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भारत को आसान शर्तों पर मिल सकता है ईरान का फरजाद-बी गैस क्षेत्र

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली January 08, 2019

ईरान के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि पिछले साल अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भले ही बातचीत में उतार-चढ़ाव रहा है, लेकिन ईरान का फरजाद बी गैस ब्लॉक भारत हासिल कर सकता है। इस पर बातचीत जारी है। ईरान के आर्थिक मामलों के मंत्री घोलाम रेजा अंसारी ने आज कहा, 'भारतीयों को फरजाद बी (गैस क्षेत्र) को हासिल करने का पहले मौका था और अभी भी है।' उन्होंने यह भी संकेत दिए कि जब बातचीत चल रही थी तो ईरान, भारत को आसान शर्तों पर गैस क्षेत्र देने को इच्छुक था। अंसारी का बयान ऐसे समय में आया है, जब ओएनजीसी की विदेश में निवेश करने वाली इकाई तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम विदेश लिमिटेड (ओवीएल) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि वह आवंटित निवेश की मात्रा कम कर सकती है और इस क्षेत्र मेंं पहले उत्पादित गैस लेने पर सहमति बनी है। 
 
भारत 2009 से ही गैस क्षेत्र विकसित करने के लिए ठेका हासिल करने पर नजर बनाए हुए है, लेकिन इस्लामिक देश के खिलाफ लगातार लग रहे आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। कीमतों के मसले के साथ परियोजना में निवेश की मात्रा को लेकर मतभेद बने रहे।   वहींं दूसरी तरफ  भारत के दौरे पर आए ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने आज अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को लेकर तीखे बयान दिए। उन्होंने कहा, 'चुनौतियों से पार पा लिया जाएगा, इसका तरीका निकल आएगा। आप ऐसे देश की ओर देख रहे हैं जिसने 40 साल से लागू प्रतिबंधों के बावजूद समृद्धि प्राप्त की है और प्रगति की है।' उन्होंने ईरान से भारत को और ज्यादा उर्वरक की आपूर्ति की वकालत करते हुए कहा कि प्रतिबंधों से घरेलू किसानों पर बुरा असर पड़ा है।
 
तेल के कारोबार में अनिश्चितता
 
पिछले साल नवंबर में विश्व के तीसरे बड़े तेल आयातक भारत ने अमेरिका से 6 महीने के लिए प्रतिबंधों में कुछ छूट हासिल कर ली थी। परिणाम स्वरूप भारत को सिर्फ 90 लाख बैरल ईरानी क्रूड के आयात की अनुमति मिली । अंसारी ने कहा, 'जहां तक मुझे लगता है, भारतीय यह छूट बढ़वाने की कवायद कर रहे हैं और मुझे लगता है कि हमारे बीच परंपरागत संबंधों के कारण वे छूट हासिल करने में सफल हो जाएंगे।'  वाणिज्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'भारत आने वाले अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि वे एल्युमीनियम और स्टील के आयात पर अमेरिकी शुल्क से भारत को राहत देने के इच्छुक हैं, जिसके  बदले वे पेट्रोलियम के भारत के  कारोबार में बदलाव चाहते हैं।' उन्होंने कहा कि भारत को अभी इसका जवाब देना है। 
 
इसके पहले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार भी अमेरिका के नेतृत्व में लगने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बाहर निकलने में सफल रही थी और उसने यूरो में ईरानी उत्पादकों को भुगतान किया था। लेकिन इस बार भारत को यूरोप की मुद्रा नहीं मिल रही है, क्योंकि यूरोपीय संघ के प्रमुख देश भी ट्रंप के प्रतिबंध का समर्थन कर रहे हैं। 
 
भुगतान की व्यवस्था 
 
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि भारत रुपये में तेल का भुगतान ईरान को करने पर विचार कर रहा है। पिछले वित्त वर्ष में ईरान, भारत मेंं कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश था। रुपये में भुगतान की व्यवस्था हो जाने से भारत के डॉलर में खर्च में महत्त्वपूर्ण कटौती होगी और इससे रुपये का मूल्य भी बढ़ेगा, जो लगातार लुढ़क  रहा है। 2015 में परमाणु समझौते पर ईरान और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 5 सदस्यों के हस्ताक्षर के बाद भारत के निर्यातकों ने ईरान का दौरा किया था। उन्होंने ग्राहकों व औद्योगिक बाजारों को देखा था। दशकों के प्रतिबंध के बाद ईरान के बाजार में वृद्धि की अपार संभावना देखी गई थी, जहां बड़े पैमाने पर खपत हो सकती है। 
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