बिजनेस स्टैंडर्ड - आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग जल्द
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आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग जल्द

राजेश भयानी / मुंबई 12 30, 2018

बिना पंजीकरण वाले जौहरियों को दी चेतावनी
हॉलमार्क वाले गहने बेचने के प्रति किया आगाह

14,18 और 22 कैरट में हो सकती है अनिवार्य 

बिजनेस स्टैंडर्ड आभूषणों की अनिवार्य  हॉलमार्किंग जल्दसरकार गहनों पर हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रही है। जल्दी ही इसकी घोषणा हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक 14, 18 और 22 कैरट तीन श्रेणियों में हॉलमार्किंग की अनुमति दी जाएगी। सरकार साथ ही हॉलमार्क वाले हर गहने के लिए विशेष पहचान संख्या देने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है। जून में सरकार ने सोने और चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग के लिए नियम जारी किए थे। अलबत्ता इस बारे में फैसला अभी लंबित है। यह विषय उपभोक्ता मंत्रालय के तहत आता है लेकिन कानून के मुताबिक सरकार को यह फैसला करना है कि यह कब से अनिवार्य होगा और अब इस बारे में चीजें स्पष्ट हो गई हैं।

अभी बड़े शहरों में हॉलमार्किंग जोर पकड़ रही है लेकिन सभी जौहरी हॉलमार्किंग के बिना भी गहनों को बेच सकते हैं। अलबत्ता, शहरों और ग्रामीण इलाकों में कई छोटे जौहरी हॉलमार्क वाले गहनों के साथ-साथ बिना हॉलमार्क वाले गहने भी रखते हैं। वे ग्राहकों को लुभाने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का साइन बोर्ड लगाकर भी रखते हैं जबकि उनके पास इसका पंजीकरण नहीं होता है।

बीआईएस ने ऐसे जौहरियों को कड़ी चेतावनी देते हुए शुक्रवार को एक नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया है कि बीआईएस कानून, 2016 और बीआईएस नियमन, 2018 से केंद्र सरकार को बीआईएस हॉलमार्किंग अनिवार्य बनाने का अधिकार मिला है। ब्यूरो ने कहा कि केवल वैध लाइसेंस और प्रमाणित जौहरी की हॉलमार्क वाले सोने के गहने रख सकते हैं या अपनी दुकान का विज्ञापन कर सकते हैं।

जिन जौहरियों के पास पंजीकरण का वैध प्रमाण नहीं होगा, बीआईएस उनके यहां छापा मारकर फर्जी हॉलमार्क वाले सोने के गहने जब्त कर सकता है। बीआईएस की चेतावनी यह संकेत है कि ब्यूरो के लोगो का इस्तेमाल करना और बिना पंजीकरण वाले जौहरियों का हॉलमार्क वाले गहने रखना अपराध की तरह देखा जा रहा है। बीआईएस के नोटिस में कहा गया है कि बिना लाइसेंस वाले जौहरियों को तुरंत गहनों, डिस्प्ले बोर्ड या पैकिंग सामग्री पर बीआईएस हॉलमार्क के लोगो का दुरुपयोग बंद करना होगा। इसे अनिवार्य बनाए जाने से पहले यह चेतावनी आई है। 

आईआईएम-अहमदाबाद द्वारा स्थापित इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर के प्रमुख सुधीश नाम्बियथ ने कहा कि यह उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाने का स्मार्ट तरीका है। अगर किसी वजह से हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने में देरी होती है तो बीआईएस की चेतावनी से जागरूकता पैदा होगी। हॉलमार्क वाले हर गहने का अलग बिल बनेगा जिसमें उसका विस्तृत ब्योरा, कीमती धातु का शुद्घ वजन, कैरट में शुद्घता और फिटनेस तथा हॉलमार्किंग शुल्क की जानकारी होगी। इंडियन एसोसिएशन ऑफ हॉलमार्किंग सेंटर्स के अध्यक्ष हर्षद अजमेरा ने कहा कि सरकार जब भी हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने का फैसला करेगी, हॉलमार्किंग केंद्र किसी भी अतिरिक्त बोझ से निपटने के लिए तैयार हैं। अभी देश में 750 हॉलमार्किंग और एसेंइंग सेंटर हैं जबकि 100 और खुलने जा रहे हैं। 

2017-18 में कुल 4.15 लाख गहनों को हॉलमार्क किया गया था जिनका वजन 500 टन था। भारत में हर साल 1200 टन सोने के गहने बनाए जाते हैं जिनमें पुराने गहनों से बने नए गहने शामिल हैं। अजमेरा ने कहा कि हॉलमार्किंग केंद्रों में उनकी क्षमता का केवल 10-20 फीसदी ही इस्तेमाल हो रहा है जिससे यह कारोबार उनके लिए मुफीद नहीं रह गया है। अलबत्ता इसने छोटे जौहरियों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब उन्हें ज्वैलरी के बड़े रिटेल शोरूम से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है।

इंडियन बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि सरकार इसे अनिवार्य बनाने से पहले हमें 14, 18 और 22 कैरट के अलावा दूसरी श्रेणियों के सोने के गहनों को ठिकाने लगाने के लिए कम से कम छह महीने का समय देगी। हम उम्मीद करते हैं कि हॉलमार्किंग को चरणबद्घ तरीके से अनिवार्य बनाया जाएगा। इसकी शुरुआत महानगरों से होगी जहां हॉलमार्किंग केंद्र हैं। हम चाहते हैं कि 20 और 24 कैरट को भी अनिवार्य हॉलमार्किंग श्रेणी में शामिल किया जाए।'

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