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वित्त मंत्रालय पर सीएजी सख्त

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली January 09, 2019

पूंजीगत व्यय की जरूरतों के लिए ऑफ बजट वित्तपोषण और सब्सिडी का बकाया टालने को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने वित्त मंत्रालय की कड़ी आलोचना की है।  वित्तीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) पर संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में सीएजी ने मंगलवार को कहा है कि बाजार उधारी और अग्रिम जैसे ऑफ बजट वित्तपोषण संसदीय निगरानी के दायरे से बाहर रहते हैं, ऐसे में केंद्र इनके वित्तीय असर पर विचार करते हुए इस व्यवस्था और ऐसे वित्तपोषण के स्रोत को लेकर नीति बना सकता है। 
 
वित्त वर्ष 2016-17 के लिए दी गई अपनी रिपोर्ट में सीएजी ने कहा कि ऑफ बजट वित्तपोषण का इस्तेमाल उर्वरक का बकाया टालने, खाद्य सब्सिडी बिल और भारतीय खाद्य निगम का बकाया उधारी के माध्यम से करने के लिए किया गया।  रिपोर्ट में कहा गया है, 'सरकार राजस्व और पूंजीगत जरूरतें पूरी के लिए वित्तपोषण के ऑफ बजट तरीकों का सहारा लेती है। इस तरह की उधारी की मात्रा बहुत ज्यादा है और मौजूदा नीतिगत ढांचे में ऐसी उधारी के समग्र प्रबंधन को लेकर पारदर्शी व्यवस्था और प्रबंधन रणनीति का अभाव है।' 
 
इसमें कहा गया है, 'सरकार की रणनीति पूंजीगत व्यय को ऑफ बजट फाइनैंसिंग से पूरा करने की होती है, जिसमें उसे पूंजी केंद्रित परियोजनाओं की जरूरतेंं पूरी करने को लेकर लचीलापन मिलता है। ऐसी परियोजनाएं बजट के नियंत्रण से बाहर होती हैं। इसे सरकार की स्पष्ट या अंतर्निहित गारंटी मिलती है।' सरकार की ओर से तैयार किया गया कोई भी ढांचा ऑफ बजट वित्तपोषण को तार्किक और वस्तुनिष्ठ बनाएगा और इससे ऑफ बजट फाइनैंसिंग की मात्रा व धन के स्रोत के अलावा अन्य चीजें साफ हो सकेंगी। सीएजी ने आगे कहा है कि सरकार को ऑफ बजट उधारी के बारे में बजट के डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के माध्यम से और खातों में भी खुलासा करने पर विचार करना चाहिए। वित्तीय दायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम 2003 का मकसद केंद्र सरकार के दायित्वों को सुनिश्चित करना था, जिससे कि वित्तीय प्रबंधन में इंटर जेनरेशनल इक्विटी सुनिश्चित हो सके और दीर्घावधि के हिसाब से व्यापक आर्थिक स्थिरता आ सके। सरकारों ने सब्सिडी के अतिरिक्त बोझ को आगे बढ़ाने के लिए इसे आगे बढ़ाने का काम शुरू किया। 2018-19 में भी इस तरह के कदम की उम्मीद की जा रही है। केंद्र सरकार राजकोषीय घाटे के 3.3 प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इस तरीके पर विचार कर रही है। 
 
ऑफ बजट फाइनैंसिंग के बारे में सीएजी की रिपोर्ट में भारतीय खाद्य निगम का उदाहरण दिया गया है। अनाज की खरीद लागत और सस्ती दुकानों को अनाज मुहैया कराने के बीच आने वाले अंतर की भरपाई सरकार की सब्सिडी से की जाती है। अगर वित्त वर्ष के लिए बजट का आवंटन बकाए के भुगतान के लिए पर्याप्त नहीं होता है तो एफसीआई खाद्य सब्सिडी बिल पेश करता है। ऐसे बकायों को अगले वित्तीय वर्ष के लिए टाल दिया जाता है। 
Keyword: CAG, finance ministry,,
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