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बैंकों ने ज्यादा दी उधारी

सुब्रत पंडा / मुंबई December 31, 2018

सरकार की तरफ से बैंकों के पुनर्पुंजीकरण के बाद उधार दिए जाने में बैंकिंग क्षेत्र का हिस्सा वित्त वर्ष 2018 में तेजी से बढ़ा, लेकिन वित्त वर्ष 2019 में नवंबर मध्य तक उधारी में देसी बैंकों का सापेक्षित अनुपात और गैर-बैंक संसाधनों का अनुपात करीब-करीब एक जैसा हो गया। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट से मिली। रिपोर्ट में कहा गया है, इसके अतिरिक्त देश के गैर-बैंक संसाधनों से उधारी के प्रवाह के मामले में हाउसिंग फाइनैंंस कंपनियोंं की तरफ से दी गई उधारी का हिस्सा कुल उधारी चार साल में करीब दोगुना हो गया। यानी यह 2014 के 6.2 फीसदी के मुकाबले वित्त वर्ष 2018 में बढ़कर 11.7 फीसदी पर पहुंच गया। वाणिज्यिक क्षेत्रों को दी गई कुल उधारी में विदेशी संसाधनों की हिस्सेदारी 16 से 19 फीसदी के दायरे में रही और योगदान के लिहाज से इसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का वर्चस्व रहा।
 
हालांकि वित्तीय व्यवस्था में परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां (म्युचुअल फंड) फंडों की सबसे बड़ी प्रदाता बन गई और सितंबर 2018 में इनकी तरफ से सकल प्राप्तियां 8.34 लाख करोड़ रुपये रही। इसके बाद बीमा कंपनियों का स्थान रहा, जिनकी तरफ से सकल प्राप्तियां 5.09 लाख करोड़ रुपये रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि एएमसी-एमएफ से अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों, एनबीएफसी और एचएफसी को सबसे ज्यादा फंड मिले। दूसरी ओर वित्तीय व्यवस्था में एनबीएफसी रकम की शुद्ध देनदार रही और इनकी तरफ से होने वाला सकल भुगतान 7.45 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि सकल प्राप्तियां 56,000 करोड़ रुपये। ये आंकड़े सितंबर 2018 की समाप्ति के हैं।
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि सकल भुगतान से संकेत मिलता है कि सबसे ज्यादा फंड अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों से मिले, जिसके बाद एएमसी-एमएफ और बीमा कंपनियों का स्थान रहा। अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों की हिस्सेदारी पिछली कुछ तिमाहियों से बढ़ती दिख रही है। इसके अतिरिक्त हाउसिंग फाइनैंस कंपनियां वित्तीय व्यवस्था से ज्यादा उधार लेने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी रही और इनकी तरफ से सकल भुगतान करीब 5.68 लाख करोड़ रुपये होना है जबकि सकल प्राप्तियां सितंबर के आखिर में 41,200 करोड़ रुपये थी। एनबीएफसी व एचएफसी के मामले में लंबी अवधि का कर्ज, वाणिज्यिक प्रतिभूतियां आदि प्रमुख प्रतिभूतियां रही, जिसके जरिए इन्होंने वित्तीय बाजार से रकम जुटाई।
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA,,
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