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अग्रिम अनुमान से ज्यादा रहेगी भारत की वृद्धि दर : विश्व बैंक

इंदिवजल धस्माना और एजेंसियां / नई दिल्ली/वाशिंगटन January 09, 2019

विश्व बैंक ने आज 2018-19 और 2019-10 में भारत की वृद्धि दर पहले के अनुमान पर बरकरार रखी है। हालांकि बैंक ने विकासशील देशों अंतराष्ट्रीय कारोबार और विनिर्माण गतिविधियों में उतार चढ़ाव को देखते हुुए चेतावनी भी दी है। बैंक ने अनुमान लगाया है कि भारत की वृद्धि दर 2018-19 में 7.3 प्रतिशत रहेगी, जो अग्रिम अनुमानों में आधिकारिक रूप से लगाए गए 7.2 प्रतिशत अनुमान से थोड़ा ज्यादा है।  अपने हाल के वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में बैंक ने 2019-20 में भारत की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। वहींं दूसरी तरफ बैंक ने वैश्विक वृद्धि दर 2018 और 2019 में 0.1 प्रतिशत कम रहने का अनुमान लगाया है। बैंक ने कहा है कि यह भी जोरदार वृद्धि दर है। 

 
विश्व बैंक की सीईओ क्रिस्टालीना जॉर्जीवा ने कहा, 'लेकिन हम अंतरराष्ट्रीय कारोबार और विनिर्माण गतिविधियों में परेशान करने वाले संकेत देख रहे हैं।' उन्होंने रिपोर्ट जारी करते समय पत्रकारों से कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि ज्यादा चुनौती वाले इस माहौल में उभरते बाजारों व विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को संभावित हलचलों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा और इसके लिए राजकोषीय और मौद्रिक जगह बनानी होगी।  देशों से सुधारोंं को गति देने का अनुरोध करते हुए जॉर्जीवा ने कहा कि बैंक के हिसाब से मानव पूंजी में निवेश, ज्यादा निवेश के लिए बाधाएं दूर करना और सकारात्मकता बढ़ाना व विश्व की अर्थïव्यवस्था का एकाकार सुनिश्चित करना अहम होगा, जिससे उन्हें विस्तार और वृद्धि में फायदा मिलेगा। 
 
उन्होंने कहा, 'पूरे साल के दौरान दो तरह के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है, पहला कारोबारी तनाव और दूसरा, उभरते बाजारों व विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की वित्तीय स्थिति।' जिम यंग किम के 1 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान से बाहर जाने के बाद जॉर्जीवा विश्व बैंक के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में काम करेंगी।  विश्व बैंक  ने कहा है कि भारत विश्व की सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली मुख्य अर्थव्यवस्था बना रहेगा, जिसकी रफ्तार पड़ोसी प्रतिस्पर्धी चीन से तेज होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की अर्थव्यवस्था के 2019 और 2020 में 6.2 प्रतिशत तथा 2021 में 6 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने का अनुमान है।
 
विश्व बैंंक ने कहा कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2018-19 में 7.3 प्रतिशत की दर से तथा 2019 और 2020 में 7.5 प्रतिशत की औसत दर से वृद्धि हो सकती है। उसने कहा कि बैंकों के पुनर्पूंजीकरण तथा वस्तु एवं सेवा कर जैसे संरचनात्मक सुधारों के कारण घरेलू मांग बढ़ी है। विश्व बैंक ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग के कारण अगले साल चालू खाता घाटा जीडीपी का 2.6 प्रतिशत रह सकता है। उसने कहा कि ईंधन तथा खाद्य पदार्थों की कीमतों के बढऩे के कारण महंगाई दर रिजर्व बैंक के लक्ष्य के मध्य से कुछ ऊपर रह सकती है। उसने कहा कि जीएसटी तथा नोटबंदी के कारण भारत में अनौपचारिक क्षेत्र से औपचारिक क्षेत्र के बदलाव को प्रोत्साहन देखने को मिलेगा।
 
 विश्व बैंक ने रिपोर्ट में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा विनिर्माण गतिविधियां सुस्त पड़ी हैं। व्यापारिक तनाव बढ़ा है। कुछ बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष वित्तीय दबाव बढ़ा है।  उसने कहा कि इस साल विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर गिरकर दो प्रतिशत पर आ सकती है। बाहरी मांग में कमी आने, ब्याज दरों के बढऩे तथा नीतिगत अनिश्चितताओं से आने वाले समय में भी उभरती तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के परिदृश्य पर बोझ रहने का अनुमान है। विश्व बैंक ने कहा है कि विकासशील देशों की औसत आर्थिक वृद्धि दर 4.2 प्रतिशत रह सकती है।
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया की अर्थïव्यवस्थाओं में भारत में अनौपचारिकता बहुत कम है। उदारहण के लिए श्रीलंका में अनौपचारिक क्षेत्र का आकार सबसे ज्यादा है (कुल उत्पादन में अनौपचारिक क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत) और भारत की हिस्सेदारी सबसे कम करीब 20 प्रतिशत है। बहरहाल 2016 के आंकड़ों के मुताबिक श्रम बाजार के सूचकांक में यह रैंकिग पलट जाती है, जहां श्रीलंका की स्वरोजगार में हिस्सेदारी सबसे कम (42 प्रतिशत) और भारत की सबसे ज्यादा (76 प्रतिशत) है। 
Keyword: world bank, GDP, growth,,
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