
क्या इस स्तर पर भारतीय बाजार महंगे लगते हैं?
 
कुल मिलाकर बाजार मध्यवर्ती क्षेत्र में हैं। जैसे, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद आर्थिक संकेतों में मजबूती सकारात्मक है। कमाई का पहिया भी घूमने लगा है। मिडकैप में वक्त के साथ जो गिरावट आई है, हम बाजार पूंजीकरण की श्रेणियों को लेकर मोटे तौर पर तटस्थ हैं। हमारा मानना है कि तीन साल के हिसाब से लार्ज कैप और मिड कैप दोनों ही सतत रिटर्न दे सकते हैं। 
 
शेयर बाजार पर चुनाव नतीजों का क्या असर होगा? 
 
आम चुनाव से उतार-चढ़ाव आता है। पुराना रिकॉर्ड देखें तो चुनाव नतीजों का अनुमान और उन पर बाजार की प्रतिक्रिया एकदम खरी नहीं उतरी है। थोड़े बहुत हो-हल्ले को छोड़ दें तो बाजार के लिए नीतिगत सुधार जारी रहना ज्यादा अहम होता है। जब तक ऐसा होता रहेगा, चुनाव नतीजों का सीमित ही असर होगा। हमारी समझ में बाजार में घट-बढ़ मुख्य रुप से अमेरिकी और चीनी अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ घरेलू कारणों से आएगी। 
 
क्या अगली  तिमाहियों में कंपनी जगत की आय में  बहाली के आसार हैं? 
 
हमारा यकीन है कि कॉरपोरेट को ऋण देनेवाले बैंक, फार्मा और दूरसंचार जैसे क्षेत्र जो पिछले तीन-चार साल से गिरावट के शिकार थे, वे आय की संभावनाओं के लिहाज से अब बढ़ोतरी के कगार पर हैं। अगर जिंसों में नरमी रही तो बैंकिंग और खपत के लिए यह बहुत अच्छा होगा। वित्त वर्ष 2019 की पहली छमाही में बिक्री वृद्धि अच्छी रही है। कुछ क्षेत्रों को छोड़ दें तो कॉरपोरेट की आय में बढ़ोतरी शुरू हई है। ऐसा लग रहा है कि कई साल बाद कॉरपोरेट की मुनाफा वृद्धि चालू वित्त वर्ष में असमायोजित जीडीपी की बढ़ोतरी दर को भी पीछे छोड़ देगी। हमारी नजर में यह रुझान बरकरार रहना चाहिए और अगले दो -तीन साल के लिहाज से आय का सिलसिला अच्छा ही रहेगा। 
 
किन वैश्विक संकेतों पर नजर रहेगी? 
 
सबसे महत्त्वपूर्ण है अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार और इस पर फेडरल रिजर्व की प्रतिक्रिया। इसी से अमेरिकी बॉण्ड और डॉलर का पता चलेगा जो कि दुनिया भर में नकदी को प्रभावित करते हैं। फिलहाल, यूरोप और जापान जैसे बड़े क्षेत्रों में वृद्धि की उम्मीद बहुत कम है। बाजार चाहता है कि बड़े केंद्रीय बैंक सस्ती मुद्रा को समेटने की रफ्तार धीमी ही रखें। अगर अमेरिकी फेडरल सख्ती की अपनी रफ्तार धीमी कर दे तो कई उभरते बाजारों को राहत मिलेगी। ब्रेक्सिट और कच्चे तेल की उतनी चिंता नहीं लग रही है। 
 
म्युचुअल फंडों में निवेश की आवक पर क्या कहेंगे?
 
लोगों का पैसा भौतिक परिसंपत्तियों से वित्तीय परिसंपत्तियों की ओर जा रहा है। इसकी एक बड़ी वजह मुद्रास्फीति का स्तर कम होना है। पिछले कुछ साल से यह स्थिति बरकरार है। जिंसों की कीमतों, खासकर तेल के दामों में हाल की गिरावट से लगता है कि मुद्रास्फीति कम ही रहेगी। भारतीय परिवारों का झुकाव भौतिक परिसंपत्तियों की ओर रहता है। उनकी बचत का बहुत ही कम हिस्सा ही इक्विटी में है। हमको लगता है कि घरेलू बचत का हिस्सा वित्तीय परिसंपत्तियों में बढ़ेगा। विपरीत हालात के बावजूद हमें इस साल भी ठीक-ठाक निवेश की उम्मीद थी। अब हालात सुधरे हैं। एक साल पहले की तुलना में बाजार भी आकर्षक हुए हैं। इससे लगता है कि फंडों में निवेश बढऩा चाहिए।
Keyword: RBI, share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या गोयल का प्रस्ताव जेट के कर्जदारों को आएगा रास?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.