बिजनेस स्टैंडर्ड - खंडित जनादेश बड़ा जोखिम
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खंडित जनादेश बड़ा जोखिम

बीएस संवाददाता / मुंबई 12 31, 2018

मुख्य कार्याधिकारियों का नजरिया

बिजनेस स्टैंडर्ड खंडित जनादेश बड़ा जोखिमवर्ष 2019 में आम चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। इस चुनाव में सत्ताधारी भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का भविष्य तय होगा। इन तमाम आशंकाओं और संभावनाओं के बीच ज्यादातर मुख्य कार्याधिकारियों (सीईओ) की नजरों में चुनाव में खंडित जनादेश भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा जोखिम हो सकता है। देश भर के 40 सीईओ से की गई बातचीत में 60 प्रतिशत ने कहा कि व्यापार युद्ध, तेल कीमतों में अनिश्चितता और महंगाई के जोखिम के मुकाबले लोकसभा चुनाव में खंडित जनादेश सबसे ज्यादा कठिनाइयां पैदा कर सकता है। 

हालांकि अच्छी बात यह है कि जितने सीईओ से बात की गई, उनमें 75 प्रतिशत ने कहा कि वह नए साल में अधिक निवेश पर जोर देंगे। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी मुहर लगाई। 70 प्रतिशत सीईओ का मानना था कि सरकार ने अर्थव्यवस्था का प्रबंधन अच्छे तरीके से किया है। करीब 43 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है, जिससे उन्हें निवेश योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।  जेके टायर ऐंड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रघुपति सिंघानिया ने कहा, 'अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि बैंक खातोंं, रसोई गैस आपूर्ति, बिजली, बीमा और स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से लोगों के जीवन में सुधार करना था। हालांकि  अर्थव्यवस्था का कुप्रबंधन और राजकोषीय घाटा बढ़ाकर बड़े पैमाने पर रकम वितरित करना सबसे जरूरी मुद्दा रहा है।'

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार के बीच संबंधों में आई दरार भारतीय कंपनी जगत के लिए चिंता का दूसरा कारण रहा। सर्वेक्षण में 75 प्रतिशत से अधिक सीईओ ने कहा कि ऊर्जित पटेल के कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने और पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को सेवा विस्तार नहीं दिए जाने से दोनों पक्षों के बीच संबंध और खराब हो गए। आरबीआई के पास संरक्षित भंडार का एक हिस्सा लेने की सरकार की पहल से संबंध और निचले स्तर पर गए, लेकिन सीईओ को लगता है कि विमल जालान समिति इस मुद्दे का एक बेहतर समाधान खोजेगी। 

बिजनेस स्टैंडर्ड खंडित जनादेश बड़ा जोखिमसरकार की विफलताओं पर पूछे गए सवाल पर सीईओ की नजरों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अंदरूनी खींचतान, जनवरी 2018 में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठï न्यायाधीशों द्वारा संवाददाता सम्मेलन बुलाना और आरबीआई की स्वायत्तता से जुड़ी चिंताएं बड़ी विफलताएं रहीं।  यह पूछे जाने पर कि क्या देश में अधिक से अधिक कर वसूली को लेकर सरकार की सक्रियता बढ़ी है तो 40 प्रतिशत सीईओ ने हां में जवाब दिए, जबकि 15 प्रतिशत ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सीईओ ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को एक बड़ा सुधार बताया और इसकी तारीफ की। हालांकि उन्होंने बताया कि इसका क्रियान्वयन और बेहतर तरीके से किया जा सकता था। 

एक बड़ी वित्त कंपनी के सीईओ ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया, 'बुनियादी ढांचे का विकास और इंसपेक्टर राज का खात्मा अगली सरकार की शीर्ष प्राथमिकताएं होनी चाहिए।' सीईओ की नजरों में रोजगार सृजन नई सरकार की दूसरी प्रमुख प्राथमिकता होनी चाहिए। एक बड़ी परिसंपत्ति पुनर्संरचना कंपनी के प्रमुख ने कहा, 'नई सरकारी को विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना चाहिए। इसके अलावा बिजली क्षेत्र की समस्याओं का समाधान, ऋण आवंटन के लिए उचित माहौल तैयार करना और सरकारी बैंकों की मजबूती पर ध्यान दिया जाना भी जारी रहना चाहिए।' 

सेंसेक्स का दायरा

2019 के अंत में बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स के स्तर के बारे में पूछे जाने पर ज्यादातर सीईओ ने इसके 40,000 के नीचे रहने की बात कही। यह अलग बात है कि 2018 में भारत एशिया के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल रहा और ब्राजील के बाद दूसरा श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला वैश्विक बाजार था। पिछले साल सेंसेक्स में करीब 6 प्रतिशत तेजी आई और साल के अंतिम कारोबारी दिन यह 36,068 पर बंद हुआ। 

कहां रहेगा रुपया

अमेरिका मुद्रा डॉलर के मुकाबले रुपये के प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर 67.5 प्रतिशत सीईओ ने कहा कि रुपया 70 से 75 के दायरे में रहेगा, जबकि 20 प्रतिशत का मानना था कि यह 75 का स्तर पार कर जाएगा। आधे से अधिक सीईओ ने ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) को सफल बताया। एक बड़ी कंपनी के सीईओ ने कहा, 'इसमें कोई शक नहीं कि आईबीसी की मंशा ठीक थी, लेकिन कई बार कानूनों में संशोधनों से उलझन की स्थिति पैदा हो गई।'
Keyword: election, BJP, congress,,
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