बिजनेस स्टैंडर्ड - क्या 2019 में आएगा आय में सुधार?
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क्या 2019 में आएगा आय में सुधार?

आकाश प्रकाश /  January 08, 2019

एक कठिन, अस्थिर और धीमे वैश्विक परिदृश्य में 2019 वाकई बदलाव लाने वाला वर्ष साबित हो सकता है। इस बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं आकाश प्रकाश

 
बीते पांच वर्षों में जिन बड़ी हताशाओं का सामना करना पड़ा उनमें एक है देश में कारोबारी जगत का कमजोर प्रदर्शन। बीते पांच वर्ष में आय में वृद्धि बमुश्किल 5 फीसदी दर्ज की गई। इसने न केवल अनुमानों को झुठलाया बल्कि निवेशकों को भी हताश किया। हर निवेशक यह सुनकर थक चुका है कि जीडीपी और कारोबारी मुनाफे का अनुपात कितना गिर चुका है और देश के कारोबारी जगत का मुनाफा कितने निचले स्तर पर है। ऐसी कई नीतिगत प्रस्तुतियां देखने को मिलीं जिनमें कहा गया कि पांच साल की अवधि में कमजोर पड़ते मुनाफे को दोबारा पटरी पर लाया जाएगा। अनुमान जताया गया कि व्यापक बाजार की समेकित सालाना वृद्घि दर (सीएजीआर) आय वृद्घि 20 फीसदी रहेगी। बीते पांच वर्षों के दौरान हर वर्ष ये अनुमान जताए जाते रहे और कहना न होगा कि इन सिलसिले में कोई सफलता नहीं मिल सकी। हर वर्ष आय के अनुमानों को कम करना पड़ा। आंकड़ों में भारी कटौती करनी पड़ी। कई मामलों में तो यह कटौती काफी भारी थी। कई निवेशक हताश होने लगे। कुछ ने कहा कि अब वे आय में सुधार पर तभी यकीन करेंगे जब उनको यह वाकई में नजर आएगी। भारतीय बाजार का मूल्यांकन केवल तभी तार्किक नजर आता है जब यह मान लिया जाए कि आय में सुधार और मुनाफा मार्जिन सामान्य हो जाएगा। 
 
परंतु मेरा यह मानना है कि वर्ष 2020 बीते वर्षों से अलग साबित हो सकता है। इसकी एक ठोस वजह है। आम सहमति इस बात पर है कि आय में वृद्घि 20 से 25 फीसदी के दायरे में रह सकती है। मेरा मानना है कि हम ये आंकड़े हासिल कर सकते हैं। यह एक बहुप्रतीक्षित और ताजा बदलाव होगा। वित्त वर्ष 2020 में आय वृद्घि का आधार कॉर्पोरेट बैंकों के मुनाफे में सुधार होगा। वित्त वर्ष 2020 में आय में चरणबद्घ वृद्घि का 50-60 फीसदी हिस्सा कॉर्पोरेट बैंकों के मुनाफे में सुधार से आएगा। इनमें निजी और सरकारी दोनों तरह के बैंक शामिल हैं। चूंकि ये बैंक इस वित्त वर्ष के अंत तक अपने ऋण नुकसान की पहचान और उसकी प्रोविजनिंग दोनों कर चुके होंगे तो यह कहा जा सकता है कि ऋण की लागत कम होने के कारण मुनाफे में तेजी से सुधार होगा।
 
वार्धिक ऋण अंतराल में धीमापन आने और वित्त वर्ष 2019 में अधिकांश बैंकों के कवरेज अनुपात के करीब 50-60 फीसदी होने तथा ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के जरिये फंसे हुए कर्ज के अधिकांश मामलों के निस्तारण के कारण वित्त वर्ष 2020 में मुनाफे के पथ पर वापसी हो सकती है।  एक बात जिससे भरोसा पैदा हुआ है वह यह कि मुनाफा प्राप्त करने के लिए ऋण में भारी वृद्घि अथवा शुद्घ आय मार्जिन (एनआईएम) में विस्तार की जरूरत नहीं होगी। एक तार्किक अनुमान यह है कि ऋण की लागत 300 आधार अंकों से गिरकर करीब 100 आधार अंक के अधिक सामान्य स्तर पर आ जाएगी। कॉर्पोरेट बैंकों के अलावा अन्य वित्तीय क्षेत्र भी वित्त वर्ष 2020 में चरणबद्घ मुनाफा वृद्घि का प्रदर्शन करेंगे। आईएलएफएस डिफॉल्ट के कारण वित्त वर्ष 2019 की दूसरी छमाही में इन सभी वित्तीय क्षेत्रों पर नकदी संकट के चलते बहुत बुरा असर पड़ा था। ऐसे में वित्त वर्ष 2020 में सुधार आ सकता है क्योंकि नकदी की स्थिति सामान्य हुई है। 
 
