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विदेशी ब्रोकर लगा रहे मुनाफा वृद्घि पर दांव

ऐश्ली कुटिन्हो /  January 13, 2019

भारतीय शेयर बाजारों के लिए मूल्यांकन पर दबाव बना हुआ है, पर विदेशी ब्रोकर इसे लेकर आशान्वित हैं कि सुधरते वृहद परिदृश्य और कॉरपोरेट आय वृद्घि की रफ्तार में तेजी से भारतीय बाजारों को वर्ष की समाप्ति बढ़त के साथ करने में मदद मिल सकती है। चुनाव की वजह से अस्थिरता देखी जा सकती है, लेकिन दीर्घावधि में इसका ज्यादा असर दिखने की आशंका नहीं है। ब्रोकरों ने नीचे ऐसे कई कारकों का जिक्र किया है जिनसे 2019 में भारतीय शेयर बाजार की चाल प्रभावित हो सकती है: 

 
आय वृद्घि
 
आय वृद्घि में सुधार पिछले कई वर्षों से अनिश्चित साबित हुआ है, लेकिन विदेशी ब्रोकर आशान्वित हैं। सीएलएसए ने कहा है, 'जहां आक्रामक मार्जिन अनुमानों की वजह से वित्त वर्ष 2020 के लिए 25 प्रतिशत के हमारे ईपीएस वृद्घि अनुमान के लिए गिरावट का जोखिम बना हुआ है, वहीं हमारा मानना है कि निफ्टी की वर्ष के लिए 18-20 प्रतिशत की आय वृद्घि को घरेलू कॉरपोरेट बैंकों में सुधार से मदद मिलेगी।' क्रेडिट सुइस के अनुसार आय वृद्घि तेज हुई है और खासकर वित्त वर्ष 2020 में इसमें और सुधार आने का अनुमान है, क्योंकि सुधारों का फायदा दिखना शुरू हो गया है।
 
मूल्यांकन
 
सीएलएसए का मानना है कि निफ्टी एक वर्षीय ईपीएस अनुमान के 17 गुना पर कारोबार कर रहा है और यह 10 वर्ष के औसत की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है।  क्रेडिट सुइस के अनुसार अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारत का प्रीमियम 37 प्रतिशत के ऐतिहासिक औसत की तुलना में 66 प्रतिशत पर है। सीएलएसए के अनुसार, 'हमारा मानना है कि अन्य बाजारों की तुलना में मूल्यांकन पर अब कुछ दबाव दिख रहा है और भारतीय इक्विटी बाजार रेटिंग में कमी के जोखिम से जूझ रहे हैं। इसके अलावा, 2019 के आम चनुाव में नई सरकार के लिए संभावित कमजोर जनादेश से भी पी/ई रेटिंग में कमी को बढ़ावा मिल सकता है।'
 
चुनाव
 
सामान्य तौर पर, पिछले तीन चुनावी वर्ष भारतीय शेयर बाजारों के लिए सकारात्मक रहे हैं। क्रेडिट सुइस का कहना है कि दीर्घावधि निवेशकों को पिछली चुनाव-केंद्रित अस्थिरता पर विचार करना चाहिए और खास इक्विटी में निवेश के लिए शेयर कीमतों में भारी गिरावट का लाभ उठाना चाहिए। डॉयचे बैंक के अनुसार, चुनाव-पूर्व श्रेष्ठ प्रदर्शकों में कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, एनर्जी, और उद्योग शामिल हैं, वहीं चुनाव के बाद अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन करने वालों में आईटी सेवा क्षेत्र शामिल रहा है। डॉयचे का कहना है, 'सामान्य तौर पर, वैश्विक क्षेत्रों ने चुनाव के बाद बेहतर प्रदर्शन किया है।'
 
मिड-कैप बनाम लार्ज-कैप
 
डॉयचे बैंक का मानना है कि निफ्टी मिडकैप का 2.3 गुना का मौजूदा पी/बी मूल्यांकन काफी हद तक ऐतिहासिक औसत के अनुरूप है और लार्ज-कैप की तुलना में मूल्यांकन अंतर स्टैंडर्ड डेविएशन के आसपास है जो ऐतिहासिक रेंज से अधिक है। डॉयचे बैंक का कहना है, 'मिड-कैप मूल्यांकन अक्सर घरेलू निवेशक धारणा से प्रभावित होता है। धारणा में बदलाव के किसी बड़े कारक के अभाव और राजनीतिक अनिश्चितता को देखते हुए हमारा मानना है कि कमजोर प्रदर्शन निकट भविष्य में भी बरकरार रहेगा।' सीएलएसए का मानना है कि निफ्टी के मुकाबले 2 प्रतिशत गिरावट पर मिड-कैप मूल्यांकन दिसंबर 2017 में दर्ज की गई सर्वाधिक ऊंचाई की तुलना में काफी आकर्षक है। 
 
वैश्विक तरलता में सख्ती
 
के्रडिट सुइस के अनुमानों के अनुसार केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट अगले 12 महीनों में 400 अरब डॉलर और अगले दो वर्षों में लगभग 900 अरब डॉलर तक घटने का अनुमान है। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच का कहना है, 'यदि उभरते बाजारों पर मौजूदा समय में अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य/कम तरलता की वजह से दबाव पड़ता है तो भारत पर भी इन चिंताओं का नकारात्मक असर पडऩे की आशंका है।'
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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