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आईएलऐंडएफएस के अंकेक्षकों को अस्थायी राहत

सुब्रत पांडा / मुंबई January 01, 2019

नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के मुंबई पीठ ने सोमवार को आईएलऐंडएफएस व इसकी दो सहायकों के खाते की जांच करने वाले अंकेक्षकों को राहत प्रदान की। एनसीएलटी पीठ ने पाया कि इन खातों को तैयार करने में इनकी कोई भूमिका नहीं थी। उनका काम खाते का अंकेक्षण करना था, जिसे प्रबंधन ने तैयार किया था। हालांकि अंतरिम आदेश का अंकेक्षकों के खिलाफ भारतीय सनदी लेखा संस्थान (आईसीएआई) की तरफ से हो रही जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अदालत ने कहा, इस समय जब आईसीएआई की जांच लंबित है, इस पर कोई राय नहीं बनाई जा सकती कि खाते धोखाधड़ी का इस्तेमाल करके तैयार किए गए थे।
 
इसके अतिरिक्त एनसीएलटी ने कहा कि अंकेक्षक खाता-बही तैयार नहीं करते। उनकी भूमिका कंपनी की तरफ से तैयार खाते-बही की जांच करने में होती है। एनसीएलटी ने इसके अलावा आईएलऐंडएफएस की दो सहायकों आईएलऐंडएफएस फाइनैंशियल सर्विसेज और आईएलऐंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवक्र्स के पिछले पांच साल के खाते दोबारा खोलने की अनुमति दे दी। आईएलऐंडएफएस समूह के खाते-बही की जांच करने वाले अंकेक्षकों में डेलॉयट हस्किंस ऐंड सेल्स, बीएसआर ऐंड एसोसिएट्स, एस आर बॉटलीबॉय शामिल हैं।
 
दिसंबर में सरकार ने कंपनी अधिनियम की धारा 130 के तहत वित्तीय खाते दोबारा खोलने की अनुमति एनसीएलटी से मांगी थी। यह अनुमति आईसीएआई और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय के प्रथम दृष्टया नतीजे के आधार पर मांगी गई थी। ये नतीजे उन अंकेक्षकों की भूमिका पर सवाल उठाता है, जिन्होंने आईएलऐंडएफएस व उसकी दो सहायकों के खाते-बही की जांच की थी और कहा गया है कि अंकेक्षकों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक से नहीं किया। एनसीएलटी पीठ ने कहा कि अगर इन खातों को दोबारा तैयार किया गया है तो फिर इससे अंकेक्षकों को मदद मिलेगी।
Keyword: IL&FS, fund, share, LIC, sidbi, इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंस सर्विसेज,
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