बिजनेस स्टैंडर्ड - निर्गम में बदलाव के नए नियम
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निर्गम में बदलाव के नए नियम

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली January 04, 2019

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निर्गम आकार में बदलाव के संबंध में नए नियम जारी किए हैं। नए दिशानिर्देशों के अनुसार पूंजी बाजार से जुटाई जाने वाली रकम के आकार में बदलाव होने पर नए पेशकश दस्तावेज सौंपना अनिवार्य होगा। नए नियमों के अनुसार अगर कोई कंपनी अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम(आईपीओ) के माध्यम से जुटाई जाने वाली नई रकम की मात्रा में 20 प्रतिशत से अधिक बदलाव करती है तो उसे नए पेशकश दस्तावेज सौंपने होंगे। सेबी ने ये नियम 31 दिसंबर को जारी किए हैं। इससे पहले यह अनिवार्यता संपूर्ण निर्गम आकार- ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) और निर्गम के नए हिस्से- पर लागू थी। ओएफएस के मामले में प्रस्तावित बिक्री के लिए पेश किए गए शेयर कीसंख्या में बदलाव होने या निर्गम के अनुमानित आकार में 50 प्रतिशत से अधिक बदलाव में नए दस्तावेज सौंपने होंगे। 
 
बाजार नियामक के इस पहल पर एक विशेषज्ञ ने कहा कि इससे ओएफएस हिस्से में बदलाव होने की स्थिति में निर्गमों के प्रभावित होने का भय दूर हो जाएगा। प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा, 'बाजार नियामक की तरफ से उठाया गया यह सकरात्मक कदम है, क्योंकि प्रवर्तकों या अन्य शेयरधारकों द्वारा ओएफएस में बदलाव करने से निर्गम के मकसद या जुटाई गई रकम पर कोई असर नहीं होता है। इससे कंपनियों को मदद मिलेगी।' सेबी ने शुल्कों के साथ नए पेशकश दस्तावेज सौंपने के लिए भी नए नियम तय किए हैं। नए नियमों के अनुसार मसौदा विवरणिका सौंपने के बाद किसी तरह के जोखिम की स्थिति में कंपनी को पेशकश दस्तावेज में सुधार करना होगा। इसके अलावा प्रवर्तकों या शीर्ष 10 शेयरधारकों की हिस्सदेारी में कुल 5 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी की स्थिति में भी अलग से सूचना देनी होगी। पिछले वित्त वर्ष के आंक ड़ों के मुकाबले करोपरांत शुद्ध मुनाफे में 10 प्रतिशत से अधिक बदलाव होने और पेशकश दस्तावेज सौंपने के बाद किसी नए विवाद की स्थिति में पूरी बात बतानी होगी। इसे प्रभावी बनाने के लिए सेबी ने कैपिटल ऐंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (आईसीडीआर) दिशानिर्देशों में संशोधन किए हैं। 
 
इनके अलावा सेबी ने शुद्ध पेशकश के आवंटन में कुछ बदलाव किए हैं। सेबी ने कहा है किबुक बिल्डिंग प्रोसेस माध्यम से इतर जारी किए गए किसी निर्गम के मामले में न्यूनतम 50 प्रतिशत का आवंटन खुदरा और अन्य निवेशकों (निगमित संस्थान या संस्थान सहित) को करना होगा। इसका इस बात से कोई लेना-देना नहीं होगा कि कितनी प्रतिभूतियों के लिए आवेदन हुए हैं। ये सभी संशोधन सेबी की प्राथमिक बाजार सलाहकार समिति (पीएमएसी) और आईसीडीआर समिति की सिफारिशों का हिस्सा हैं। सेबी ने पिछले साल जून में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। सेबी ने जून, 2017 में आईसीडीआर समिति का गठन पृथ्वी हल्दिया की अध्यक्षता में किया था। इस समिति के गठन का मकसद दिशानिर्देशों की समीक्षा और मौजूदा आईसीडीआर दिशानिर्देशों में भाषा सरल बनाना था। इसके साथ ही बाजार और नियामकीय माहौल में बदलाव की हालत में नए बदलाव के हिसाब से चीजें तय करना था।  इस पूरी कवायद में 8 महीने से अधिक समय लग गया और समिति ने 150 से ऊपर बदलावों की पहचान की, जिन पर पीएमएसी में चर्चा हुई। 
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