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मीटू पर महिला आयोग को मिलीं केवल 21 शिकायत

अमृता पिल्लै /  01 06, 2019

राष्ट्रीय महिला आयोग के सोशल मीडिया समर्थित हैशटैग मीटू आंदोलन को औपचारिक रूप देने के प्रयास के वांछित परिणाम नहीं मिले हैं। आयोग ने बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया है कि अक्टूबर से अब तक केवल 21 महिलाओं ने ही आयोग को अपनी शिकायतें दी हैं। आयोग ने 2 जनवरी को आरटीआई के जवाब में कहा कि आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार 18 अक्टूबर के बाद से अब तक ईमेल आईडी पर 21 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। 18 अक्टूबर को राष्ट्रीय महिला आयोग ने एक बयान जारी किया था कि आयोग उन महिलाओं से एनसीडब्ल्यू डॉट मीटू एट जीमेल डॉट कॉम पर अपनी औपचारिक लिखित शिकायत भेजने का आग्रह करता है जो सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर अपने कथित उत्पीड़कों के संबंध में आगे आई हैं। प्राप्त की गई इन 21 शिकायतों पर कार्रवाई के संबंध में आयोग ने आरटीआई के जवाब में कहा कि सभी शिकायतों को उचित अधिकारियों के पास ले जाया गया है।

 

वर्तमान में हैशटैग मीटू के तहत सोशल मीडिया पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर उठाई गई आवाज को लेकर कोई केंद्रीकृत सूची तैयार नहीं की जा रही है। हालांकि अकेले अक्टूबर के पहले कुछ हफ्तों में ही एक विस्तृत सूची तैयार की गई थी जिसमें ऐसी 140 से अधिक शिकायतें शामिल थीं। यह रिपोर्ट स्वैच्छिक आधार पर सोशल मीडिया पर संकलित की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय के वकील एनएस नप्पिनै बताती हैं कि पीडि़त आमतौर पर विभिन्न कारणों से अपनी शिकायतों को औपचारिक रूप देने की इच्छुक नहीं होती हैं। हालांकि यह अनुमान ही है लेकिन फिर भी पंजीकृत (महिला आयोग की ईमेल आईडी पर प्राप्त) औपचारिक शिकायतों की कम संख्या के पीछे दो कारण हो सकते हैं। एक कारण तो यह हो सकता है कि राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रक्रिया पर लोगों का ध्यान न गया हो और दूसरा कारण पीडि़ता की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज करने की इच्छा न होना हो सकता है क्योंकि कोई भी बार-बार इस यंत्रणा का अनुभव नहीं करना चाहता है। शिकायत दर्ज नहीं कराना चाहने वालों की संख्या और भी अधिक हो सकती है। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने लोकसभा को सूचित किया है कि उसकी ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली को 134 शिकायतें मिलीं। मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा है उसने सरकारी और निजी कर्मचारियों सहित महिलाओं द्वारा कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ से संबंधित शिकायतें दर्ज करने के लिए यौन उत्पीडऩ इलेक्ट्रॉनिक-बॉक्स (शी-बॉक्स) नामक एक ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली विकसित की है। इस पहल के तहत केंद्रीय मंत्रालयों से शी-बॉक्स पोर्टल पर 134 शिकायतें प्राप्त हुईं जिनमें से 40 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।

 

नप्पिनै ने यह भी कहा कि महिलाओं को आगे आने और मामलों की रिपोर्ट करने के लिए सुरक्षित वातावरण के लिए एक प्रणाली तैयार करने की दिशा में और काम करने की जरूर है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को न्याय पाने के लिए पूरी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है और इसलिए राष्ट्रीय महिला आयोग को पीडि़ताओं को त्वरित न्याय का आश्वासन देना होगा। अगर सोशल मीडिया की शिकायतें वास्तविक थीं तो किसी को भी शिकायतों की इस कम संख्या पर किसी भी तरह का सवाल नहीं उठना चाहिए।

 

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीडऩ समाप्त करने की दिशा में काम करने वाली संस्था मार्था फैरेल फाउंडेशन द्वारा दिए गए आरटीआई में पाया गया है कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडऩ (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम के भारत में केवल 191 जिलों में स्थानीय समिति का गठन किया गया। फाउंडेशन की निदेशक नंदिता भट्ट बताती हैं कि हैशटैग मीटू जैसे मंचों ने कई महिलाओं को यौन उत्पीडऩ की रिपोर्ट करने के लिए स्थान प्रदान किया है। वे सवाल करती हैं कि अगर इस दिशा में काम करने के लिए उनके कार्यस्थल पर्याप्त और संवेदनशील निवारण प्रणाली से लैस किए गए होते तो क्या ऐसे अभियान की आवश्यकता होती?
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