बिजनेस स्टैंडर्ड - पेटीएम मॉल की नजर मोटी कमाई पर
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पेटीएम मॉल की नजर मोटी कमाई पर

युवराज मलिक /  01 08, 2019

ई-कॉमर्स

बिजनेस स्टैंडर्ड पेटीएम मॉल की नजर मोटी कमाई परपेटीएम मॉल ने भले ही देर से देश के ई-कॉमर्स बाजार में प्रवेश किया हो लेकिन उसने आते ही धूम मचा दी है। ई-कॉमर्स उद्योग में व्यापक बदलाव के बीच पेटीएम मॉल ने अपने लिए जगह बना ली है। पेटीएम मॉल को मोबाइल वॉलेट पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशन से अलग करके फरवरी 2017 में शुरू किया गया था। अभी यह एमेजॉन और फ्लिपकार्ट के बाद तीसरे स्थान पर है। विश्लेषकों के मुताबिक 2018 में पेटीएम मॉल की बिक्री में उससे पिछले वर्ष की तुलना में 100 फीसदी बढ़ोतरी हुई। कंपनी द्वारा दी गई नियामकीय जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 में उसका राजस्व 775 करोड़ रुपये था जबकि 2016-17 में यह 13.6 करोड़ रुपये था। उस वर्ष कंपनी को कारोबार में उतरे केवल दो महीने ही हुए थे।

ई-कॉमर्स में एमेजॉन और फ्लिपकार्ट का दबदबा है लेकिन पेटीएम मॉल ने शॉपक्लूज और स्नैपडील जैसी छोटी कंपनियों की कीमत पर अपनी जगह बनाई। पेटीएम मॉल के मुख्य परिचालन अधिकारी अमित सिन्हा ने कहा, 'यह हमारे लिए बहुत अच्छा साल रहा है। हर क्षेत्र में हमारा कारोबार बढ़ा।' इसमें कोई दोराय नहीं है कि कई चीजें पेटीएम मॉल के पक्ष में हैं। इसके पास पेटीएम के 20 करोड़ उपभोक्ताओं का मजबूत आधार है और साथ ही फंड की कोई कमी नहीं है। पेटीएम ने अपने शीर्ष अधिकारियों सहित 800 कर्मचारियों को इसमें भेजा है और नए एवं पुराने निवेशक अब तक इसमें 65 करोड़ डॉलर निवेश कर चुके हैं। इन पैसों के दम पर कंपनी ने भारी छूट और कैशबैक ऑफर देकर अपने लिए नए ग्राहक जुटाए।

कंपनी ने थोड़े ही समय में बुलंदी हासिल की है लेकिन इसके अनोखे कारोबारी मॉडल को लेकर चुनौतियां बरकरार हैं। साथ ही उसे एमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी दिग्गज कंपनियों से मुकाबला करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है जिनका 76 फीसदी बाजार पर कब्जा है।  अलबत्ता सिन्हा कहते हैं कि पेटीएम मॉल का आधार बेहद मजबूत है क्योंकि इसकी वृद्घि का कारण ग्रॉस मर्केंडाइज वेल्यू के बजाय यूजर रहे हैं। ई-कॉमर्स उद्योग में यह वृद्घि का व्यापक स्वीकार्य मानक है। सिन्हा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ साक्षात्कार में कहा, 'जीएमवी वृद्घि की तुलना में यूजर के मामले में हमारी वृद्घि ज्यादा है। अभी हम शुरुआत के दौर में हैं, इसलिए हमारा जोर लेनदेन की संख्या बढ़ाने पर है।'

बिजनेस स्टैंडर्ड पेटीएम मॉल की नजर मोटी कमाई परसिन्हा ने बिक्री के आंकड़ों या ग्राहकों की संख्या का खुलासा नहीं किया लेकिन कहा कि पेटीएम मॉल ने मार्च, 2019 तक सालाना 10 अरब डॉलर (करीब 70,000 करोड़ रुपये) बिक्री का लक्ष्य रखा है। विश्लेषकों का कहना है कि संभव है कि पेटीएम मॉल इस लक्ष्य को हासिल करने की तरफ अग्रसर हो लेकिन सवाल यह नहीं है कि कंपनी यह लक्ष्य हासिल कर पाएगी या नहीं बल्कि यह है कि वह ऐसा कैसे करेगी। डिजिटल रणनीति सलाहकार कार्तिक श्रीनिवासन कहते हैं, 'पेटीएम मुझे स्नैपडील की शुरुआती दिनों की याद दिलाती है जब इसे ऑफर और छूट के लिए जाना जाता था। यह एक सामान्य मॉडल है। इसमें वेंचर कैपिटल के व्यापक फंडिंग के दम पर भारी छूट और पेशकश इस उम्मीद में की जाती है ग्राहक कंपनी से जुड़े रहेंगे।'

