बिजनेस स्टैंडर्ड - 2018-19 में चालू खाते का घाटा पहले के अनुमान से कम रहने की उम्मीद
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2018-19 में चालू खाते का घाटा पहले के अनुमान से कम रहने की उम्मीद

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 01 01, 2019

बन रहा है आशावादी परिदृश्य

तेल के दाम में गिरावट की वजह से सरकार ने सीएडी का आंतरिक अनुमान कम करके जीडीपी का 2 से 2.2 प्रतिशत किया

इसके पहले यह जीडीपी का 2.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था 

बहरहाल रेटिंग एजेंसियों व रिसर्च फर्मों का कहना है कि वित्त वर्ष 2019 में सीएडी, 2017-18 के 1.9 प्रतिशत की तुलना में बहुत ज्यादा होगा

तेल के दाम अक्टूबर के 85 डॉलर प्रति बैरल से घटकर अब 50 डॉलर के नीचे

बिजनेस स्टैंडर्ड 2018-19 में चालू खाते का घाटा पहले के अनुमान से कम रहने की उम्मीदकच्चे तेल के वैश्विक दाम 86 डॉलर के पार पहुंचने के महज कुछ महीने के बाद गिरकर 50 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को अब विश्वास है कि वित्त वर्ष 2018-19 (वित्त वर्ष 19) में चालू खाता घाटा (सीएडी) सकल घरेलू उत्पाद के 2 प्रतिशत के आसपास रह सकता है। इसके पहले सरकार ने अनुमान लगाया था कि सीएडी सकल घरेलू उत्पाद का 2.8 प्रतिशत हो सकता है। यह दोनों आंतरिक अनुमान है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'जब तेल के दाम उच्च स्तर पर थे तो ऐसा लगता था कि सीएडी वित्त वर्ष 19 में जीडीपी के 2.8 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। अब कच्चे तेल में गिरावट है, जिसकी वजह से मौजूदा अनुमान से लगता है कि यह जीडीपी के 2 से 2.2 प्रतिशत के आसपास रहेगा। अगर तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो यह 2 प्रतिशत के नीचे भी जा सकता है।'

अधिकारी ने कहा, 'एक समय कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं। इसके साथ ही अन्य व्यवधान भी थे। अमेरिका का फेडरल रिजर्व दरें बढ़ा रहा था। हमारे क्रेडिट मार्केट में भी समस्याएं थीं। अब इन तीनों मोर्चों पर अच्छी खबर है और दबाव बहुत कम हुआ है।' वहीं रेटिंग एजेंसियों और रिसर्च फर्मों ने कहा है कि वित्त वर्ष 18 में सीएडी 2017-18 की तुलना में बहुत ज्यादा रहेगा, जो जीडीपी का 1.9 प्रतिशत था।  मूडीज ने अगस्त में कहा था कि भारत का सीएडी चालू वित्त वर्ष में जीडीपी का 2.5 प्रतिशत रहेगा क्योंकि तेल की कीमतें ज्यादा हैं और रुपये के दाम में गिरावट आ रही है। 

अब कच्चा तेल जुलाई 2017 के बाद के न्यूनतम सस्तर पर है और ब्रेंट क्रूड घटकर 50 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है। अमेरिकी आपूर्ति को लेकर चिंता और बाजार में उतार चढ़ाव के बीच यह संकेत मिल रहे हैं कि तेल उत्पादक देश उत्पादन में कटौती बढ़ा सकते हैं। अक्टूबर में तेल का दाम 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अब कीमतों में 40 प्रतिशत की कमी आई है। ब्रेंट का दाम 3 अक्टूबर को 86.29 डॉलर प्रति बैरल था।  

एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, 'मुझे लगता है कि साल की पहली छमाही में सीएडी औसतन 2.8 प्रतिशत रहेगा। अक्टूबर मार्च अवधि के दौरान तेल के दाम में गिरावट की वजह से यह नीचे आ सकता है। ऐसे में यह माना जा सकता है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में यह 1.5 प्रतिशत रह सकता है। ऐसे में पूरे साल का सीएडी औसतर 2 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा हो सकता है। सरकार अपने आकलन में यथार्थवादी है।'  

आल इंडिया रेडियो के समाचार सेवा प्रभाग के लिए बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ साक्षात्कार में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा था कि तेल के दाम की वजह से हुई समस्या अब नहीं है। जेटली ने कहा था, 'दो महीने पहले हम कह सकते थे कि बड़ी समस्या तेल की कीमतें हैं। फिलहाल अब ऐसा नहीं है। इसका असर हमारे सीएडी पर पड़ेगा। अभी भी सीएडी है, लेकिन अब यह उतनी चिंता की बात नहीं है, जितनी 2 महीने पहले था।' 

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