बिजनेस स्टैंडर्ड - स्वतंत्र निदेशकों के लिए बोर्डरूम के समीकरणों में मामूली बदलाव
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, January 21, 2019 01:52 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

स्वतंत्र निदेशकों के लिए बोर्डरूम के समीकरणों में मामूली बदलाव

सुदीप्त दे /  January 06, 2019

सत्यम में वर्ष 2009 के घोटाले से कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका ने पहली बार इतना अधिक ध्यान खींचा था। सत्यम के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों के रूप में कई बड़े नाम शामिल थे। इनमें 'पेंटीयम चिप के पिता' विनोद के धाम, इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस के तत्कालीन डीन एम राममोहन राव, आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक यू एस राजू, हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल के प्रोफेसर कृष्णा पालेपू आदि शामिल थे।  तब से लेकर अब तक जब भी कोई बड़ा घोटाला सामने आता है या कंपनी को चलाने से संबंधित कोई मुद्दा खड़ा होता है तो स्वतंत्र निदेेशकों की भूमिका जांच के घेरे में आती रही है। हालांकि सत्यम के स्वतंत्र निदेेशकों पर कोई दंडात्मक या आर्थिक चोट नहीं पड़ी, लेकिन अब कंपनी अधिनियम, 2013 और सेबी नियमनों के तहत स्वतंत्र निदेशकों पर अपने कर्तव्यों की जानबूझकर अनदेखी करने के लिए जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है। नए कंपनी कानून के प्रावधानों के मुताबिक स्वतंत्र निदेशकों की जिम्मेदारी और जवाबदेही में बड़ा बदलाव आया है। इस वजह से प्रवर्तकों और स्वतंत्र निदेशकों के बीच बोर्डरूम के समीकरण भी बदले हैं। अब स्वतंत्र निदेशकों को पहले से ज्यादा ताकतवर बनाया गया है। हालांकि इन बदलावों का बोर्डरूम के समीकरणों पर कितना असर पड़ा है, इसे लेकर भारतीय कंपनी जगत की राय अलग-अलग है। 

 
इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस में थॉमस स्मिधाइनी सेंटर फॉर फैमिली एंटरप्राइज के प्रमुख काविल रामचंद्रन का मानना है कि प्रवर्तकों और स्वतंत्र निदेशकों के बीच बोर्डरूम समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। वह कहते हैं, 'इसकी वजह यह है कि अनुपालना के स्तर पर जरूर कुछ बदलाव हुए हैं। लेकिन प्रवर्तकों के अपने बोर्डों को देखने के नजरिये या उनके स्वतंत्र निदेेशकों के चयन में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।' वह कहते हैं कि ज्यादातर मामलों में 'स्वतंत्र निदेशक' प्रवर्तक को जानने वाले लोग होते हैं।  रामचंद्रन इस बात से सहमत हैं कि नया कंपनी कानून लागू होने के बाद उन नियमों में बढ़ोतरी हुई है, जिनका पालन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा, 'हालांकि ऐसा लगता है कि अब भी ज्यादातर प्रवर्तक यह मानते हैं कि वे जब तक कानून का अक्षरश: पालन करते रहते हैं तब तक उनके पास कंपनी को अपने तरीके से चलाने का अधिकार है।' 
 
कई कंपनियों के बोर्डों में निदेशक अरुण दुग्गल का कहना है कि अब स्वतंत्र निदेशकों की कंपनी को चलाने और रणनीति में भागीदारी बढ़ रही है। दुग्गल ने कहा, 'अब बोर्डों को तरजीह मिल रही है और वे वरिष्ठ प्रबंधन के साथ चर्चा करते हैं।' एक प्रोक्सी एडवाइजरी कंपनी इस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक और प्रबंध निदेशक अमित टंडन ने कहा कि पिछले 10 वर्षों के दौरान कंपनियों और बोर्डों का कंपनी को चलाने के तरीके को लेकर नजरिया बदला है।  वह कहते हैं, 'सत्यम मामले तक कंपनी चलाने को एक तरह की अनुपालना माना जाता था। सत्यम मामले के बाद बोर्डों ने इसे जोखिम कम करने के तरीके के रूप मे देखना शुरू किया है।' टंडन का मानना है कि आज निवेशक कंपनियों में अपना दखल बढ़ा रहे हैं। वह कहते हैं कि इसके नतीजतन बोर्डरूम में निदेशकों की आवाज को बल मिल रहा है। बाकर टिल्ली डीएचसी के चेयरमैन शैलेश हरिभक्ति ने कहा, 'प्रवर्तकों पर लगाम लगाई है। प्रवर्तकों ने अनुपालना और वादे पूरे करने का मूल्य सीखा है।' हरिभक्ति का कहना है कि एक टीम के रूप में बोर्ड का विचार धीरे-धीरे आकार ले रहा है। 
 
 रामचंद्रन कहते हैं कि कंपनी को चलाने के खराब तरीके के लिए स्वतंत्र निदेशकों को जिम्मेदार बनाने का कोई तुक नहीं है। दुग्गल का मानना है कि अदालतों समेत नियामकीय और कानूनी ढांचे ने स्वतंत्र निदेेशकों पर अत्यधिक जिम्मेदारियां डाल दी हैं। वह कहते हैं, 'यह गलत है। उन्हें तभी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, जब उनके स्तर पर अनदेखी हो या उन्होंने निजी वित्तीय हितों के लिए काम किया है।' टंडन समेत बहुत से विशेषज्ञों का कहना है कि नियमनों का प्रवर्तन कमजोर बना हुआ है। इसके नतीजतन बहुत सी कंपनियां मानती हैं कि वे अब भी अनुपालना नहीं करने पर भी बची रह सकती हैं। 
Keyword: satyam, computer, raju, share, audit,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अंतरिम बजट में आयकर छूट का दायरा बढ़ा सकती है सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.