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नई पीढ़ी के लिए महज वेतन नहीं है नौकरी का मानक

इंसानी पहलू
श्यामल मजूमदार /  January 02, 2019

वर्ष 2019 में ऐसा ही करना चाहिए। आप जिस पीढ़ी को नियुक्त करने जा रहे हैं उसके युवा सदस्य की उम्र करीब 21 साल है और वह देश के अव्वल इंजीनियरिंग, मेडिकल या प्रबंध संस्थानों से डिग्री लेकर निकला होगा। संभावना यही है कि जितनी जरूरत उसे आपकी है, उससे ज्यादा जरूरत आपको उसकी है क्योंकि आने वाले समय के अति-प्रतिस्पद्र्धी बाजार में जीतने वाला कारक प्रतिभा ही होगा। ऐसे में सवाल यह है कि आप उस युवा उम्मीदवार को अपनी कंपनी की तरफ किस तरह आकर्षित करते हैं? पुरानी दुनिया की अधिकांश कंपनियां इसी सवाल से दो-चार हो रही हैं। पिछले महीने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के कैम्पस में सैकड़ों छात्रों का साक्षात्कार लेकर लौटने वाले एक दिग्गज कंपनी के मानव संसाधन निदेशक के मुताबिक इस दौरान उन्हें यही अनुभव हुआ कि इन युवा प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए 'संपूर्ण व्यक्ति' पर तवज्जो देनी चाहिए, न कि दफ्तर के क्यूबिकल में बैठ रहे शख्स पर। उनका कहना है कि नए साल में यही उनका संकल्प होगा।

 
कार्यस्थल के कॉर्नर ऑफिस में बैठने वाले 40-50 साल की उम्र के अधिकतर लोगों को यह मानव संसाधन विभाग का एक प्रलाप भर लग सकता है लेकिन बदलते मिजाज को समझने का यही सही वक्त है। एक्स या जेड या नई सदी की पीढ़ी से ताल्लुक रखने वाले युवाओं के सामने रोजगार अवसरों की पसंद की अधिकता है। उनमें से कई लोगों के लिए एक नौकरी महज वेतन तक ही सीमित न होकर एक जीवनशैली है। वे पैसे से ज्यादा भावनात्मक पुरस्कार को अधिक तवज्जो देते हैं। मानव संसाधन प्रमुख कहते हैं कि ये युवा अपने काम को लेकर बढिय़ा अहसास करना चाहते हैं और ऐसी कंपनी के लिए काम करना चाहते हैं जिसका समाज पर भी एक असर हो। हालिया साक्षात्कारों के दौरान उम्मीदवारों ने सबसे समान सवाल यही पूछा था कि उनकी कंपनी किस तरह समाज को लौटाने की योजना बना रही है?
 
कानूनी रूप से अनिवार्य कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) का फंड इसके लिए काफी नहीं है। एचआर प्रमुख इन उम्मीदवारों की मांग के अनुरूप अब अपने स्टाफ को चैरिटी कार्यों के लिए वेतन-सहित छुट्टïी की पेशकश करने की सोच रहे हैं। वैसे भारतीय कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों से सबक ले सकती हैं। यह दिग्गज आईटी कंपनी अपने कर्मचारियों को खर्चीली सुविधाओं के अलावा हरेक कैलेंडर साल में एक तय रकम भी देती है जिसका चैरिटी अनुदान कर्मचारी कर सकते हैं। प्रीमियम कंपनी के साथ जुडऩा पसंद करने वाले युवाओं के लिए यह एक बढिय़ा आकर्षण है। 
 
ईवाई की तरफ से किए गए एक सर्वे में कुछ अहम बिंदुओं का भी जिक्र है। जेन जेड के लिए शीर्ष कारक हैं: मेरे साथ सम्मान से बरताव करें, नैतिकतापूर्ण आचरण करें और खुले एवं पारदर्शी तरीके से बात करें। जेन जेड की महिलाएं अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में समावेशन को एक महत्त्वपूर्ण कारक मानती हैं। यह दिलचस्प है कि जब जेन जेड के युवाओं से जानने की कोशिश की गई कि वे अपने पूर्णकालिक रोजगार के बारे में कोई भी फैसला करते समय किस पर भरोसा करेंगे तो उन्होंने अपनी मां को सबसे भरोसेमंद बताया। असल में, माताएं जेन जेड के करियर संबंधी निर्णयों को प्रभावित करने वाले पांच प्रमुख लोगों में से एक हैं। यह स्थिति भारत समेत उन सभी आठ देशों में है जहां पर यह सर्वे किया गया। 
 
कंपनियों को यह भी दर्शाना होगा कि वे अपने कर्मचारियों के भविष्य को लेकर फिक्रमंद हैं ताकि वे अपने नियोक्ताओं के व्यवसाय में बने रहने के लिए प्रेरित हों। ऐसा होने की वजह यह है कि खुद का स्टार्टअप खड़ा करने में यकीन करने वाले युवाओं की यह पीढ़ी आजादी और पसंद को तरजीह देती है। वे अपनी नौकरी के बारे में फैसला करते समय वेतन के तौर पर मिलने वाले चेक से आगे भी देख रहे हैं। नया सीखने और आगे बढऩे का मौका उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। युवा कर्मचारियों की पसंद में सबसे ऊपर रहने वाली लगभग सभी कंपनियां उन्हें ऐसा ही मौका दे रही हैं, चाहे वह शिक्षा में मदद या शिक्षा ऋण में कटौती की शक्ल में ही क्यों न हो? कर्मचारियों को काम के लचीले हालात या स्वास्थ्य एवं परिवार से जुड़ी प्राथमिकताओं को पूरा करने में सहयोग देना भी एक तरीका है।
 
आज के समय में दूर रहते हुए भी काम करना एक सामान्य बात हो चुकी है। कई कर्मचारी खुद को हमेशा सक्रिय स्थिति में रखते हैं और ईमेल या फोन के जरिये अपने काम से लगातार संपर्क में बने रहते हैं। ऐसे में काम एवं जिंदगी के बीच संतुलन साधने की संस्कृति और नमनीयता पुरानी बात हो चली है। असल में, घर से काम करना भी अब पुराना हो चला है, कई कंपनियां तो अपने कर्मचारियों को अपना काम पूरा हो जाने की शर्त पर असीमित भुगतान-सहित विश्राम की पेशकश भी कर रही हैं। सिस्को जैसी कंपनियों में सम्मानित करने की संस्कृति भी है जहां बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को नकद सम्मान दिया जाता है।
 
लेकिन इन बिंदुओं को देखते हुए गलत अंदाजा मत लगा लीजिएगा। ऐसा नहीं है कि युवा कर्मचारियों के लिए पैसा कम अहमियत रखता है। यह अब भी नियुक्ति से पहले होने वाली बातचीत का सबसे अहम जरिया होता है। लिहाजा जब भी आपको कोई प्रतिभाशाली युवा मिले तो उसे बाजार मूल्य के अनुरूप वेतन की पेशकश करना अनिवार्य है क्योंकि कोई भी खुद को कमतर नहीं महसूस करना चाहता है। मामला बस यह है कि वेतन महज शुरुआती बिंदु है।
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