बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंकिंग क्षेत्र में कुछ ही सुधार रहे मौलिक
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बैंकिंग क्षेत्र में कुछ ही सुधार रहे मौलिक

तमाल बंद्योपाध्याय /  January 07, 2019

मोदी सरकार के समय बैंकिंग क्षेत्र में हुए कुछ सुधार नाममात्र के ही हैं। मौलिक सुधार तो दिवालिया कानून और एमपीसी का गठन ही रहे हैं। बता रहे हैं तमाल बंद्योपाध्याय

 
वर्ष 2018 किसी भी लिहाज से भारतीय बैंकिंग के लिए उथल-पुथल भरा साल रहा है। इसकी शुरुआत भारतीय रिजर्व बैंक के 12 फरवरी को जारी परिपत्र से हो गई थी जिसने भारत में बैंकिंग के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया है। इस परिपत्र ने सरकार के भीतर असंतोष के बीज बोने का भी काम किया। उसके बाद वित्त मंत्रालय और आरबीआई दोनों ही विद्वेष का प्रदर्शन करते रहे जिसकी परिणति गवर्नर ऊर्जित पटेल के 'निजी कारणों से' दिए गए इस्तीफे के रूप में हुई। पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) को करीब 2 अरब डॉलर का चूना लगाने के बाद हीरा कारोबारियों नीरव मोदी और मेहुल चोकसी का विदेश भागना भी बैंकिंग क्षेत्र की एक अहम घटना रही। इन सभी घटनाओं ने भारत में ऋणग्रस्त परिसंपत्तियों की बिक्री की दिशा में हुई बेहतरीन प्रगति को ढक दिया।
 
लेकिन हम बीते साल का पुनरावलोकन करने के बजाय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुआई वाली केंद्र सरकार की तरफ से पिछले साढ़े चार साल में बैंकिंग सुधार के लिए उठाए गए कदमों पर नजर डाल सकते हैं। नीतिगत विमर्श समूह 'पहले इंडिया' फाउंडेशन ने मौजूदा सरकार की सभी नीतिगत घोषणाओं का संकलन कर उनके क्रियान्वयन एवं विस्तार के आधार पर उनकी ग्रेडिंग भी की है। हालांकि मैंने केवल बैंकिंग क्षेत्र से संबद्ध नीतिगत घोषणाओं पर ही केंद्रित किया है। 
 
1. सार्वजनिक स्वामित्व बनाए रखते हुए आम नागरिकों के हाथों शेयरों की चरणबद्ध तरीके से बिक्री कर शेयरधारिता बढ़ाकर सार्वजनिक बैंकों के लिए पूंजी जुटाई जाएगी। वर्ष 2014-15 के बजट में की गई इस घोषणा के बारे में क्या कुछ सुनाई दिया है?
 
2. वर्ष 2014-15 के बजट में सार्वजनिक बैंकों की सेहत सुधारने के लिए उनके एकीकरण की बात कही गई थी। इस दिशा में कुछ प्रगति हुई है। स्टेट बैंक के सहायक बैंकों का मूल बैंक में विलय हो चुका है लेकिन यह तो पारिवारिक मामला है। यह देखना होगा कि बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक के विलय को किस तरह अंजाम दिया जाता है?
 
3. वर्ष 2014-15 के बजट के मुताबिक, निजी क्षेत्र में सार्वभौम बैंकों को मंजूरी देने के लिए एक ढांचा खड़ा किया जाएगा। इसमें कहा गया था कि आरबीआई छोटे बैंकों और भुगतान बैंकों को लाइसेंस देने का का मसौदा तैयार करेगा। सार्वभौम बैंकिंग के लाइसेंस पर लगाम लगाकर और छोटे वित्तीय एवं भुगतान बैंकों को लाइसेंस देकर आरबीआई ने एक ऐसा ढांचा खड़ा किया है जो छोटे कारोबारियों और निम्न आय परिवारों की कर्ज संबंधी जरूरतों को पूरा करता है। इसके बावजूद वित्तीय समावेशन की राह में लंबा सफर तय करना है।
 
4. ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) को 21 दिसंबर, 2015 को लोकसभा में पेश किया गया था। मई 2016 में इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों की स्वीकृति मिली। इस कानून के तहत पहला आदेश 14 अगस्त, 2017 को सिनर्जीज-डूरे ऑटोमोटिव मामले में आया। हालांकि कर्ज समाधान में अभी कई अड़चनें हैं और अधिकांश मामलों में जरूरत से अधिक वक्त लग रहा है। लेकिन इससे इनकार नहीं कर सकते हैं कि इस आक्रामक कानून के चलते कर्ज अदायगी में चूक करने वाली कंपनियों को छिपना पड़ रहा है।
 
5. बजट 2015-16 में कहा गया था कि डाक विभाग अपना भुगतान बैंक शुरू करेगा। बहुत लोग इससे अनभिज्ञ हैं कि इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक वजूद में आ चुका है। सितंबर 2018 में इस बैंक की विधिवत शुरुआत हो गई। इसके जरिये देश भर में फैले 1.55 लाख डाकघरों और 3 लाख डाक सेवा कर्मियों के सहारे लोगों के घर तक बैंकिंग सेवाएं देने की मंशा है। देखते हैं, बात कहां तक पहुंचती है?
 
