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नई कर प्रणाली में मुनाफे की गणना के दिशानिर्देश न होने से उद्योग जगत को समस्या

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली December 31, 2018

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत मुनाफे की गणना करने के दिशानिर्देश न होने  को लेकर उद्योग जगत का भय सामने आ रहा है। रियल एस्टेट डेवलपर पिरामिड इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इस मसले पर राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण (एनएनए) को न्यायालय में घसीटा है। वहीं हिंदुस्तान यूनिलीवर भी याचिका दायर करने की योजना बना रही है। यह मसला जीएसटी की दरों में कटौती या इनपुट टैक्स क्रेडिट के लाभ मिलने पर केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम 2017 के मुताबिक कीमतों में 'इसके अनुरूप' कमी करने की व्याख्या से जुड़ा हुआ है। यह धारा मुनाफाखोरी रोधी कदमों से जुड़ी है। 
 
खेतान ऐंंड कंपनी में पार्टनर और दिल्ली उच्च न्यायालय में पिरामिड इन्फ्राटेक के वकील अभिषेक रस्तोगी ने कहा, 'यह संभव है कि कीमतों में अनुरूप कमी कर की दरों में की गई कुल कमी  या क्रेडिट बढ़ाने के अनुरूप न हो।' सीजीएसटी ऐक्ट के नियम 126 में कहा गया है कि प्राधिकरण सि सिलसिले में तरीका और प्रक्रिया का निर्धारण कर सकता है। पिछले साल उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने जीएसटी परिषद से संपर्क साधा था और मुनाफे की गणना के मानक तय किए जाने की मांग की थी। बहरहाल उनसे कहा गया था कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न खंडों और क्षेत्रों में मामूली अंतर को देखते हुुए इस तरह के मानक लाना कठिन होगा। 
 
इसके बारे में प्रतिनिधियों ने परिषद से कहा था कि शुल्क आयोग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों और खंडों के आधार पर मानक बनाया जाना चाहिए। एक विशेषज्ञ ने कहा, 'आपने कोई मानक नहींं तय किया है और आप कह रहे हैं कि यह या वह कंपनी मानकों का उल्लंघन कर रही है। यह विडंबना है।' रोजमर्रा के इस्तेमाल के सामान (एफएमसीजी) बनाने वाली दिग्गज कंपनी एचयूएल ने उपभोक्ता कल्याण निधि में 160 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं, जो उसकी गणना के मुताबिक सामने आया है। लेकिन प्राधिकरण ने कहा कि कंपनी का मुनाफा 535 करोड़ रुपये हैं और कमी किए जाने के बाद यह राशि 383 होती है, जिसमें ग्रामेज शामिल है। कंपनी के खिलाफ आरोप यह है कि 15 नवंबर 2017 से प्रभावी जीएसटी दरों में कटौती के बाद कंपनी ने अधिकतम खुदरा मूल्य में कमी नहीं की। दरअसल यह आरोप लगाया गया कि कंपनी ने उत्पादों का आधार मूल्य बढ़ा दिया, जिसकी वजह से अधिकतम खुदरा मूल्य पूर्ववत बना रहा। 
 
एक विशेषज्ञ ने कहा कि हाल में जीएसटी दरों में कटौती किए जाने के बाद बाद कच्चे तेल के दाम बढ़े, जबकि रुपये में गिरावट आई। एचयूएल द्वारा विनिर्मित शैंपू, बॉडी वाश, साबुन में पेट्रोलियम डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनी ने विदेश से इन डेरिवेटिव्स की खरीद की, जिसके दाम में तेज बढ़ोतरी हुई थी। अगर कंपनी ने एमआरपी में कटौती नहींं की है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे मुनाफा मिल रहा है। उनका तर्क है कि इसके लिए इनपुट लागत भी देखनी होगी। 
 
ईवाई में पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा, 'मुनाफाखोरी रोधी प्रावधानों के तहत लाभ की गणना करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश न होने की वजह से उद्योगों ने वह तरीका अख्तियार किया, जो उन्हें सही और तार्किक लगा। कुछ मसले पर एनएए ने उद्योग के विचारों से अलग विचार अपनाया है, जिसकी वजह से उद्योगों की चिंता बढ़ी है।' पहली बार एनएए ने ग्राहकों को फायदा पहुंचाने के लिए ग्राम में मात्रा बढ़ाए जाने पर विचार किया। पहले के मामलों में उसने इसकी अनुमति नहींं दी थी। बहरहाल किसी खास आकार में ग्राम के हिसाब से मात्रा में किसी बढ़ोतरी की तुलना मुनाफे की राशि से की जा सकती है, लेकिन अन्य आकारों के मामले में विचार नहींं किया जा सकता, जहां वजन में बढ़ोतरी नहीं की गई हो। 
 
डेलॉयट में पार्टनर एमएस मणि ने कहा, 'मुनाफाखोरी के नियमन के लिए कुछ सिद्धांत हाल के फैसलों में पहली बार तय किए गए हैं। अगर यह सिद्धांत जीएसटी लागू होने के समय घोषित किए गए होते तो उद्योगों को इसका अनुपालन करना आसान होता।'  पिरामिड इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में एनएए ने मुनाफे की राशि की गणना कंपनी के  कर योग्य टर्नओवर, जिस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट दिया जाता है, के मुताबिक की। यह मामला हरियाणा में सस्ते मकान की योजना के तहत फ्लैटों के निर्माण से जुड़ा हुआ है। 
 
प्राधिकरण ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह खरीदारों की अंतिम किस्त में 2,476 खरीदारों का 8.22 अरब रुपये वापस करे या घटाए। एनएनए ने कहा है कि खरीदारों को 18 प्रतिशत सालाना ब्याज का भी भुगतान किया जाए। कंपनी के वकील रस्तोगी ने इस राशि का विरोध किया है, जिन्होंने कहा कि यह परियोजना निर्माण से नहीं बल्कि समय  से जुड़ी है। 
Keyword: tax, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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