बीते कुछ महीनों में रुपये में 10 फीसदी तक की कमजोरी आई है। इस गिरावट का लाभ भी वित्त वर्ष 2020 में आय में सुधार के रूप में हमें नजर आएगा।  चालू वर्ष में हेजिंग के चलते सुधरे हुए मुनाफे का पूर्ण वास्तवीकरण नहीं हो सका और प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति में बदलाव आया। रुपये का लाभ न केवल निर्यातकों को मिलेगा बल्कि आयात के विरुद्घ प्रतिस्पर्धा कर रही कंपनियों को भी इसका फायदा मिलेगा। आईटी सेवा क्षेत्र, जेनेरिक दवा निर्यातक और विनिर्मित वस्तुओं के निर्यातकों को इससे काफी लाभ हो सकता है। आईटी सेवा कंपनियों दो अंकों से अधिक की वृद्घि हासिल हो सकती है क्योंकि डिजिटल क्षेत्र में उनकी प्रतिस्पर्धी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। दुनिया भर में आईटी क्षेत्र के व्यय में वृद्घि हो रही है और कंपनियों के मार्जिन और पूंजी आवंटन में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। हमें उम्मीद है कि व्यापक बाजार की दृष्टि से उनके मुनाफे में 10 फीसदी की वृद्घि नजर आ सकती है।
 
वित्त वर्ष 2020 में अच्छा प्रदर्शन करने वाला एक अन्य क्षेत्र वाहन क्षेत्र हो सकता है। वित्त वर्ष 2021 में उत्सर्जन मानकों में अहम बदलाव होने के चलते वाहनों की पूर्व खरीद में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। वाणिज्यिक वाहनों से लेकर डीजल कारों, उपयोगी वाहनों और दोपहिया वाहनों तक की लागत में काफी इजाफा होगा क्योंकि भारत को बीएस-6 मानक अपनाने होंगे। जाहिर सी बात है इन मानकों के लागू होने के पहले वाणिज्यिक वाहनों की खरीद में तेजी से इजाफा होगा। यह प्रवृत्ति अन्य क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकती है। अगर कारोबार के आकार में बढ़ोतरी हुई तो समूची शृंखला को लाभ होगा। इसमें मूल उपकरण निर्माताओं से लेकर कलपुर्जे बनाने वाले तक सब शामिल हैं। 
 
इसके अलावा ऐसे भी संकेत हैं कि निजी क्षेत्र के निवेश चक्र में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है क्योंकि तमाम औद्योगिक क्षेत्रों से क्षमता के बेहतर इस्तेमाल की खबरें आ रही हैं। निवेश में सुधार से मुनाफे में भी सुधार होगा। इस बात को देखते हुए अधिकांश लोगों को उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2020 में सुधार देखने को मिलेगा और अधिकांश वृहद आर्थिक चर स्थिर बने रहेंगे। दरों में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा अधिकांश खपत आधारित क्षेत्रों में मुनाफे में वृद्घि देखने को मिल सकती है। 
 
वित्त वर्ष 2020 वह वर्ष साबित हो सकता है जब आय में अनुमान के मुताबिक सुधार देखने को मिले और निवेशकों का उत्साह पुन: जागे। धीमी होती वृद्घि के इस दौर में कुछ ही बाजार ऐसे होंगे जो 20 फीसदी की वृद्घि दर दर्शाएं। अगर ऐसा हुआ तो बाजार स्थिर होंगे और सकारात्मक माहौल बनेगा। आय वृद्घि में इजाफा होने से बाजार में अस्थिरता कम होगी। प्रबंधन की गुणवत्ता और बेहतर कारोबारी गणित के साथ कई ऐसी कंपनियां भी हैं जिन्होंने बीते 5 साल के दौरान 15 से 20 फीसदी की स्थिर और निरंतर आय वृद्घि दर्शाई है। यह उस दौर में हुआ जब बाजार बमुश्किल 5 फीसदी की दर से वृद्घि हासिल कर रहा था।  उम्मीद की जानी चाहिए कि वित्त वर्ष 2020 वह वर्ष होगा जब आय में सुधार होगा। एक कठिन, अस्थिर और धीमे पड़ते वैश्विक परिदृश्य में भारत अच्छा प्रदर्शन करने वाला देश साबित हो सकता है।
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