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एच-एनर्जी करेगी 3,700 करोड़ रुपये का निवेश

अभिषेक रक्षित / कोलकाता January 10, 2019

पश्चिम बंगाल में एक 30 लाख टन रिगैसिफिकेशन संयंत्र और एक पाइपलाइन तैयार करने के लिए एच-एनर्जी 3,700 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है जिसके जरिये न केवल राज्य भर में गैस की आपूर्ति की जा सकेगी बल्कि इसका निर्यात पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी किया जा सकेगा। टर्मिनल और संयंत्र स्थापित करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और पाइपलाइन तैयार करने पर 2,200 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा जिसके जरिये गैस दीघा के तट से खुलना तक पहुंचाई जाएगी जो बांग्लादेश की सीमा के नजदीक है। 

 
कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ दर्शन हीरानंदनी कहते हैं, 'करीब 20 लाख टन की आपूर्ति बांग्लादेश सरकार को की जाएगी जिसके साथ हमारा 20 साल का अनुबंध है और बाकी की बिक्री स्थानीय स्तर पर जरूरत के हिसाब से की जाएगी।' उम्मीद है कि निर्माण कार्य इस साल जून-जुलाई में शुरू कर दिया जाएगा और परियोजना पर क्रियान्वयन के लिए दिसंबर 2020 तक आधिकारिक मंजूरी मिल जाएगी।  कंपनी के मुताबिक इस परियोजना का संचालन एक ऐसे मॉडल पर होगा जहां ग्राहकों के पास रिगैसिफिकेशन संयंत्र में रिगैसिफिकेशन क्षमता की बुकिंग करने और खुद से तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का इंतजाम करने या गैस मार्केटिंग कंपनियों के जरिये अपने संयंत्रों में रि-गैसिफायड गैस की डिलिवरी का ऑर्डर देने का विकल्प होगा। 
 
यह परियोजना अगस्त 2015 की है जब एच-एनर्जी ने फ्लोटिंग स्टोरेज ऐंड रिगैसिफिकेशन यूनिट (एफएसआरयू) शुरू करने और उसके संचालन के लिए कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट द्वारा जारी एक निविदा में सफलता हासिल की थी।  एफएसआरयू कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के सीमा क्षेत्र के दायरे में आने वाले समुद्र में 115 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद होगी और यह कोंटाई में तटवर्ती सुविधा केंद्र से 115 किलोमीटर लंबे समुद्र के भीतर जाने वाले पाइपलाइन के जरिये जुड़ा होगा। परियोजना ने सभी बड़ी तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता अध्ययन को पूरा किया है और इसे तटीय नियमन क्षेत्र की मंजूरी भी पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से मिली है। 
 
हीरानंदनी का कहना है कि यह परियोजना 50 लाख टन तक बढ़ाई जा सकती है लेकिन यह फैसला गैस की मांग और कारोबार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। यह परियोजना नफा न नुकसान के स्तर पर 7-10 साल की अवधि में आ सकती है।  कंपनी इस साल अप्रैल में महाराष्ट्र में 40 लाख टन जयगढ़ एफएसआरयू परियोजना भी शुरू करेगी जबकि 60 किलोमीटर लंबी जयगढ़ दाभोल पाइपलाइन का परिचालन मई 2019 में शुरू हो सकता है। जयगढ़ परियोजना के लिए कंपनी ने पहले से ही 2065 करोड़ रुपये लगाए हैं। एच एनर्जी ने अपनी एक सहयोगी इकाई के जरिये जेएसडब्ल्यू जयगढ़ पोर्ट के साथ पोर्ट सेवा समझौता और उप रियायत समझौता किया है ताकि बंदरगाह पर एलएनजी रिगैसिफिकेशन टर्मिनल पर स्थापित किया जाएगा।
Keyword: power, electric, energy,,
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