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तेजी से बढ़ा 15 राज्यों का अपने कर से राजस्व

जयजीत दास / भुवनेश्वर January 04, 2019

वित्त वर्ष 2010-11 और 2018-19 (नवंबर के अंत तक) के बीच 15 राज्यों का खुद का कर राजस्व उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की तुलना में बेहतर रहा है। समीक्षा की अवधि में राज्यों का अपना कर राजसस्व 12 प्रतिशत की दर से बढ़ा है. दिल्ली के एक गैर लाभकारी संगठन पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की वृद्धि दर सबसे ज्यादा क्रमश: 21 प्रतिशत और 25 प्रतिशत रही। इसके विपरीत जम्मू कश्मीर, गुजरात और तमिलनाडु की वृद्धि दर तुलनात्मक रूप से अपने कर राजस्व में कम रही है। 

 
खुद के कर और जीडीपी के अनुपात से खुद की अर्थव्यवस्था से राज्य के कर सृजन की क्षमता का पता चलता है। उच्च अनुपात से संकेत मिलता है कि राज्य अपनी आर्थिक गतिविधियों से कर जुटाने में ज्यादा सक्षम है। राज्यों के खुद के कर और जीएसडीपी का अनुपात 2011-12 से 2018-19 (नवंबर के अंत तक) 6.6 प्रतिशत रहा है। यह अनुपात पूर्वोत्तर राज्यों के औसत की तुलना में बहतु कम है।  सर्वे में कहा गया है कि इसमें शामिल कि ए गए 27 राज्यों में से 15  राज्यों मेंं इस दौरान अपने कर राजस्व की वृद्धि दर उस राज्य की जीएसडीपी वृद्धि दर से बेहतर रही है। अपने कर राजस्व में तेज वृद्धि दर हासिल करने वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं, जिनकी कर वृद्धि दर उनके जीएसडीपी वृद्धि की तुलना में 1.5 से 2 गुना ज्यादा है। 
 
रिपोर्ट में कहा गया है, 'वहींं दूसरी तरफ अपने कर राजस्व की वृद्धि दर जीएसडीपी के 50-75 प्रतिशत के कम स्तर पर रखने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश और त्रिपुरा हैं। मध्य प्रदेश में खुद के कर और जीएसडीपी का अनुपात 7.2 प्रतिशत है, जो औसत से ज्यादा है, वहीं त्रिपुरा का 4.2 प्रतिशत है, जो बहुत कम है।'   राज्य के अपने कर में वस्तु एवं सेवा कर से प्राप्तियां, राज्य आबकारी, स्टांप और पंजीकरण शुल्क एवं भूमि राजस्व शामिल है। इस समय जीएसटी से मिलने वाले राजस्व में केंद्र व राज्य की बराबर हिस्सेदारी होती है, जहां विक्रेताओं द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति की जातीहै। कराधान ढांचे में बदलाव की वजह से राजस्व में अपनी कर प्राप्तियों की हिस्सेदारी कुछ राज्योंं में बदली है।
Keyword: GSPD, revenue, states,,
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