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सामान्य उपज से खास अलग नहीं हैं ऑर्गेनिक फूड

खेती-बाड़ी
सुरिंदर सूद /  January 13, 2019

क्या ऑर्गेनिक खेती से कई स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय लाभ होते हैं? शायद नहीं। उपलब्ध साक्ष्यों से यही संकेत मिलता है कि ऑर्गेनिक खाद्य उत्पाद कृषि के नियमित तरीकों से उपजी फसलों से बेहतर नहीं हैं। अध्ययनों से अब यह भी पता चला है कि ऑर्गेनिक फूड पर्यावरण के लिए भी खास अच्छे नहीं हैं। प्रतिष्ठित जर्नल 'नेचर' के नवीनतम संस्करण में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि ऑर्गेनिक तरीके से खेती करने में अधिक उत्सर्जन होता है जिससे परंपरागत खेती की तुलना में जलवायु पर अधिक प्रभाव पड़ता है। ऑर्गेनिक मांस एवं दुग्ध उत्पाद तो सामान्य तरीके से तैयार उत्पादों की तुलना में जलवायु पर अधिक नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
 
नेचर में प्रकाशित यह लेख जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए भूमि उपयोग में बदलाव की सक्षमता का आकलन करता है। यह लेख स्वीडन की चामर्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी द्वारा किए गए एक अध्ययन पर आधारित है जिसमें वर्ष 2013 से लेकर 2015 तक के फसल उपज संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन में कहा गया है कि ऑर्गेनिक खेती के लिए अधिक जमीन की जरूरत होने से इसका पर्यावरणीय प्रभाव सामान्य खेती की तुलना में अधिक प्रतिकूल होता है। निस्संदेह, ऑर्गेनिक खेती के दौरान होने वाला प्रत्यक्ष कार्बन उत्सर्जन परंपरागत खेती से आम तौर पर कम होता है लेकिन कुल जलवायु प्रभाव कहीं अधिक होता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसकी वजह यह है कि ऑर्गेनिक खेती में अधिक जमीन की जरूरत पड़ती है जो अप्रत्यक्ष रूप से वनों को अधिक नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने अपने अध्ययन में यह पाया है कि ऑर्गेनिक तरीके से मटर उपजाने में जलवायु को सामान्य तरीके की तुलना में 50 फीसदी अधिक नुकसान उठाना पड़ता है। गेहूं के मामले में तो यह अंतर 70 फीसदी तक होता है।
 
इसके अलावा ऑर्गेनिक उत्पादों का पोषण बेहतर होने के दावों पर सवाल उठाने वाले नए वैज्ञानिक साक्ष्य भी सामने आ रहे हैं। इस तरह का शुरुआती भरोसेमंद संकेत वर्ष 2009 में किए गए एक व्यापक विश्लेषण से मिला था। उससे पता चला था कि ऑर्गेनिक एवं दूसरे खाद्य उत्पादों के पोषण स्तर में कोई अंतर नहीं होता है। बाद में किए गए अध्ययनों ने इस निष्कर्ष पर मुहर लगाने का काम किया। वर्ष 2012 में इस विषय पर प्रकाशित 240 शोध रिपोर्टों के व्यापक अध्ययन से भी इसकी पुष्टि हुई। इसके मुताबिक ऑर्गेनिक एवं गैर-ऑर्गेनिक उत्पादों में विटामिन, प्रोटीन और वसा संबंधी कारकों में शायद ही कोई फर्क होता है। हालांकि कुछ उत्पादों में फॉस्फोरस की आंशिक रूप से अधिक मात्रा पाई गई और ऑर्गेनिक दूध में ओमेगा-3 फैटी एसिड का स्तर ऊंचा पाया गया।
 
स्वाद के लिहाज से भी ऑर्गेनिक एवं गैर-ऑर्गेनिक फूड में कोई खास फर्क नहीं होता है। अमेरिकी कृषि विभाग के मुताबिक दोनों तरह से उपजे खाद्य उत्पादों के स्वाद में अंतर कुछ लोग ही बता पाते हैं। अमेरिकी सरकार के मुताबिक, 'स्वाद एक व्यक्तिपरक एवं व्यक्तिगत सोच का मामला होता है।'  ऑर्गेनिक खेती के गुण-दोष को परे रख दें तो पादप वैज्ञानिकों की सामान्य धारणा यही है कि पूरी तरह से रसायन-मुक्त खेती कर पाना अब मुमकिन नहीं रह गया है। भारत समेत कई देशों में हरित क्रांति के अग्रदूत रहे और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित महान कृषि विज्ञानी नॉर्मन ई बोरलॉग अक्सर यह कहा करते थे कि भूख की समस्या केवल ऑर्गेनिक खेती से हल नहीं की जा सकती है। अगर जरूरत का समूचा खाद्य पदार्थ ऑर्गेनिक तरीके से ही पैदा होना है तो इसके लिए न केवल अधिक जमीन की जरूरत होगी बल्कि ऑर्गेनिक खाद की भी बड़े पैमाने पर जरूरत पड़ेगी। लेकिन खेती योग्य जमीन सीमित है और ऑर्गेनिक खाद की भी एक सीमा से अधिक व्यवस्था कर पाना मुमकिन नहीं होगा। बोरलॉग अक्सर यह कहते थे, 'पौधों की जड़ें ऑयनी स्वरूप में पोषक तत्त्वों का अवशोषण करती हैं। उनके लिए यह मायने नहीं रखता है कि ये पोषक तत्त्व ऑर्गेनिक स्रोत से आ रहे हैं या गैर-ऑर्गेनिक स्रोत से।'
 
गैर-ऑर्गेनिक खेती के साथ बुनियादी समस्या खाद और जहरीले कीटनाशकों का बिना सोचे-समझे किया जाने वाला इस्तेमाल है। सुझाई गई सावधानियों को दरकिनार करते हुए खादों और कीटनाशकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है। अगर किसी तरह से इस बेजा इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सके तो आधुनिक खेती को लेकर जताई जाने वाली तमाम आपत्तियों को दूर किया जा सकता है। हालांकि इस पूरी दलील का मकसद ऑर्गेनिक खेती को कमतर बताना नहीं है। इसमें कई सकारात्मक पहलू हैं। खासकर मिट्टी के जैविक एवं सूक्ष्म-पोषक गुणों को संरक्षित करने में ऑर्गेनिक खेती अधिक मुफीद है। इस लेख का असली मकसद ऑर्गेनिक खेती के बारे में बनी गलत धारणाओं को दूर करना भर है। जो लोग ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए ऊंची कीमत दे सकते हैं और वह कीमत देने को तैयार हैं तो वे ऐसा करना जारी रख सकते हैं। ऑर्गेनिक खेती को भी इस बाजार पर पकड़ बनाने के लिए अपना विस्तार करने की जरूरत है। लेकिन रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल वाली परंपरागत खेती तेजी से विलुप्त होती जा रही खेती-योग्य जमीन और कृषि उपजों की बढ़ती मांग को देखते हुए अपरिहार्य है।
Keyword: agri, farmer, crop, onion, price,,
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