6. पांच अरब रुपये से अधिक परिसंपत्ति वाली बड़ी गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) को वित्तीय संस्थान माना जाएगा और उन्हें सरफेसी अधिनियम 2002 के दायरे में रखा जाएगा। बजट 2015-16 में की गई यह घोषणा पूरी हो चुकी है जिसके बाद एनबीएफसी छोटे कर्जों की वसूली कर सकती हैं।
 
7. सार्वजनिक बैंकों के प्रमुखों के चयन के लिए बैंक बोर्ड ब्यूरो (बीबीबी) के रूप में एक स्वायत्त निकाय बनाया जाएगा जो बैंकों को पूंजी जुटाने की रणनीति बनाने में भी मदद करेगा। बजट 2015-16 के मुताबिक बीबीबी सार्वजनिक बैंकों के लिए एक होल्डिंग एवं निवेश कंपनी बनाने की नायक समिति की सिफारिश की दिशा में बढ़ाया गया अंतरिम कदम है। हालांकि बीबीबी का गठन हुए तीन साल हो चुके हैं लेकिन यह बस नियुक्ति करने वाली गौरवशाली समिति भर है जिसके सुझाए नामों को तो कई बार वित्त मंत्रालय नकार देता है।
 
8. ढांचागत परियोजनाओं के लिए एक नई क्रेडिट रेटिंग व्यवस्था लाने का जिक्र 2016-17 के बजट में किया गया था। अधिकांश रेटिंग एजेंसियों ने 'अनुमानित नुकसान' पद्धति पर आधारित ढांचा विकसित किया है जिसमें चूक की संभावना और वसूली के अनुमान को ध्यान में रखा जाता है। सवाल है कि क्या प्रमुख क्षेत्रों में अधिक धन प्रवाह हो रहा है? 
 
9. आरबीआई अधिनियम 1934 में संशोधन कर मौद्रिक नीति मसौदा और मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के गठन का प्रावधान शामिल किया जाएगा। बजट 2016-17 में किए गए इस प्रस्ताव के बाद मुद्रास्फीति के बारे में लचीले लक्ष्य तय करने के लिए दो वर्षों से एमपीसी वजूद में आ चुकी है। मौद्रिक नीति भी केवल आरबीआई गवर्नर के हाथों में नहीं रह गई है, उसका फैसला छह-सदस्यीय पैनल करता है।
 
10. सरफेसी अधिनियम 2002 में संशोधन कर परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (एआरसी) में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की ऑटोमेटिक रूट से मंजूरी देने और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को एआरसी की तरफ से जारी होने वाली प्रतिभूति प्राप्तियों की 100 फीसदी होल्डिंग की छूट देने का प्रस्ताव 2016-17 के बजट में रखा गया था। इसे आंशिक तौर पर लागू किया जा चुका है। एआरसी अब विदेशी निवेश आकर्षित कर रहे हैं लेकिन प्रतिभूति प्राप्तियां खरीदने के पात्र निवेशकों की परिभाषा स्पष्ट नहीं है।
 
11. सार्वजनिक बैंकों एवं कंपनियों को ट्रेड रिसीवेबल्स इलेक्ट्रॉनिक डिस्काउंट सिस्टम (टीरेड्स) प्लेटफॉर्म पर लाने और उसे जीएसटी नेटवर्क से जोडऩे का प्रस्ताव 2018-19 के बजट में किया गया था। एमएसएमई के रसीदों एवं बिलों के वित्तीयकरण की सुविधा के लिए यह प्रस्ताव रखा गया था लेकिन अभी तक कई सार्वजनिक बैंक इस प्लेटफॉर्म से नहीं जुड़े हैं।
 
12. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को बाजार से पूंंजी जुटाने की मंजूरी देने का प्रस्ताव 2018-19 के बजट में किया गया था। लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई प्रगति नहीं हो पाई है।
 
इन प्रस्तावों में से कुछ तो नाममात्र के बदलाव हैं जबकि बीबीबी नई बोतल में भरी पुरानी शराब ही है। मौलिक सुधार तो दिवालिया कानून और एमपीसी का गठन ही रहे हैं। तमाम गतिरोधों के बावजूद दिवालिया कानून ने बैंकर और कर्जदार के रिश्ते को पुनर्परिभाषित किया है और एमपीसी ने मौद्रिक नीति तय करने की सूरत बदल दी है।
 
(लेखक बिज़नेस स्टैंडर्ड के सलाहकार संपादक और जन स्मॉल फाइनैंस बैंक लिमिटेड के वरिष्ठ परामर्शदाता एवं लेखक हैं) 
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA,,
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