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सरकारी बैंकों के शेयरों में सुधार के आसार

हंसिनी कार्तिक /  January 13, 2019

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) शेयरों के लिए वर्ष की शुरुआत सकारात्मक रुझान के साथ हुई है। पूंजी लगाने के लिए सरकार की प्रतिबद्घता, फंसे कर्ज की वसूली को लेकर मजबूत रुझान और अनुकूल बॉन्ड बाजार हालात ने पीएसबी को अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत बनाने के लिहाज से उपयुक्त स्थिति में ला दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि 2019 कई सरकारी बैंकों, खासकर बड़े बैंकों के लिए वृद्घि का वर्ष हो सकता है। उनका मानना है कि वर्ष 2015 से अपने अपेक्षाकृत कम मूल्यांकन के बाद मौजूदा वर्ष इन बैंकों के लिए कुछ अलग साबित हो सकता है। 

 
जहां भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) जैसे प्रमुख बैंक कई ब्रोकरों के पसंदीदा हैं, वहीं केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे छोटे प्रतिस्पर्धियों के लिए भी धारणा सकारात्मक हो रही है। एसएमसी कैपिटल के सिद्घार्थ पुरोहित कहते हैं, 'तीन साल तक पीएसबी पर हालात नकारात्मक बने रहने के बाद अब संकेत सकारात्मक हो रहे हैं।' वह कहते हैं, 'हम ऐसे मोड़ पर पहुंच रहे हैं जहां मूल्यांकन अंतर घट रहा है।' उनका भरोसा काफी हद तक इस तथ्य से पैदा हुआ है कि बैंक अब फंसे कर्ज की पहचान के चक्र के चरम पर हैं और आने वाला समय ऋण वसूली के मौजूदा रुझान को मजबूत बनाने के लिहाज से अनुकूल रहेगा। सितंबर तिमाही के परिणाम से संकेत मिला है कि व्यवस्था में दबाव कुछ कम हुआ है। प्रावधान लागत और स्लिपेज पीएसबी के लिए घटे हैं और दिसंबर तिमाही में भी इस संदर्भ में सुधार आ रहा है। डॉयचे बैंक के विश्लेषकों का मानना है कि इन बैंकों को कमजोर बॉन्ड प्रतिफल से भी मदद मिलेगी। पीएसबी बड़ी बढ़त दर्ज करेंगे जिससे उनकी आय में भी मजबूती आएगी। ऋण वसूली से पीएसबी को मदद मिलना 2019 में उनकी वित्तीय स्थिति के लिए एक प्रमुख घटक होगा। दरअसल, यह ऐसा कारक रहा है जिसने उन्हें 2018 के मध्य में सुर्खियों में ला दिया था। आरबीआई की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएसबी ने पिछले साल अप्रैल से सितंबर तक फंसे कर्ज से जुड़े खातों से 60,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की। एन्वीजन कैपिटल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी नीलेश शाह का कहना है कि फंसे कर्ज की वसूली में पीएसबी का विश्वास बढऩे से रुझान में मजबूती 2019 में बरकरार रहेगी।
 
41,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी के साथ साथ 1.06 लाख करोड़ रुपये की पीएसबी पुनर्पूंजीकरण योजना से भी विश्वास बढ़ा है और ऋणों को बड़े पैमाने पर बट्टेखाते में डालने और प्रावधान का समय इन बैंकों के लिए पीछे छूट चुका है। पुरोहित कहते हैं, 'मेरा मानना है कि उधारी गतिविधियों में सुधार को देखते हुए बड़ी पूंजी पीएसबी के विकास के लिए खर्च की जाएगी।' कुछ खास शेयरों के संदर्भ में मॉर्गन स्टैनली एसबीआई पर सकारात्मक है। मॉर्गन स्टैनली का कहना है कि एसबीआई घटते प्रावधान, मजबूत ऋण वृद्घि, मुनाफे में सुधार और लागत नियंत्रण में सुधार की अवधि में प्रवेश कर रहा है। ये ऐसे कारक हैं जिनका इस बैंक के शेयर की कीमत पर असर अभी नहीं दिखा है। जहां तक बीओबी का सवाल है तो विलय को लेकर गतिरोध काफी हद तक दूर होने के बाद प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों ने अनुमान जताया है कि परिचालन परिदृश्य में सुधार आ रहा है। छोटे बैंक केनरा और यूनियन भी भविष्य में निवेशकों के पसंदीदा शेयर बन सकते हैं। इनके बड़े प्रतिस्पर्धियों की तरह परिसंपत्ति गुणवत्ता सुधार इन दोनों बैंकों के लिए स्पष्ट रूप से दिखा है और साथ ही पूंजी संबंधित समस्याएं भी दूर हो रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ये बैंक बेहतर सुधार की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। यूनियन बैंक के संदर्भ में नोमुरा का कहना है कि इसका मुख्य परिचालन मुनाफा मजबूत हो रहा है और बैंक 10 प्रतिशत परिचालन मुनाफा वृद्घि दर्ज कर सकता है। वहीं केनरा बैंक के लिए जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों ने 'बनाए रखें' का सुझाव दिया है, क्योंकि उनका मानना है कि इस बैंक का रिटेल ऋण और मजबूत वृद्घि का रुझान उसकी मुख्य ताकत है। उनका कहना है कि बैंक की बैलेंस शीट वृद्घि 2019 की पहली छमाही में प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले अधिक मजबूत हुई है। पीएसबी में एकमात्र कमजोर कड़ी फिलहाल पंजाब नैशनल बैंक है। पिछले साल कई घोटालों ने इस बैंक को बड़ा झटका दिया और इसके लिए बाजार का भरोसा फिर से हासिल करना एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया हो सकती है।
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