बिजनेस स्टैंडर्ड - अब अगड़ों को भी आरक्षण
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अब अगड़ों को भी आरक्षण

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली 01 07, 2019

10 फीसदी आरक्षण

बिजनेस स्टैंडर्ड अब अगड़ों को भी आरक्षणलोकसभा चुनावों की आहट और पिछले महीने तीन राज्यों में मिली चुनावी शिकस्त से सबक लेते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने अगड़ी जातियों के 'आर्थिक रूप से कमजोर' तबकों को शिक्षा और रोजगार में 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला कर आज अपने तमाम विरोधियों को अचंभित कर दिया। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को आरक्षण देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। हालांकि इस प्रस्ताव को क्रियान्वित करने के लिए सरकार को संविधान में संशोधन करना होगा। सरकार इस विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन यानी मंगलवार को लोकसभा में पेश करने की तैयारी में है। कहा जा रहा है कि इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए सरकार संसद सत्र की अवधि बढ़ाने का भी फैसला कर सकती है। हालांकि राज्यसभा में सत्तापक्ष की संख्या कम होने से विधेयक को पारित कराना एक चुनौती होगी। 

वैसे सामान्य वर्ग के कमजोर समूहों को आरक्षण का लाभ देने की मांग लंबे समय से उठती रही है और तमाम राजनीतिक दल समय-समय पर इसका समर्थन करते रहे हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अलावा प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी भी सामान्य वर्ग के कमजोर तबकों को आरक्षण देने की बात कर चुके हैं। यह अलग बात है कि इसके पहले कभी किसी सरकार ने इस तरह का प्रस्ताव नहीं रखा और न ही उसे कानूनी समीक्षा का ही सामना करना पड़ा है। सरकार ने पहले से दिए जा रहे 49.5 फीसदी आरक्षण के अलावा यह 10 फीसदी आरक्षण देने का प्रस्ताव रखा है। फिलहाल संविधान के तहत अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी, अनुसूचित जातियों (एससी) को 15 फीसदी और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को 7.5 फीसदी आरक्षण दिया गया है। 

सूत्रों के मुताबिक विधेयक में आरक्षण का लाभ पाने के लिए कुछ शर्तें रखी जाएंगी। इनमें परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से कम होने और 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि न होने की शर्तें रखी जाने की संभावना है। इसके अलावा आरक्षण का लाभ उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनके पास अधिसूचित नगर क्षेत्र में 100 गज भूमि या 1000 वर्ग फुट से बड़ा फ्लैट न हो। वहीं गैर-अधिसूचित क्षेत्र के लिए जमीन की सीमा 200 गज तक रखी गई है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में 5.5 करोड़ परिवार ऐसे हैं जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपये से कम है। अगर इन परिवारों में औसतन चार सदस्य हैं तो इस आरक्षण के दायरे में करीब 22 करोड़ लोग आ जाएंगे।

गौरतलब है कि भाजपा को 2014 के आम चुनाव में करीब 17 करोड़ मत मिले थे। मोदी सरकार का 10 फीसदी आरक्षण देने का यह फैसला सभी धर्मों के आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए लागू होगा। हालांकि इस कदम को भाजपा के मुख्य समर्थक मानी जाने वाली हिंदू धर्म की अगड़ी जातियों के बीच पैठ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा को लगता है कि एससी-एसटी ऐक्ट के प्रावधानों को सख्त करने के लिए उठाए गए कदम ने इन अगड़ी जातियों को नाराज कर दिया है जिसका खामियाजा उसे पिछले महीने तीन राज्यों में शिकस्त के तौर पर भी चुकाना पड़ा है। 

युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देने और अयोध्या में राम मंदिर बनाने का चुनावी वादा भी पूरा नहीं कर पाने से भाजपा की चुनौतियां बढ़ी हैं। भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच चुनावी गठबंधन की संभावना से भी प्रभावित माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं और पिछले चुनाव में भाजपा ने यहां पर अकेले 71 सीटें जीतकर बहुमत की राह आसान कर ली थी। सूत्रों के मुताबिक आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं होने से संविधान संशोधन विधेयक लाना जरूरी होगा। यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन का प्रस्ताव रखेगा। संविधान के इन अनुच्छेदों में समानता संबंधी प्रावधान रखे गए हैं। 

सरकार को आरक्षण सीमा 50 फीसदी तक रखने के उच्चतम न्यायालय के पुराने फैसले से भी निपटने की राह खोजनी होगी। उच्चतम न्यायालय ने इंद्रा साहनी मामले में सुनाए अपने चर्चित फैसले में आरक्षण के लिए 50 फीसदी की अधिकतम सीमा तय कर दी थी। लेकिन सूत्रों की मानें तो प्रस्तावित संविधान संशोधन में अतिरिक्त आरक्षण कोटे का प्रावधान किया जाएगा। 
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