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बिना निगरानी संपत्ति बिक्री पर केंद्र व आईएलऐंडएफएस को फटकार

आशिष आर्यन / नई दिल्ली January 11, 2019

नैशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और आईएलऐंडएफएस के नवगठित बोर्ड को कंपनी व इसकी 348 सहायक कंपनियों की परिसंपत्तियों की बिक्री बिना निगरानी के करने पर फटकार लगाई है और कहा है कि क्यों न उन्हें निर्देश दिया जाए कि आगे होने वाली परिसंपत्ति बिक्री सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश की निगरानी में हो। 

आईएलऐंडएफएस के समाधान की प्रक्रिया कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया के समान होगी, जिसमें लेनदारों की समिति व रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की जरूरत होती है और इसका गठन इस बीच नहीं हो सकता, ऐसे में एनसीएलएटी ने सलाह दी है कि संपत्ति की बिक्री सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश के दिशानिर्देश के तहत होनी चाहिए ताकि बाद में किसी तरह की गड़बड़ी के आरोप न लगे।

न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की अगुआई वाले दो सदस्यीय पीठ ने कहा, आप महज इसलिए संपत्ति नहीं बेच सकते क्योंकि आप सरकार हैं। ये सभी काम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को करना चाहिए और यहां इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है।

केंद्र सरकार ने कहा कि वह शपथपत्र दाखिल करेगी कि आईएलऐंडएफएस की परिसंपत्ति बिक्री में उसने अभी तक किस प्रक्रिया का पालन किया है। आईएलऐंडएफएस के नवगठित बोर्ड के वकील ने कहा कि वह इस मामले पर निर्देश हासिल करेंगे और अपने जवाब के साथ सुनवाई की अगली तारीख 28 जनवरी को हाजिर होंगे। आईएलऐंडएफएस ने अब तक 22 परिसंपत्तियां बिक्री के लिए पेश की है, जिसमें सड़क, अक्षय ऊर्जा कारोबार शामिल है ताकि 91,000 करोड़ रुपये के कर्ज में कमी ला सके। कंपनी ने अपनी शिक्षा कारोबार, ऑल्टरनेट इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट वेंचर, रियल्टी परिसंपत्तियां और प्रतिभूति सेवा कारोबार को भी बिक्री के लिए रखा है। कंपनी ने कर्ज का बोझ घटाने के लिए पिछले साल 18 दिसंबर को संपत्ति मुद्रीकरण की शुरुआत की थी।

एनसीएलएटी ने शुक्रवार को यह भी कहा कि आईएलऐंडएफएस और इसकी 348 सहायक कंपनियों के खिलाफ चल रही मध्यस्थता कार्यवाही जारी रह सकती है (जहां कंपनी को भुगतान करना है), लेकिन मध्यस्थता ट्रिब्यूनल को ऐसे आदेश सील कवर में रखने को कहा। एनसीएलएटी ने कहा, सील कवर तब तक रखी जाएगी जब तक कि एनसीएलटी मुंबई पीठ कंपनी अधिनियम की धारा 241 व 241 के तहत याचिका पर किसी नतीजे पर न पहुंच जाए। धारा 241 व 241 कंपनी के कुप्रबंधन आदि से जुड़ा है और याची को शिकायत के साथ ट्रिब्यूनल से संपर्क की इजाजत देता है।

एनसीएलएटी ने मध्यस्थता ट्रिब्यूनल को कंपनी व इसकी सहायकों के खिलाफ आर्बिट्रेशन ऐंड कॉन्सिलिएशन ऐक्ट 1966 की धारा 17 के तहत किसी तरह का आदेश पारित करने से मना किया है। हालांकि अगर यह फैसला आईएलऐंडएफएस के हक में हो तो इसे सील कवर में रखा जाना चाहिए। एनसीएलएटी ने आईएलऐंडएफएस के नवगठित बोर्ड को सभी मध्यस्थता कार्यवाही की विस्तृत जानकारी 28 जनवरी तक मुहैया कराने का निर्देश दिया।

Keyword: NCLT, IL&FS, Board, Resolution Professtinal, RP, Central Government,
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