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फायदे का फैसला है 'कार अनेक, पॉलिसी एक'

संजय कुमार सिंह और तिनेश भसीन /  December 30, 2018

भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने हाल ही में अनिवार्य व्यक्तिगत दुर्घटना (सीपीए) बीमा को अलग करने का जो फैसला किया है, वह उच्च मध्य वर्ग और धनी वर्ग के लिए वाकई खुशी का पैगाम है। 1 जनवरी, 2019 से वाहन मालिकों को अलग से सीपीए बीमा खरीदने का मौका मिल जाएगा। सीपीए बीमा थर्ड पार्टी लायबिलिटी बीमा और कॉम्प्रिहेंसिव बीमा (थर्ड पार्टी और अपनी गाड़ी को नुकसान के बीमा) के साथ भी मिल सकेगा, जैसा आजकल मिलता है। लेकिन जो ग्राहक 15 लाख रुपये या उससे अधिक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा लेते हैं, उन्हें वाहन पॉलिसी लेते समय इसे एक बार फिर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

 
बीमा नियामक के इस फैसले का असर समझने के लिए हमें कुछ पीछे जाना पड़ेगा और देखना पड़ेगा कि कुछ अरसा पहले क्या-क्या हुआ था। वाहन बीमा पॉलिसी में तीन हिस्से होते हैं: थर्ड पार्टी लायबिलिटी (जिसमें किसी अन्य व्यक्ति को होने वाले नुकसान का बीमा होता है), स्वयं को होने वाला नुकसान (जिसमें अपने वाहन को होने वाले नुकसान का बीमा होता है) और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा। थर्ड पार्टी और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा वाहन बीमा के अनिवार्य घटक होते हैं, जबकि स्वयं को होने वाले नुकसान का बीमा वैकल्पिक होता है। सितंबर में मद्रास उच्च न्यायालय ने बाइक पर 1 लाख रुपये और कार पर 2 लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पर्याप्त नहीं है। इनका प्रीमियम भी 50 रुपये और 100 रुपये होता था। आईआरडीएआई ने न्यूनतम व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया और उसका प्रीमियम 750 रुपये तय कर दिया। 
 
इससे पहले जब व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा का प्रीमियम 50 रुपये और 100 रुपये था तब लोग इस पर ध्यान ही नहीं देते थे। लेकिन जब प्रीमियम बढ़ाकर 750 रुपये कर दिया गया तो खास तौर पर बाइक मालिकों के लिए बीमा के खर्च में इसका हिस्सा काफी ज्यादा हो गया। उसके बाद एक बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में वाहन बीमा के कारोबार इकाई प्रमुख सज्जा प्रवीण चौधरी कहते हैं, 'अगर किसी व्यक्ति के पास अभी कई वाहन हैं तो उसे सभी बीमा पॉलिसियों में 750-750 रुपये का प्रीमियम देना पड़ रहा है। लेकिन जोखिम दोगुना या तिगुना नहीं होता। कार का मालिक एक वक्त पर केवल एक ही कार या बाइक चला सकता है। अगर कोई दुर्घटना हो जाती है तो उसे केवल एक ही बीमा पॉलिसी से भुगतान मिलेगा।' आईआरडीएआई ने यह दिक्कत खत्म करने के लिए हालिया बदलाव किए हैं।
 
इन फैसलों के कई प्रभाव पडऩे जा रहे हैं। बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस में अनुपालना अधिकारी ओंकार कोठारी कहते हैं, 'अभी तक जब कोई व्यक्ति थर्ड पार्टी बीमा या पैकेज बीमा खरीदता था तो उसे व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा खरीदना ही पड़ता था। अब यदि ग्राहक के पास पहले से ही व्यक्तिगत दुर्घटना एवं अशक्तता बीमा है और कुल 15 लाख रुपये या उससे अधिक की राशि का बीमा है तो उसे दोबारा वही बीमा खरीदने की जरूरत नहीं है। यह भी जरूरी नहीं है कि व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा वाहन बीमा पॉलिसी के साथ ही खरीदा गया हो।' 
 
सामान्य बीमा कंपनियां भी अब अलग से व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा बेच सकेंगी, जिनमें बीमा राशि 15 लाख रुपये या उससे अधिक होगी। इन पॉलिसियों पर वे पॉलिसी की विशेषताओं तथा एक्चुअरी सिद्घांतों के हिसाब से प्रीमियम वसूल सकेंगी। चौधरी कहते हैं, 'हो सकता है कि प्रतिस्पद्र्घा बढ़े तो अलग से व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा लेने पर प्रीमियम और भी कम हो जाए।' नियामक ने हाल ही में जो बदलाव किए हैं, उनसे उन व्यक्तियों को भी बहुत राहत मिलेगी, जिनके पास कई वाहन हैं। ऐको जनरल इंश्योरेंस के उत्पाद रणनीति प्रमुख अनिमेष दास कहते हैं, 'जिस व्यक्ति के पास कई वाहन हैं, उसे अभी हरेक वाहन की बीमा पॉलिसी के साथ व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा लेना पड़ता है और हर पॉलिसी के एवज में 750 रुपये का प्रीमियम भी देना पड़ता है। लेकिन अब उसे केवल एक ही बार प्रीमियम देना पड़ेगा और अगर उसके पास पहले से ही व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा है तो उसे प्रीमियम देना ही नहीं पड़ेगा।'
Keyword: car, insurance, IRDAI,,
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