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2022 तक मानव के अंतरिक्ष में जाने की राह खुली

टीई नरसिम्हन / चेन्नई December 28, 2018

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज भारत के पहले स्वदेशी मानव अंतरिक्षयान कार्यक्रम को मंजूरी दे दी। इस कार्यक्रम को गगनयान परियोजना नाम दिया गया है। यह परियोजना 10,000 करोड़ रुपये की है। इसके तहत 3 सदस्यों को कम से कम 7 दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।  केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मंजूरी के बाद इस कार्यक्रम को 40 महीने के भीतर लागू किया जाएगा। मंत्री ने कहा, 'यह (कार्यक्रम) अंतरिक्ष में भारत की ताकत बढ़ाएगा।' इस कार्यक्रम पर शैक्षणिक जगत और उद्योग के सहयोग से इसरो काम करेगा। 

 
इसरो अंतरिक्ष में जाने वाले क्रू के प्रशिक्षण के लिए बेंगलूरु स्थित इंस्टीट्यूट आफ एयरोस्पेस मेडिसिन के साथ काम करेगा और भारतीय वायुसेना क्रू का चयन करेगी।  इसरो का लक्ष्य अंतरिक्ष यात्रियों को धरती से 350-400 किलोमीटर की ऊंचाई और धरती की कक्षा तक भेजना है। इसमें स्वदेशी भूस्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण वाहन मार्क 3 (जीएसएलवी-3) का इस्तेमाल किया जाएगा।  उम्मीद की जा रही है कि मानवयुक्त यान भेजने के पहले इसरो 2 मानवरहित यान भेजेगा। 2 महीने पहले इसरो ने जीएसएलवी एमके-3 के अगले संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था, जो इस दिशा में एक और कदम था। इसमें स्वदेशी उच्च विश्वसनीय क्रायोजेनिक इंजन लगा हुआ है। 
 
इसरो के चेयरमैन के सिवन ने कहा कि भारत में उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल कर इसरो इस मिशन को ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी बनाना चाहता है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर 15 अगस्त 2018 को दिए भाषण में 2022 तक मानवयुक्त विमान अंतरिक्ष में भेजने की घोषणा की थी। अगर यह कार्यक्रम सफल रहता है तो अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत अंतरिक्ष में मानव भेजने वाला चौथा देश होगा।  सिवन ने कहा कि इस कार्यक्रम से देश के विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, 'इसकी समय सीमा बहुत कम है, लेकिन हम यह कर सकते हैं। इसरो ने पहले ही वह तकनीकें तैयार कर ली हैं, जो मानव को अंतरिक्ष में भेजने के लिए जरूरी हैं। प्रधानमंत्री द्वारा अंतरिक्ष मेंं मानव भेजने की घोषणा के बाद इसरो ने इस कार्यक्रम पर काम किया था।'
 
उन्होंने अनुमान लगाया कि अंतरिक्ष में मानव भेजने के मिशन से अगले कुछ साल में 15,000 नौकरियों का सृजन होगा।  सिवन ने कहा कि क्रू मॉड्यूल और क्रू स्केप सिस्टम सहित कुछ महत्त्वपूर्ण तकनीकें पहले ही तैयार हैं। क्रू मॉड्यूल की उड़ान का परीक्षण प्रायोगिक मिशन के तौर पर 2014 में ही किया गया था। यह धरती पर सफलतापूर्वक लौटा और इसे रिकवर किया गया था। इसके लिए तकनीकी तैयारियां 2004 से ही चल रही थीं। 
 
चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग
 
मंत्रिमंडल ने भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएम) विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी जिसका मकसद मौजूदा नियामक भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (सीसीआईएम) के स्थान पर एक नया निकाय गठित करना है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। मसौदे में 4 स्वायत्त बोर्डों के साथ एक राष्ट्रीय आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है।  इसके तहत आयुर्वेद से जुड़ी समग्र शिक्षा के संचालन की जिम्मेदारी आयुर्वेद बोर्ड और यूनानी, सिद्ध एवं सोवा रिग्पा से जुड़ी समग्र शिक्षा के संचालन की जिम्मेदारी यूनानी, सिद्ध एवं सोवा रिग्पा बोर्ड के पास होगी। इसके अलावा दो सामान्य या आम बोर्डों में आकलन एवं रेटिंग बोर्ड और आचार नीति एवं भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के चिकित्सकों का पंजीकरण बोर्ड शामिल हैं। आकलन एवं रेटिंग बोर्ड भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के शैक्षणिक संस्थानों का आकलन करने के साथ-साथ उन्हें मंजूरी देगा। 
 
भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के चिकित्सकों का पंजीकरण बोर्ड भारतीय राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अधीन प्रैक्टिस से जुड़े आचार नीति मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय रजिस्टर के रख-रखाव की जिम्मेदारी संभालेगा। मसौदे में सामान्य प्रवेश परीक्षा और एक एक्जिट एक्जाम का प्रस्ताव भी है। प्रैक्टिस का लाइसेंस हासिल करने के लिए सभी स्नातकों को इसे उत्तीर्ण करना होगा। विधेयक में एक शिक्षक अर्हता परीक्षा आयोजित करने का भी प्रस्ताव है, ताकि नियुक्ति एवं पदोन्नति से पहले शिक्षकों के ज्ञान के स्तर का आकलन किया जा सके। 
 
मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) की स्थापना के लिए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा नियामक संस्था केंद्रीय होम्योपैथी परिषद (सीसीएच) की जगह एक नई संस्था का गठन करेगा। आयोग के अंतर्गत तीन स्वायत्त परिषदें होंगी। होम्योपैथी शिक्षा परिषद द्वारा दी जाने वाली होम्योपैथी शिक्षा के संचालन की जिम्मेदारी स्वायत्त परिषदों पर होंगी।  
 
पॉक्सो कानून में संशोधन की मंजूरी
 
सरकार ने पॉक्सो कानून में संशोधन की मंजूरी दी है साथ ही, बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में दंड को और भी कठोर बनाने के लिए सख्त उपाय किए हैं।  केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण होना चाहिए और मंत्रिमंडल ने यौन अपराधों से बाल संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की विभिन्न धाराओं में संशोधन को मंजूरी दी है। प्रसाद ने कहा कि यह एक संपूर्ण कोशिश है जिसमें पॉक्सो अधिनियम की पूरी संरचना को न केवल मजबूत किया गया है बल्कि इसका विस्तार भी किया गया है ताकि बच्चों से उनकी बाल्यावस्था छीनने के लिए दवाइयों या हार्माेन का इस्तेमाल नहीं किया जा सके। पॉक्सो अधिनियम की संबद्ध धारा-9 को और अधिक सख्त बनाया गया है।  
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