बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-कारोबारियों के खिलाफ नाराजगी
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ई-कारोबारियों के खिलाफ नाराजगी

अजय मोदी /  January 10, 2019

तीन साल पहले नोएडा में एक रेस्टोरेंट के मालिक राजीव कुमार (बदला हुआ नाम) अपने उत्पाद बेचने के लिए जोमैटो पर जगह पाकर काफी खुश थे। इस प्रस्ताव के तहत कुमार से किसी तरह का कमीशन नहीं लिया जाएगा लेकिन उन्हें सामान का वितरण अपने स्टाफ के जरिये करना होगा। ऑनलाइन फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ ही चीजें  बदलती चली गईं। बाद में कुमार को अपने स्टाफ से सामान डिलिवरी के साथ ही कंपनी को हर महीने 500 रुपये देने होते थे।  आज, कुमार जोमैटो को प्रत्येक ऑर्डर पर 60 रुपये देते हैं जिसमें डिलिवरी शुल्क भी शामिल है। 

 
कुमार बताते हैं कि एक ऑर्डर की औसत कीमत 400 रुपये होती है और इस हिसाब से यह कमीशन कीमत का लगभग 15 प्रतिशत रहा। वह कहते हैं कि हालांकि 15 प्रतिशत काफी बड़ी राशि है लेकिन फिर भी यह स्विगी के 20 प्रतिशत (जीएसटी सहित) और ऊबर ईट्स के 30 प्रतिशत से कम है। स्पष्ट है कि कारोबार के आकार और विस्तार के आधार पर दरों पर मोलभाव किया जा सकता है।  कई रेस्टोरेंट मालिक अभी इन समस्याओं का उपाय खोज रहे हैं। आमतौर पर आने वाले ग्राहक गायब होते जा रहे हैं, सीधे रेस्टोरेंट से ऑर्डर लेना खत्म हो गया और उन्होंने कारोबार पर अपना नियंत्रण खो दिया है। बेहतर वित्त उगाही करने वाले इन ऐप द्वारा दी जा रही छूट और ऑफर ने ग्राहकों की मांग का तरीका बदल दिया है। 
 
पिछले महीने, केरल होटल ऐंड रेस्टोरेंट एसोसिएसन ने कमीशन की उच्च दरों के विरोध में इन डिलिवरी ऐप से अस्थायी तौर पर ऑर्डर लेना बंद कर दिया था। केरल बंद ने इस बड़ी समस्या के समाधान का एक तरीका सुझाया था। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने  स्विगी, जोमैटो और ऊबर ईट्स से पूछा कि वे रेस्टोरेंट से संबंध बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। हालांकि तीनों कंपनियों ने कोई जवाब नहीं दिया। मेकमाईट्रिप, आइबीबो जैसी ऑनलाइन  ट्रैवल एजेंसियों के खिलाफ भी अधिकतर होटल मालिकों में इसी तरह का असंतोष दिख रहा है। 
 
पिछले महीने की शुरुआत में अहमदाबाद के 270 होटलों ने अधिक कमीशन लेने और बहुत अधिक छूट देने के चलते दोनों ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों के बहिष्कार का निर्णय किया था। एजेंसियों द्वारा दा जा रही भारी छूट के चलते ऑफलाइन बुकिंग लगभग समाप्त ही हो गई हैं। स्मार्टफोन के बढ़ते चलन और इंटरनेट की बेहतर होती कनेक्टिविटी के कारण ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं पर होटलों की निर्भरता बढ़ी है।  फेडरेशन ऑफ होटल ऐंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया  (एफएचआरएआई) ने आरोप लगाए हैं कि इन दोनों ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं की कारोबारी गतिविधियां 'शोषक, अनैतिक और विभाजनकारी' हैं, जिसके चलते 'बहुत सस्ती कीमतों' को बढ़ावा मिल रहा है और दूसरे कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है।  एफएचआरएआई के सदस्यों का दावा है कि ऑनलाइन सेवा प्रदाता कंपनियां 18-40 प्रतिशत के बीच कमीशन वसूलती हैं। नैसडैक में सूचीबद्ध मेकमाईट्रिप इस समस्या को सुलझाने के लिए कई होटल मालिकों से बातचीत कर रही है। मेकमाईट्रिप के अध्यक्ष और ग्रुप सीईओ दीप कालरा कहते हैं, '40 प्रतिशत मार्जिन का दावा बढ़ाचढ़ाकर पेश किया गया है। 30 प्रतिशत भी बहुत कम होटलों के लिए चार्ज किया जाता है और अधिकांश होटलों से 20-30 प्रतिशत के बीच में ही शुल्क लिया जाता है।' मेकमाईट्रिप ही इबीबो ब्रांड का भी प्रबंधन करती है। कालरा कहते हैं कि ग्राहकों को अधिक छूट देने से होटलों में बुकिंग की संख्या बढ़ रही हैं। मेकमाईट्रिप और आइबीबो की प्रतिस्पर्धी कंपनी यात्रा का कहना है कि ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं को अधिक संवेदनशील और सुविधाजनक होना चाहिए। यात्रा के सह-संस्थापक और सीईओ ध्रुव शृंगी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'कमीशन इन समस्याओं का एक हिस्सा है। मेरा मानना है कि कीमतों में अंतर इससे बड़ी समस्या है। बहुत से होटलों को लगता है कि उन्होंने अपनी ब्रांड पॉवर खो दी है। वे ग्राहकों के लिए निर्धारित शुल्क को नियंत्रित नहीं कर सकते।'
 
