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एनबीएफसी ने प्रधानमंत्री से कहा, नियमों से दबा क्षेत्र

शुभायन चक्रवर्ती, सोमेश झा और अभिजित लेले / नई दिल्ली/मुंबई December 26, 2018

उद्योग संगठन एसोचैम के साथ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र के कुछ प्रमुख कारोबारियों ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात कर नियामकीय मानक आसान करने का अनुरोध किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि किस तरह से 'ओवर रेग्युलेशन' के कारण उनकी नकदी पर असर पड़ रहा है और यह क्षेत्र रेंगने को मजबूर है। इस उद्योग के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने उद्योग के अधिकारियों से कहा कि सभी संबंधित पक्षों- वित्त मंत्रालय व भारतीय रिजर्व बैंक को  इस मसले पर एक साथ लाया जाना चाहिए। 

 
एनबीएफसी की ओर से एसोचैम ने प्रधानमंत्री को विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें कुछ प्रमुख मसले व सुझाव दिए गए हैं। इसमें एनबीएफसी को कर्ज की मात्रा बढ़ाया जाना और नकदी की स्थिति बेहतर करना शामिल है। एनबीएफसी की सरकार से शिकायत है कि धन जुटाने की कवायद अभी भी बहुत ज्यादा प्रतिबंधित है, जिसकी वजह से नकदी का संकट हो रहा है।  मांग के लिए पेश किए गए ज्ञापन में कहा गया है, 'बैंकों के साथ तालमेल बिठाने के मकसद से नियम बनाए गए हैं, जिसकी वजह से नियमों की अधिकता हो गई है और एनबीएफसी का नियमन बैंकों की तरह हो रहा है। इससे कर्ज देने के अनोखे एनबीएफसी मॉडल पर खराब असर पड़ रहा है, जिसकी वजह से 2008 के वैश्किक संकट की विपरीत परिस्थितियों और हाल के नकदी संकट के समय में निपटने में मदद मिली थी।'
 
इस बैठक में शामिल होने वालों में एलऐंडटी फाइनैंस होलिंग्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी दीनानाथ दुभाषी, फाइनैंस इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल के चेयरमैन रमण अग्रवाल और श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनैंस कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक उमेश रेवंकर शामिल थे।  सूत्रों ने कहा कि नकदी की स्थिति पर प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में सबसे ज्यादा बातचीत हुई। इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल एक व्यक्ति ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'इस क्षेत्र की धारणा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जाने की जरूरत है। आईएलऐंडएफएस संकट के बाद से सभी प्रतिबद्धताएं (वाणिज्यिक पत्रों के रूप में) दरकिनार कर दी गई हैं जबकि एक भी चूक नहीं हुई है। हम चाहते हैं कि धन जुटाना आसान करने की दिशा में कदम उठाए जाएं।'
 
राहत के एक दर्जन कदमों का प्रस्ताव करते हुए एसोचैम ने अपने ज्ञापन में कहा है कि रिजïर्व बैंक को एनबीएफसी या हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों (एचएफसी) को सुरक्षित कर्ज की बिक्री के एवज में 'इन सुरक्षित कर्जों पर उचित मुनाफा लेकर' नकदी मुहैया कराने पर विचार किया जाना चाहिए। इसमें नैशनल हाउसिंग बैंंक और रिजर्व बैंक से उच्च दरों पर पुनर्वित्तपोषण की सुविधा देने की मांग की गई है, जिससे आत्मविश्वास बहाल होने में मदद मिल सके।  ज्ञापन में कहा गया है, 'मुद्रा (माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट ऐंड रिफाइनैंस एजेंसी बैंक) के एनबीएफसी के लिए पुनर्वित्तपोषण के मानकों को बदलकर उन्हें छोटे और मझोले एनबीएफसी के लिए व्यावहारिक और स्वीकार्य बनाए जाने की जरूरत है। इससे मुद्रा की वृद्धि को बहुत बढ़ावा मिल सकता है और इसके गठन के इच्छित लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।' 
 
सूत्रों ने कहा कि एक और प्रमुख मांग में एनबीएफसी को सार्वजनिक जमा की अनुमति देना शामिल है। इस समय 11,000 एनबीएफसी में सिर्फ 100 के करीब को ही रिजर्व बैंक द्वारा सार्वजनिक जमा कराने की अनुमति मिली हुई है। ज्ञापन में कहा गया है, 'व्यवस्थित और महत्त्वपूर्ण एनबीएफसी (जिनकी संपत्ति 500 करोड़ रुपये या उससे ऊपर है) ने देश भर में ग्राहकों का बड़ा आधार बना लिया है। जमा कराने वाले एनबीएफसी होने के कारण वे ज्यादा सख्त नियमन के दायरे में हैं।'   सूत्रों ने कहा कि इस उद्योग ने प्रधानमंत्री से कहा कि अहम जनसंख्या तक पहुंच वाले एनबीएफसी क्षेत्र को कम कठिनाई में बैंकोंं में तब्दील होने की अनुमति दी जानी चाहिए। उद्योग संगठन ने मांग की है कि बैंक बनाने के एनबीएफसी की ओर से आए आवेदनों को अन्य बैंकिंग लाइसेंस आवेदनों की तुलना में तरजीह दी जानी चाहिए। ज्ञापन में कहा गया है, 'एनबीएफसी पहले से ही जांच के दायरे में हैं और रिजर्व बैंक को नियमित रूप से रिटर्न दाखिल करते हैं, ऐसे मेंं एनबीएफसी की ओर से आए बैंकिंग लाइसेंस के आवेदनों को कम समय में अनुमति मिलनी चाहिए।' 
Keyword: NBFC, bank, micro finance,,
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