बिजनेस स्टैंडर्ड - साइकिल से हो सकता है परिवहन समस्या का हल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, May 22, 2019 05:05 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

साइकिल से हो सकता है परिवहन समस्या का हल

विनायक चटर्जी /  January 09, 2019

साइकिल का इस्तेमाल करने से ईंधन की बचत से लेकर स्वास्थ्य में सुधार, प्रदूषण में कमी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी संभव है और करोड़ों रुपये का लाभ भी मुमकिन है। बता रहे हैं विनायक चटर्जी 

 
क्या एक दिन ऐसा भी आएगा जब कार चलाना धूम्रपान की तरह अस्वीकार्य हो जाएगा? ऐसा लगता तो नहीं लेकिन पिछले दिनों न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ बातचीत में ओस्लो की वाइस-मेयर हन्ना एलीस मार्सेन ने कमोबेश ऐसी ही तुलना की। योजना के मुताबिक ओस्लो के सिटी सेंटर को 2019 तक पूरी तरह कारों से मुक्त करने की है। सिटी सेंटर में पार्किंग की जगह अब कमोबेश खत्म हो चुकी है।  मार्सेन ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा था, 'कुछ दशक पहले घरों के भीतर सिगरेट पीना सामान्य माना जाता था। आज बहुत कम लोग ऐसा करेंगे। मुझे लगता है कि सिटी सेंटर में कारों पर भी यह बात लागू होती है।'
 
संभव है कि ओस्लो कार से मुक्ति की अपनी नीतियों के प्रति कुछ ज्यादा गंभीर हो लेकिन वह अपवाद भी नहीं है। पूरे यूरोप में मुख्य शहरों के प्रमुख इलाकों में कारों का प्रवेश सीमित किया जा रहा है। मैड्रिड के सिटी सेंटर में तमाम अनिवासियों के कार ले जाने पर रोक लगा दी गई है। माना जा रहा है कि शीघ्र ही समूचे स्पेन में यह नीति लागू की जाएगी। अन्य शहरों में भी प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं जो यूरोपीय संघ के दिशानिर्देशों से भी कड़े हैं।
 
इस परिदृश्य को देखते हुए अगर साइकिल की बात करें तो उसके अनेक लाभ हैं। पहली बात तो यह कि साइकिल जीवाश्म ईंधन पर निर्भर नहीं है और न ही वह किसी तरह का प्रदूषण फैलाती है। इसके तमाम सामाजिक लाभ भी हैं। सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चियों को नि:शुल्क साइकिल वितरित करने का न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में उनकी शिक्षा पर अच्छा असर हुआ है। बिहार में स्कूली छात्राओं को साइकिल देने की योजना को खासी चर्चा मिली तो वहीं पश्चिम बंगाल ने एक कदम आगे बढ़कर सरकारी विद्यालयों में कक्षा 10 से 12 तक के सभी बच्चों को नि:शुल्क साइकिल देने की पेशकश की। 
 
साइकिल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के आर्थिक लाभ भी कम नहीं हैं। जो लोग दूरदराज इलाकों में रहते हैं वे आसानी से बाजार तथा अन्य जगहों पर अपनी कृषि उपज बेचने या अन्य कारोबार करने के लिए जा सकते हैं। अब वे केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं हैं। इसके बावजूद भारत में परिवहन के माध्यम के रूप में साइकिल का महत्त्व कम होता जा रहा है। टेरी द्वारा 2018 में जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक परिवहन के माध्यम के रूप में साइकिल का इस्तेमाल तेजी से गरीब परिवारों तक सीमित होता जा रहा है। ये वे परिवार हैं जिनके पास परिवहन का कोई अन्य साधन नहीं है। 
 
