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दिवालिया प्रक्रिया के चलते गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स पर कोल इंडिया गरम

अभिषेक रक्षित / कोलकाता December 24, 2018

कोल इंडिया ने अपनी सहायक इकाई ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के मामले में नैशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) से स्थगनादेश हासिल करने के बाद गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स इंडिया पर आरोप लगाया है कि उसने विवाद निपटान तंत्र का इस्तेमाल नहीं किया और जल्दबाजी में अदालत जाने का निर्णय ले लिया। नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के कोलकाता पीठ ने 19 दिसंबर को गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद ईसीएल के खिलाफ ऋण शोधन प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था। साथ ही एनसीएलटी ने सी राजभर ऐंड कंपनी के छेदी राजभर को ईसीएल के लिए अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त कर दिया था। याचिका में गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स ने ईसीएल पर 40.9 लाख रुपये के बकाये का आरोप लगाया था।

 
हालांकि एनसीएलटी में ईसीएल अपने खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू किए जाने का मुकदमा हार गई थी। उसके बाद ईसीएल की मूल कंपनी कोल इंडिया ने अपनी सहायक इकाई के बदले मैदान में उतरी और एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ एनसीएलएटी में चुनौती दी। कोल इंडिया ने दावा किया कि गल्प ऑयल लुब्रिकेंट्स के दावे को पहले ही निपटाया जा चुका है। एनसीएलएटी ने 22 दिसंबर को जारी अपने आदेश के तहत ईसीएल के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने संबंधी एलसीएलटी के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया।
 
इस मामले में कोल इंडिया के सीधे तौर पर शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर कोल इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'इस मामले में शामिल होना हमारे लिए स्वाभाविक है क्योंकि हमने देखा कि हमारे बच्चे (सहायक इकाई) को एनसीएलटी में घसीटा जा रहा है।' दिलचस्प है कि गल्प ऑयल लुब्रिकेंट्स ईसीएल का परिचालन लेनदार है और अपीलीय ट्रिब्यूनल में उसका कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। कोल इंडिया के एक सूत्र ने आरोप लगाया कि हिंदुजा ग्रुप की इकाई गल्प ऑयल लुब्रिकेंट्स इंडिया ने ईसीएल अथवा कोल इंडिया के विवाद निपटान तंत्र का सहारा नहीं लिया जहां मामले को आसानी से निपटाया जा सकता था। सूत्रों के अनुसार, गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स के पास सबसे पहले यह मुद्दा कोल इंडिया के सामने उठाने का विकल्प मौजूद था। कंपनी को यदि लगता कि ईसीएल में उसकी सुनवाई नहीं हुई और यदि गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स संतुष्ट नहीं होती तब उसे अदालत का रुख करना चाहिए था।
 
इस बाबत जानकारी के लिए बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा गल्प ऑयल लुब्रिकेंट्स को भेजे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया। ईसीएल के एक करीबी सूत्र ने बताया कि इस मामले में गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स के साथ अनुबंध में ऐसा कोई जिक्र नहीं किया गया था कि मूलधन पर सालाना 18 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान किया जाएगा जबकि अदालत में ऐसा दावा किया गया था। एनसीएलएटी में मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।
Keyword: coal india, gulf, oil,,
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