श्रीनिवासन ने कहा कि इसमें कोई दोराय नहीं है कि पेशकश और छूट से ग्राहक आकर्षित होते हैं लेकिन किसी स्टोर से चिपके रहने के लिए ग्राहक छूट और पेशकश के इतर सेवा, अनुमानित आपूर्ति, विकल्प, बिक्री के बाद की स्थिति, रिटर्न आदि देखते हैं। अभी पेटीएम मॉल इन बातों के लिए नहीं जानी जाती है। उन्होंने कहा कि पेटीएम ग्राहकों को अपने ऑनलाइन स्टोर से खरीदारी करने के लिए भुगतान कर रही है। श्रीनिवासन ने कहा, 'यहां तक कि क्यूआर कोड पर आधारित उनके ऑफलाइन टु ऑनलाइन मॉडल में भी कोई उपभोक्ता ऑफलाइन बिक्री में भी उन्हें इसलिए विकल्प चुनता है क्योंकि उसे विमान टिकट और कैशबैक आदि के रूप में अतिरिक्त मूल्य मिलता है।' उन्होंने कहा, 'पेटीएम मॉल उपभोक्ताओं को अपने ऑनलाइन स्टोर से खरीदारी करने के लिए भुगतान कर रहा है। यह एक मजबूत कारोबारी रणनीति नहीं लगती है लेकिन जिस कंपनी ने भारी भरकम फंड जुटाया हो वह कुछ समय तक ऐसा कर सकती है।'

एमेजॉन इंडिया और फ्लिपकार्ट के उलट पेटीएम मॉल बड़े गोदामों या लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन का संचालन नहीं करती है। कंपनी केवल तीसरे पक्ष की सेवाओं का इस्तेमाल करती है। कंपनी के प्लेटफॉर्म पर किराना दुकानों और क्षेत्रीय आपूर्तिकर्ताओं का व्यापक नेटवर्क है। सिन्हा कहते हैं कि कम तामझाम के कारण कंपनी दूसरों से ज्यादा पूंजी कुशल है। विश्लेषकों का कहा है कि प्लेटफॉर्म पैकेजिंग, फुलफिलमेंट और आपूर्ति के लिए पूरी तरह अपने पार्टनरों पर निर्भर है जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का जोखिम है। 

लेकिन कंपनी की अपनी खूबियां हैं। महानगरों के इतर दूसरे शहरों में इसका नाम है और सभी उत्पाद श्रेणियों में इसका राजस्व अधिक व्यापक रूप से फैला है। ऐप्पल मैकबुक्स और आईफोन जैसे ज्यादा मांग वाले उत्पादों पर सर्वश्रेष्ठï कीमत देकर पेटीएम मॉल ने शुरुआत में ग्राहकों को आकर्षित किया। वास्तव में इसका श्रेणी विभाजन दूसरी कंपनियों की तुलना में बेहतर है। रेडसीयर कंसल्टिंग के आंकड़ों के मुताबिक मोबाइल फोन की बिक्री पर पेटीएम मॉल की निर्भरता केवल 35 फीसदी है जबकि दूसरे किसी भी प्लेटफॉर्म पर यह अमूमन 50 फीसदी होती है। 

सिन्हा ने कहा कि ग्रोसरी, फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी श्रेणियां भी जोर पकड़ रही हैं। माना जा रहा है कि फ्यूचर रिटेल में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के उसकी फ्यूचर समूह के साथ बातचीत चल रही है। फ्यूचर रिटेल बिग बाजार और मोर सुपरमार्केट शृंखला का परिचालन रकती है। अगर यह सौदा होता है तो इससे पेटीएम मॉल को अच्छा खासा सप्लायर नेटवर्क मिल जाएगा जहां फ्यूचर समूह के सुपरमार्केट स्टॉक कीपिंग और फुलफिलमेंट यूनिट का काम कर सकती हैं। माना जा रहा है कि एमेजॉन भी फ्यूचर रिटेल में हिस्सा खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। पेटीएम समूह की बड़ी ताकत इसका नेटवर्क है। कंपनी ट्रेवल बुकिंग से लेकर मोबाइल रिचार्ज और संपत्ति प्रबंधन सेवाएं देती हैं। दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों और छोटे इलाकों में भी इसकी पहुंच बढ़ रही है।

अगर कोई यूजर एक सेवा के लिए आता है तो उसे दूसरी सेवा से रूबरू होने का मौका मिल सकता है और वह किसी तीसरी सेवा का इस्तेमाल कर सकता है। ईवाई में पार्टनर और खुदरा एवं उपभोक्ता उत्पादों के नैशनल लीडर पिनाकीरंजन मिश्रा पेटीएम अपने इसी नेटवर्क के दम पर विस्तार करने की उम्मीद कर रही है। मिश्रा ने कहा, 'उनका उपभोक्ताओं के साथ रिश्ता है क्योंकि यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां आप टेलीफोन बिल चुका सकते हैं, बीमा पॉलिसी और मूवी टिकट भी खरीद सकते हैं। यह कंपनी का नेटवर्क है और इस समय वह यह योजना बना रही है कि इसका फायदा कैसे उठाया जाए।'
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