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लोढ़ा ने बदली एनसीडी की शर्तें

देव चटर्जी और राघवेंद्र कामत / मुंबई January 04, 2019

मुंबई के रियल एस्टेट समूह लोढ़ा डेवलपर्स ने जुलाई, 2017 में जारी अपने गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर से जुटाई गई राशि को लौटाने की शर्तों में बदलाव किया है। समूह अपने निवेशकों को ब्याज का भुगतान उस तिथि से एक साल पहले करेगा, जिसे लेकर उसके और निवेशकों के बीच सहमति बनी थी।  नई शर्तों के मुताबिक एनसीडी में 495 करोड़ रुपये का निवेश करने वाले निवेशकों को 9.5 फीसदी ब्याज 12 महीनों की अवधि पूरी होने के बाद मिलना शुरू हो जाएगा। पहले निवेशकों को ब्याज राशि 24 महीने बाद मिलनी थी। एनसीडी के निवेशकों में एचडीएफसी प्रॉपर्टी फंड, क्लाउड इन्वेस्टमेंट्स पीटीई लिमिटेड, सुपीरियर इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और विस्तरा आईटीसीएल शामिल हैं। इन सभी निवेशकों ने नई शर्तों पर सहमति जताई है। लोढ़ा समूह ने स्टॉक एक्सचेंज को यह ब्योरा दिया है। ब्याज भुगतान में 12 महीनों की अवधि की छूट के बाद केअगले 12 महीनों में ब्याज संचय होगा और कंपनी के पास तिमाही आधार पर भुगतान करने का विकल्प है। हालांकि 24 महीनों के बाद संचित ब्याज का तिमाही आधार पर भुगतान करना होगा। 
 
लोढ़ा डेवलपर्स के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने शर्तों में बदलाव पर सहमति जताई है। वे चाहते हैं कि दो साल की समाप्ति के बजाय एक साल खत्म होने पर ही ब्याज का भुगतान शुरू कर दिया जाए। एचडीएफसी प्रॉपर्टी फंड के एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने डेवलपर को 12 महीनों के बाद ब्याज का भुगतान करने की मंजूरी दे दी है यानी स्थगन अवधि 24 महीनों से घटाकर 12 माह कर दी गई है।  एनसीडी की शर्तों में बदलाव को लेकर स्टॉक एक्सचेंज को दी सूचना में साफ किया गया है कि अगर किसी ब्याज राशि का संबंधित तिमाही में भुगतान नहीं किया जाता है तो उसका भुगतान क्लोजिंग तिथि से 24 महीने बाद किया जाएगा। लोढा के बयान में कहा गया है, 'यह साफ किया जाता है कि स्थगन तिथि से 12 महीनों के दौरान ब्याज का भुगतान नहीं होने को डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा। 24 महीनों की समाप्ति के बाद पूरा ब्याज जुड़ेगा और सभी डिबेंचरों को भुनाए जाने की तारीख तक प्रत्येक तिमाही के अंत में भुगतान होगा।'
 
इस बारे में एचडीएफसी के अधिकारियों ने कहा कि मूल समझौते के मुताबिक 24 महीनों के बाद ब्याज का भुगतान न होने को ही डिफॉल्ट माना जाएगा। एचडीएफसी प्रॉपर्टी फंड के प्रवक्ता ने कहा, 'इसलिए 24 महीनों तक ब्याज का भुगतान न होने को डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा। इसे एक्सचेंज को दी जानकारी में भी दोहराया गया है।' प्रवक्ता ने कहा कि ये एनसीडी सूचीबद्ध हैं, इसलिए ब्याज का भुगतान करने से पहले लोढ़ा डेवलपर्स के लिए स्टॉक एक्सचेंज को सूचना देना जरूरी था।  अन्य रियल एस्टेट कंपनियों की तरह लोढ़ा डेवलपर्स भी मुश्किलों का सामना कर रही है। मार्च, 2018 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान कंपनी की बिक्री इससे पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 25 फीसदी बढ़कर 9,670 करोड़ रुपये रही। लेकिन मार्च, 2018 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान कंपनी का कर्ज भी 21 फीसदी बढ़कर 23,100 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। 
 
कंपनी का नकदी भंडार बढ़ाने के लिए लोढ़ा डेवलपर्स सितंबर तक 5,000 करोड़ रुपये का आईपीओ लाने जा रही थी। लेकिन बाजार के बिगड़ते हालातों के कारण कंपनी ने आईपीओ को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अब कंपनी 5,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए लंदन की अपनी संपत्तियों और पलावा परियोजना में हिस्सेदारी बेच रही है। इससे कंपनी को अपने कर्ज को घटाकर उस स्तर पर लाने में मदद मिलेगी, जो उसके काबू में होगा। 
Keyword: real estate, property, NCD, lodha,,
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