रेस्टोरेंट और होटलों का ऑफलाइन कारोबार काफी संघर्ष कर रहा है क्योंकि ग्राहकों को ऑनलाइन दरें पर काफी छूट मिल रही है। शृंगी के अनुसार होटल कारोबारियों का मानना है कि इस स्थिति के कारण उनकी सालों की मेहनत से बनाए गए ग्राहक छूट रहे हैं। वह कहते हैं, 'साझेदारी से दोनों को फायदा मिलना चाहिए और ऐसा नहीं होना चाहिए कि इससे केवल एक साझेदार को ही लाभ हो। हमें एक ऐसा माहौल तैयार करना होगा जहां एक सीमा तक होटलों के हाथों में भी शक्ति हो जिससे दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सके।'
 
यात्रा ने गुजरात होटल्स के साथ साझेदारी की है और उन्हें एक ऐसा ढांचा विकसित करने के लिए कहा है जिससे होटलों की कीमतों और ऑनलाइन कीमतों में ज्यादा अंतर ना रहे। शृंगी कहते हैं कि ऑनलाइन कंपनियों को यात्रियों को बेहतर अनुभव देने पर काम करना चाहिए और केवल छूट देना ही प्रभावी नहीं हो पाएगा। कालरा का भी मानना है कि कंपनी को होटल मालिकों के लिए सकारात्मक धारणा बनानी होगी।  कुछ दूसरे होटल मालिकों ने सॉफ्टबैंक से वित्त पोषित फर्म ओयो के कारोबारी मॉडल के खिलाफ भी आवाज उठाई है। एफएचआरएआई ने 'बड़े स्तर पर अनुबंधों का उल्लंघन' और 'कमीशन दरों में अनुचित और मनमाना संशोधन' का आरोप लगाया है। एफएचआरएआई के उपाध्यक्ष एस के जायसवाल कहते हैं कि संस्था के सदस्यों ने ओयो पर सस्ती कीमतों, बहुत अधिक छूट, अधिक कमीशन और अनुबंधों में लगातार बदलाव के जरिये होटल उद्योग के बाजार स्रकी गतिशीलता को विकृत करने का आरोप लगाया है। ओयो संस्थापक और ग्रुप सीईओ रितेश अग्रवाल कहते हैं, 'कुछ नया शुरू करने पर कुछ बदलाव आते हैं लेकिन अगर आपके उत्पाद और सेवाएं ग्राहकों के लिए बेहतर हैं तो लंबी अवधि में आपके कारोबार का विस्तार तेजी से होगा।' वह कहते हैं कि कई उद्यमी जोखिम उठाने और बदलाव को स्वीकार करने से बचते हैं। 
 
अग्रवाल कहते हैं, 'इस प्रक्रिया के कारण हुए बदलाव आम नहीं हैं और यह हमें समझना होगा।' इस समय ओयो के पास देशभर में 8,700 से अधिक संपत्तियों में 1,64,000 कमरे हैं। कंपनी का कहना है कि वह 25 प्रतिशत से अधिक कमीशन नहीं लेती और ग्राहक के लिए कीमतें बढ़ाने से दीर्घावधि में ग्राहक और होटल कारोबारियों, दोनों को नुकसान होगा। 
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