वर्ष 2001 से 2011 के बीच साइकिल रखने वाले घरों की तादाद में केवल एक फीसदी का इजाफा हुआ और इनकी तादाद बढ़कर 45 फीसदी हो गई। शहरी क्षेत्रों में इनमें कमी आई। कई अल्प आय वाले परिवारों ने भी दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। साइकिल का इस्तेमाल बढ़ाने के दो तरीके हैं। पहला-अभी दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल कर रहे लोगों को साइकिल का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना तथा पैदल चलने वालों को साइकिल का इस्तेमाल करने के लिए कहना। ग्रामीण इलाकों में आज भी करीब 49 फीसदी कामगार जब काम करने जाते हैं तो वे 10 किलोमीटर तक की दूरी पैदल पूरी करते हैं। शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 39 फीसदी है। टेरी की रिपोर्ट जिसे अखिल भारतीय साइकिल निर्माता महासंघ का समर्थन हासिल है, में कहा गया है कि अगर इनमें से आधे कामगार भी साइकिल का इस्तेमाल शुरू कर दें तो अर्थव्यवस्था को 11,200 करोड़ रुपये वार्षिक का लाभ हो सकता है। अगर दोपहिया और तिपहिया वाहन चलाने वाले भी साइकिल का इस्तेमाल करने लगें तो अर्थव्यवस्था को 1.43 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ होने लगेगा। टेरी के मुताबिक अगर ऐसा हुआ तो ईंधन की बचत से लेकर स्वास्थ्य में सुधार, प्रदूषण में कमी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार तक कुल मिलाकर 1.8 लाख करोड़ रुपये का लाभ होगा। यह जीडीपी के 1.6 फीसदी के बराबर है।
 
परंतु लोगों के व्यवहार में इतना बड़ा बदलाव लाना आसान नहीं है। टेरी की रिपोर्ट में इससे जुड़ी समस्याओं को भी उजागर किया गया है। उदाहरण के लिए शहरों में साइकिल चलाने के लिए अलग लेन की कमी है और वाहन से होने वाले परिवहन पर जोर दिया जाता है। इसका नकारात्मक असर साइकिल चालकों पर पड़ता है। ग्रामीण इलाकों में समस्या कहीं अधिक गहरी है।  मारुति एक पूर्व प्रबंध निदेशक जगदीश खट्टर हाल ही में साइकिल के प्रशंसकों में शामिल हुए हैं। उन्होंने अपने एक हालिया साक्षात्कार में कहा कि भले ही एक साइकिल 3,000 से 5,000 रुपये मूल्य में आ जाए लेकिन 100 रुपये रोजाना कमाने वाले व्यक्ति के लिए इतना खर्च भी बहुत अधिक है। बैंक भी दोपहिया वाहनों के लिए ऋण देने को तैयार रहते हैं लेकिन साइकिल के लिए ऐसा कोई ऋण नहीं मिलता। अगर साइकिल खरीदने के लिए सस्ता ऋण या सब्सिडी दी जाए तो बड़ी तादाद में लोगों को साइकिल से जोड़ा जा सकता है। 
 
लागत का अवरोध खत्म करने का एक और भी तरीका है। यह काम बाइक किराये पर देकर या बाइक साझा करके भी किया जा सकता है। भारत समेत दुनिया भर के शहरों में ऐसी योजनाएं कारगर ढंग से चल रही हैं। परंतु ऐसा चुनिंदा बड़े शहरों के सीमित इलाके में ही हो रहा है। यही वजह है कि उनकी उपयोगिता भी सीमित है।  ऐसे में अगर कोई दूरदर्शी सरकार या उद्यमी यह सिलसिला दूरदराज इलाके के जरूरतमंद लोगों के लिए शुरू करे तो यह सफल साबित हो सकता है। अगर ऐसी योजनाएं चलाई जाएं तो आगे चलकर ये स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अनिवार्य अंग बन सकती हैं। 
 
उबर और एयरबीएनबी इस बात का उदाहरण हैं कि 'साझेदारी' का यह कारोबारी मॉडल किस कदर सफल साबित हो सकता है। कहा जा सकता है कि बाइक साझा करने से उपजी अर्थव्यवस्था देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत लंबा स्वस्थ असर डाल सकती है। 
 
(लेखक फीडबैक इन्फ्रा के चेयरमैन हैं। लेख में प्रस्तुत विचार निजी हैं।)
Keyword: environment, world, india, pollution, cycle,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या म्युचुअल फंड को जिंस डेरिवेटिव की अनुमति उचित है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.