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सोने में निवेश: देश से बाहर नहीं जाएगा डॉलर

राजेश भयानी / मुंबई December 27, 2018

वित्त मंत्रालय सोने में निवेश की एक ऐसी योजना पर काम कर रहा है जिसके तहत सोना खरीदते समय डॉलर के बाहर जाने पर रोक लगाई जा सकेगी। यह योजना दूसरी योजनाओं से अलग है और सरकार पर कीमतों का जोखिम शामिल नहीं है।  इस योजना को भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद द्वारा स्थापित इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर (आईजीपीसी) द्वारा प्रस्तावित किया गया है। इस विचाराधीन प्रस्ताव के तहत सोने में फॉरवर्ड कारोबार करने वाले अंतरराष्ट्रीय बैंकों को शामिल करने की योजना है। जैसे, एक वर्ष के लिए फॉरवर्ड सौदे। इस कारोबार को ऐसे भारतीय बैंकों के साथ किया जाएगा, जिनका संबंध सोना-चांदी कारोबार करने वाले अंतरराष्ट्रीय बैंकों के साथ हो। 
 
फिलहाल, सोने को भौतिक रूप में खरीदने के अलावा निवेशकों के पास सोने में निवेश के केवल दो विकल्प उपलब्ध हैं। पहला, सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड, जहां सोने को भौतिक तौर पर नहीं मंगाया जाता लेकिन निवेशक को सोने की कीमतों पर रिटर्न के साथ ही 2.5 प्रतिशत की दर से ब्याज भी मिलता है। हालांकि योजना की परिपक्वता अवधि (8 वर्ष) पूरी होने के बाद सरकार कीमत संबंधी जोखिम उठाती है। दूसरा विकल्प गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड हैं जहां निवेशक फंड मैनेजमेंट कंपनी को एक शुल्क चुकाती है और कंपनी को संबंधित कीमत का सोना भौतिक तौर पर खरीदना होता है। इससे सोने के आयात में कमी करने के प्रयास को कोई मदद नहीं मिलती। 
 
कमोडिटी डेरिवेटिव में गोल्ड फ्यूचर्स खरीदना एक विकल्प हो सकता है लेकिन इसमें सौदे की परिपक्वता तक लगातार लागत बनी रहती है और इसमें बाजार के जोखिम शामिल होते हैं। कमोडिटी डेरिवेटिव निवेश के बजाय हेजिंग के लिए बेहतर विकल्प होता है।  आईजीपीसी के प्रस्ताव का विचार इसके प्रमुख सुधीश नांबियथ लेकर आए थे। प्रस्ताव के अनुसार, निवेशक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की फॉरवर्ड डिलिवरी बुकिंग के लिए बैंक को पूरी राशि का भुगतान करेगा। अगर यह एक वर्ष के लिए है तो फॉरवर्ड बुकिंग प्रीमियम सोने की कीमत का लगभग 2.5 प्रतिशत होगा। निवेशक को एक लाभ यह होगा कि फॉरवर्ड बुकिंग सौदे में उसे 10 प्रतिशत सीमा शुल्क और 3 प्रतिशत जीएसटी नहीं देना होगा, जब तक कि वह अपने निवेश की मांग भौतिक तौर पर नहीं करता। बैंकों द्वारा स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय सोना-चांदी कारोबार में भागीदारी के अध्ययन के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। 
 
खरीदार बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि लेनदेन फॉरेक्स खाते में जमा हो जिससे अगर निवेशक कोने को भौतिक तौर पर मंगाना चाहे तो बैंक को मुद्रा कीमत संबंधी जोखिम ना उठाना पड़े। हालांकि निवेशक को डिलिवरी के समय लगने वाले करों का भुगतान करना होगा। सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड के मुकाबले यहां एक लाभ यह है कि अगर नीति आयोग पैनल द्वारा प्रस्तावित स्वर्ण आयात शुल्क में कटौती की जाती है तो निवेशक को हानि नहीं उठानी पड़ेगी। सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड में कीमतें बाजार पर आधारित होती हैं और अगर निवेश अवधि के बीच में आयात शुल्क में कमी कर दी जाती है तो निवेशक को कम कीमत मिलेगी। 
 
फॉरवर्ड बुकिंग में बैंक को अवधि पूरी होने के बाद रुपये देने होते हैं जबकि निवेशक पहले ही पूरी कीमत बैंक को दे देते हैं। इस राशि को बैंक दूसरे कर्ज आदि देने में निवेश करके लाभ कमाते हैं। बैंक के लिए फॉरवर्ड प्रीमियम, हेजिंग लागत आदि के तौर पर कुल लागत करीब 2.5 प्रतिशत आती है। निवेशकों के लिए यह भौतिक तौर पर सोना रखने के समान ही है लेकिन यहां सोना सहेजने से छुटकारा और खरीदने के दौरान किसी तरह का कर ना देने जैसे लाभ शामिल हैं। इससे नीति निर्माता देश से डॉलर के बाहर जाने पर रोक लगा सकेंगे और बैंकों को मिलने वाली राशि से आर्थिक गतिविधियों में इजाफा होगा। 
 
आईजीपीसी प्रस्ताव में कहा गया, 'तस्करी को हतोस्ताहित करने का यह बेहतर तरीका है और पिछले कुछ वर्षों से काफी लोकप्रिय हो रहा है।' तस्करी कर देश में लाया गया सोना आधिकारिक तौर पर आयातित सोने से 1-2 प्रतिशत कम कीमत पर बेचा जाता है जिससे काली अर्थव्यवस्था और अवैध गतिविधियों में इजाफा होता है। 
 
सोने पर नीति जल्द : प्रभु
 
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि सरकार स्वर्ण उद्योग और आभूषण निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक एकीकृत स्वर्ण नीति तैयार कर रही है। इसे जल्दी ही जारी किए जाने की उम्मीद है। प्रभु ने कहा, 'हम स्वर्ण नीति पर काम कर रहे हैं। हमें एकीकृत नीति की जरूरत है। अगले कुछ दिनों में हम नीति तैयार करने को लेकर सभी संबद्ध पक्षों के साथ बैठक करेंगे। हम नीति में स्वर्ण से संबद्ध सभी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं।' यह पूछे जाने पर कि क्या मंत्रालय सोने पर आयात शुल्क में कटौती की मांग पर विचार करेगा, उन्होंने कहा, वह उस पर भी गौर करेगा। घरेलू उद्योग सोने पर आयात शुल्क कम कर 4 प्रतिशत करने की मांग कर रहा है। फिलहाल यह 10 प्रतिशत है। मंत्री ने कहा कि देश सोने का सबसे बड़ा ग्राहक और आयातक है, इसके बावजूद फिलहाल ऐसी कोई नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में मूल्यवृद्धि सोने का निर्यातक बनने की क्षमता है। नीति में घरेलू स्वर्ण उद्योग तथा रत्न एवं आभूषण के निर्यात को बढ़ावा देने पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। कुल वस्तु निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है। भाषा
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