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लडख़ड़ाती शुरुआत

संपादकीय /  January 07, 2019

सरकार की स्टार्ट अप इंडिया पहल के तहत किए गए फंड आवंटन से पता चलता है कि यह महत्त्वाकांक्षी योजना सफलता से कोसों दूर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब तीन वर्ष पहले स्टार्ट अप फंड ऑफ फंड्स की शुरुआत की थी ताकि शुरुआती उद्यमियों को सहायता प्रदान की जा सके। अब तक इस फंड में 1,900 करोड़ रुपये की प्रतिबद्घता जताई गई है जो वेंचर कैपिटल फर्मों के 10,000 करोड़ रुपये के फंड के 20 फीसदी के बराबर है। स्टार्ट अप इंडिया के फंड ऑफ फंड्स का प्रबंधन करने वाले भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) की ओर से जारी अनुमान इस बात का संकेत हैं कि सरकार उद्यमियों के लिए बेहतर माहौल सुनिश्चित कर पाने में नाकाम रही है। सरकार चाहती थी कि यह व्यवस्था रोजगार सृजन का इंजन बने। इसकी कमी मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठïान के लिए चुनौती बन चुकी है। कारोबार और राजनीति अक्सर साथ-साथ चलते हैं लेकिन स्टार्ट अप इंडिया जैसी योजनाओं की दृष्टिï और इनका लक्ष्य स्पष्टï होना चाहिए। सरकार इसमें नाकाम रही है। केवल स्टार्ट अप इंडिया के मामले में ही नहीं बल्कि मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत जैसी योजनाओं के मामले में भी सरकारी पहल कमजोर साबित हुई है। इनमें से कोई भी तमाम संभावनाओं के बावजूद सफल नहीं करार दी जा सकीं।

 
सरकार ने सिडबी के प्रबंधन में फंड ऑफ फंंड्स की स्थापना करके बेहतर किया ताकि वेंचर कैपिटल फंड्स के माध्यम से स्टार्ट अप के लिए धन आवंटन किया जाए। सरकार को नवाचार को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए था, बजाय कि केवल पैसे बांटने के। बिना नवाचार के पैसे बांटना उद्यमिता के लिए उचित नहीं। ब्रिटेन, इजरायल तथा अमेरिका जैसे अन्य स्टार्ट अप हब वाले देशों में संस्थागत मदद में शोध और नवाचार पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। अमेरिका में संघीय सरकार प्राय: कोई कारोबार शुरू करने या बढ़ाने के लिए अनुदान नहीं देती लेकिन वह तकनीकी विकास समेत सभी क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाती है। इसके अलावा कारोबारी अनुदान राज्य अथव स्थानीय पहल के माध्यम से दिया जाता है। कई प्रतिस्पर्धी पुरस्कार आधारित कार्यक्रम भी हैं जो अमेरिका में छोटे कारोबारियों को शोध एवं विकास में मदद करते हैं। इससे वाणिज्यिक अवसर तैयार होते हैं। 
 
स्टार्ट अप इंडिया पहल में इस अंतर के बावजूद देश में 100 करोड़ डॉलर से अधिक की पूंजी वाले स्टार्ट अप की बढ़ती तादाद सुखद है। इनमें से आठ को वर्ष 2018 में यह दर्जा मिला। किसी एक वर्ष में यह सबसे बड़ी वृद्घि है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट अप केंद्र है। यहां 7,700 से अधिक टेक स्टार्ट अप हैं। सवाल यह है कि क्या ये स्टार्ट अप बिना सरकार की सक्रिय सहायता के पनपी हैं या सरकार के बावजूद। यह तथ्य है कि फंडिंग में धीमापन चिंता की बात है वह भी तब जबकि नवाचार पर जरा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इतना ही नहीं केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने हाल ही में कहा है कि स्टार्ट अप को फर्म के मूल्यांकन के आधार पर ऐंजल टैक्स चुकाना होगा। इस बात ने भी इस क्षेत्र की मनोदशा पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। हालांकि सरकार ने प्रवर्तकों को आश्वस्त किया है कि विशेषज्ञ समिति इस पर विचार कर रही है। इसके अलावा सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों के कैशबैक और भारी छूट देने पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। चूंकि कई नई स्टार्ट अप इस क्षेत्र में आ सकती हैं, ऐसे में सरकार का यह संदेश उनके लिए प्रतिकूल साबित हो सकता है। अच्छी बात यह है कि सिडबी अब फंड वितरण की प्रक्रिया तेज कर रहा है। अब वक्त आ गया है कि सरकार अपनी बात पर अमल करे।
Keyword: startup india, SIDBI, narendra modi,,
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