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कॉरपोरेट गारंटर के खिलाफ संभव है दिवालिया प्रक्रिया

आशिष आर्यन / नई दिल्ली January 09, 2019

गारंटी नाकाम होने पर वित्तीय लेनदार सबसे पहले कंपनी के बजाय कॉरपोरेट गारंटर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया की शुरुआत कर सकते हैं। नैशनल कंपनी लॉ अपीली ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने यह कहा है। ऐसे में आईबीसी की धारा 7 के तहत गारंटर के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। एनसीएलएटी ने कहा, यह काम प्रधान ऋणी के खिलाफ सभी कानूनी कदम आगे बढ़ाने से पहले हो सकता है। अपीली ट्रिब्यूनल ने कहा, यह काम किसी भी कॉरपोरेट गारंटर के खिलाफ हो सकता है, जो मूल कंपनी ने अपनी सहायक कंपनी के दिया हो और गारंटी भुनाए जाने के बाद अगर यह नाकाम होता है तो आईबीसी की शर्तों के तहत कॉरपोरेट गारंटर ऋणी बन जाता है।
 
इंडसलॉ के पार्टनर सौरभ कुमार ने कहा, गारंटी की ऐसी प्रकृति वित्तीय कर्ज की परिभाषा में शामिल है। इसलिए इसकी कोई वजह नहीं बनती कि एक वित्तीय लेनदार कॉरपोरट गारंटर के खिलाफ धारा 7 का इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकता। यह फैसला संहिता के दायरे में दिया गया है। अपीली ट्रिब्यूनल का फैसला फेरो एलॉय कॉरपोरेशन के खिलाफ रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन की दिवालिया याचिका पर आया है, जो अपनी सहायक फेकर पावर की कॉरपोरेट गारंटर थी। फेकर पावर ने आरईसी से 510.97 करोड़ रुपये उधार लिए थे और इसके लिए फेरो एलॉय कॉरपोरेशन ने कॉरपोरेट गारंटी दी थी।
 
फेकर पावर की तरफ से भुगतान में नाकाम रहने और इसके एनपीए बनने के बाद आरईसी ने फेरो एलॉय कॉरपोरेशन की कॉरपोरेट गारंटी भुनाने का फैसला लिया और इसे साल 2015 में 30 सितंबर को 21 दिन के भीतर 564 करोड़ रुपये का कुल बकाया चुकाने को कहा। फेरो एलॉय कॉरपोरेशन इसमें नाकाम रही और इसके बाद आरईसी ने एनसीएलटी, कोलकाता का दरवाजा खटखटाया। एनसीएलटी ने कहा कि दी गई कॉरपोरेट गारंटी संयुक्त है और मूल ऋणी के साथ इसका सह-अस्तित्व है।
Keyword: IBC, NCLT, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी),
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