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आपदा कर पर रिपोर्ट रविवार को

अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली January 04, 2019

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक रविवार को होगी, जिसमें आपदा के बाद पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाने के  उपाय पर रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। पिछले साल अगस्त  में केरल में आई बाढ़ के बाद हुए भारी नुकसान के बाद विशेष कर की जरूरत महसूस की जा रही है।  मंत्रिसमूह दो विकल्पों पर विचार करेगा। इसमें प्रभावित राज्य को राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) बढ़ाने और केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) में कोई बदलाव न करने या इस पर विचार किए बगैर कि किस राज्य में आपदा आई है, देश भर में कर लगाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाना है।
 
इस मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि पहला विकल्प ज्यादा स्वीकार्य हो सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'जैसी स्थिति लग रही है, ज्यादातर राज्य आपदा प्रभावित राज्य को एक नियत अवधि तक ज्यादा एसजीएसटी वसूलने का अधिकार देने के पक्ष में हैं।' यह रिपोर्ट रविवार को तैयार कर ली जाएगी, जिस पर 10 जनवरी को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में चर्चा होगी और आपदा कर की प्रकृति को अंतिम रूप दिया जाएगा।  इस मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि दूसरे विकल्प- देश भर में कर लगाना, संभवत: ज्यादा स्वीकार्य नहीं होगा। अधिकारी ने कहा, 'राष्ट्रीय स्तर पर कर की स्थिति में यह मसला आएगा कि इस कोष में से आवंटन कौन करेगा।' इस कर की वकालत करने वाले केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक भी जीओएम के सदस्य हैं। उनके अलावा असम, महाराष्ट्र, पंजाब, ओडिशा और उत्तराखंड के वित्त मंत्री समिति में शामिल हैं। मंत्रियों की समिति का गठन पिछले साल जीएसटी परिषद की 30वीं बैठक के बाद 28 सितंबर को की गई थी। इसकी बैठक 15 अक्टूबर को हुई, जिसमें संभावित विकल्पों पर चर्चा हुई और सभी राज्यों को प्रश्नावली भेज दी गई, जिससे उनकी प्राथमिकता के बारे में जानकारी मिल सके। 
 
तीसरा विकल्प मौजूदा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) को मजबूत करने का है।  एनडीआरएफ का इस्तेमाल राष्ट्रीय आपदा की स्थिति में धन प्राप्त करने के लिए होता है और हानिकारक सामान पर ज्यादा कर लगाकर इसकी वसूली की जाती है। एनडीआरएफ में धन आना कम हो गया, क्योंकि एनसीसीडी के एक हिस्से को जीएसटी में शामिल कर लिया गया।  राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) भी मौजूद है। लेकिन राज्यों व केंद्र ने पाया कि इसमें एकत्र धनराशि सिर्फ फौरी तौर पर राहत पहुंचाने के लिए है। केंद्र व राज्य सहमत हुए कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के मिले जुले रूप की जरूरत है, जो राजस्व के नए चैनल की जरूरत को रेखांकित करता है। 
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